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हेपेटाइटिस की चपेट में बौढ़ा

Tue, 11 Feb 2020 11:57 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 11 Feb 2020 11:57 PM IST
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Hepatitis
बौढ़ा गांव में लगे स्वाथ्य शिविर में बच्चें को दवाई देते चिकित्सक। - फोटो : BAGHPAT
हेपेटाइटिस की चपेट में बौढ़ा
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छपरौली (बागपत)। स्वास्थ्य विभाग ने बौढ़ा गांव में कैंप लगाकर 326 मरीजों की जांच की। 259 मरीजों के खून के सैंपल लिए हैं। जांच में दस लोगों को हेपेटाइटिस सी के लक्षण मिले है। सीएमओ डॉ आरके टंडन का कहना है कि कुछ लोगों की प्राथमिक स्क्रीनिंग में हेपेटाइटिस सी के लक्षण मिले हैं। सीएचसी पर जांच कराई जाएगी।
अमर उजाला ने 11 फरवरी के संस्करण में ‘रहस्यमयी बीमारी की चपेट में बौढ़ा, 10 दिन में सात की मौत’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर गांव के हालात दर्शाए थे। इसी पर मंगलवार स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बौढ़ा गांव में डेरा डाल लिया। सीएमओ डॉ आरके टंडन और सीएचसी छपरौली अधीक्षक डॉ अजेंद्र मलिक के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम गांव पहुंची तो सैकड़ों मरीजों की भीड़ लग गई। सीएचसी अधीक्षक ने बताया कि 326 मरीजों की जांच की गई है, जिनमें 259 के ब्लड सैंपल लिए गए हैं। कुछ मरीजों में हेपेटाइटिस सी के लक्षण मिले हैं। मरीजों की अधिक संख्या को देखते हुए बुधवार या बृहस्पतिवार को गांव में दोबारा कैंप लगाकर रोगियों को ट्रेस किया जाएगा। फिजिशियन डॉ श्रवण, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ नीरज त्यागी, हेल्थ सुपरवाइजर संदीप कुमार, सुधीर कुमार, एएनएम सरला और प्रियंका शामिल रही।
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हेपेटाइटिस सी की मेरठ में फाइनल जांच
छपरौली। सीएचसी अधीक्षक ने बताया कि जिन मरीजों में हेपेटाइटिस सी के लक्षण मिले हैं, उनकी सीएचसी पर जांच होगी। इसके बाद जिला अस्पताल में जांच कराई जाएगी। इसके बाद भी लक्षण मिलते हैं तो मेरठ मेडिकल कॉलेज में फाइनल जांच होगी। एलीसा और पीसीआर के माध्यम से ही फाइनल जांच होगी, जो मेरठ में ही संभव है।
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हेपेटाइटिस सी के लक्षण
छपरौली। शरीर में पीलापन, पेशाब व आंखों में पीलापन, भूख न लगना, उलटी आना, पेट खराब रहना, पेट में दर्द रहना, पेट का अतिरिक्त फूलना और बुखार आना।
हेपेटाइटिस सी के कारण
छपरौली। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि संक्रमित सुई के माध्यम से फैल सकता है। असुरक्षित यौन संबंध भी वजह हो सकते हैं। संक्रमित गर्भवती माता से जन्मे बच्चे, संक्रमित खून चढ़ाने से या इंजेक्शन से नशा करने वाले व्यक्ति को बीमारी फैलने की अधिक संभावना होती है।

इस तरह करें बचाव
छपरौली। ग्रामीणों से आह्वान किया कि साफ सफाई रखें, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं, खून चढ़वाने से पहले जांच कराएं, इंजेक्शन के समय नई सुई का इस्तेमाल करें।
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