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जमीन जल रही है फिर भी चल रहा हूं मैं...
ब्यूरो/अमर उजाला, बड़ौत
Updated Thu, 15 Sep 2016 01:33 AM IST
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बड़ौत में आयोजित कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करती कावियत्री।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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श्री महावीर सेवा समिति मंडी के तत्वावधान में मंगलवार की रात विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें कवियों ने वर्तमान परिवेश और राष्ट्र प्रेम से ओत-प्रोत काव्य पाठ कर श्रोताओं की वाह-वाही लूटी।
कवि सम्मेलन का शुभारंभ सरस्वती वंदना से अनामिका ने किया। मंच संचालन सौरभ सुमन ने किया। दिल्ली से आए कवि महेंद्र शर्मा ने कहा ‘मन के उपवन को महकाएं तो कुछ बात बनें अधरों पर मुस्कान सजाएं तो कुछ बात बनें’।
दिल्ली से आई कवयित्री मोनिका ने कहा, ‘याद देजा आखिरी तन्हा बनाकर छोड़ दे गैर मत होना मुझे अपना बना कर छोड़ दे’, डॉ. विष्णु सक्सेना ने कहा कि ‘जमीन जल रही है फिर भी चल रही हूं खिजा का वक्त है और फूल फल रहा हूं मैं’, हाथरस से आए कवि साबरस मुरसानी ने कहा कि ‘स्वार्थ को जो भी जीते है उनकी भी क्या जिंदगानी है जो मातृ भूमि पर मिट न सकी वो भी क्या यार जवानी है’।
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डॉ. निखिल देव चौहान ने कहा कि ‘अहले वतन का दिल में मेरे मान बहुत है और तिरंगे का भी सम्मान बहुत है’। नजीबाबाद से आए डॉ. शुभम त्यागी ने कहा, ‘लगाकर ताज को ठोकर जो सूली पे चढ़े हंसकर हमारे नौजवानों की जवानी हो तो ऐसी हो’। कवयित्री अनामिका ने कहा, ‘न ये द्वेषी है ना ये रागी है पाप करते जो कहते दागी है’।
इनके अलावा मेरठ से आए सौरभ सुमन, दिल्ली से प्रीति विश्वास और लक्ष्मण नेपाली आदि सभी कवियों ने अपनी कविता के माध्यम से नेताओं पर जमकर तंज कसे। कवि सम्मेलन का उद्घाटन रविंद्र जैन दिल्ली ने किया।
इसमें बतौर मुख्य अतिथि रालोद नेता अश्वनी तोमर उपस्थित रहे। इसकी अध्यक्षता रायचंद जैन ने की। इसमें दीप प्रज्ज्वलन सुनील जैन और चित्र अनावरण प्रेमचंद, पवन जैन ने किया। इसके आयोजन में प्रमोद जैन, शशि जैन, अशोक जैन, रमेश जैन, मुकेश जैन, प्रदीप जैन, आशीष जैन, विपिन जैन, अनिल जैन, सतेंद्र जैन, वीरसैन जैन आदि का सहयोग रहा।
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कवि सम्मेलन का शुभारंभ सरस्वती वंदना से अनामिका ने किया। मंच संचालन सौरभ सुमन ने किया। दिल्ली से आए कवि महेंद्र शर्मा ने कहा ‘मन के उपवन को महकाएं तो कुछ बात बनें अधरों पर मुस्कान सजाएं तो कुछ बात बनें’।
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दिल्ली से आई कवयित्री मोनिका ने कहा, ‘याद देजा आखिरी तन्हा बनाकर छोड़ दे गैर मत होना मुझे अपना बना कर छोड़ दे’, डॉ. विष्णु सक्सेना ने कहा कि ‘जमीन जल रही है फिर भी चल रही हूं खिजा का वक्त है और फूल फल रहा हूं मैं’, हाथरस से आए कवि साबरस मुरसानी ने कहा कि ‘स्वार्थ को जो भी जीते है उनकी भी क्या जिंदगानी है जो मातृ भूमि पर मिट न सकी वो भी क्या यार जवानी है’।
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डॉ. निखिल देव चौहान ने कहा कि ‘अहले वतन का दिल में मेरे मान बहुत है और तिरंगे का भी सम्मान बहुत है’। नजीबाबाद से आए डॉ. शुभम त्यागी ने कहा, ‘लगाकर ताज को ठोकर जो सूली पे चढ़े हंसकर हमारे नौजवानों की जवानी हो तो ऐसी हो’। कवयित्री अनामिका ने कहा, ‘न ये द्वेषी है ना ये रागी है पाप करते जो कहते दागी है’।
इनके अलावा मेरठ से आए सौरभ सुमन, दिल्ली से प्रीति विश्वास और लक्ष्मण नेपाली आदि सभी कवियों ने अपनी कविता के माध्यम से नेताओं पर जमकर तंज कसे। कवि सम्मेलन का उद्घाटन रविंद्र जैन दिल्ली ने किया।
इसमें बतौर मुख्य अतिथि रालोद नेता अश्वनी तोमर उपस्थित रहे। इसकी अध्यक्षता रायचंद जैन ने की। इसमें दीप प्रज्ज्वलन सुनील जैन और चित्र अनावरण प्रेमचंद, पवन जैन ने किया। इसके आयोजन में प्रमोद जैन, शशि जैन, अशोक जैन, रमेश जैन, मुकेश जैन, प्रदीप जैन, आशीष जैन, विपिन जैन, अनिल जैन, सतेंद्र जैन, वीरसैन जैन आदि का सहयोग रहा।