एक्सक्लूसिव: फसलों के लिए खतरा बने छह कीट, बेअसर हुए कीटनाशक, उत्पादन हो रहा प्रभावित
कीटनाशकों का भी कीटों पर असर नहीं हो रहा है। फसलों को नुकसान पहुंचा रहे तकरीबन छह कीट ऐसे हैं जिन पर कीटनाशक दवाएं भी बेअसर नजर आ रही हैं। उत्तर प्रदेश के बागपत में खेकड़ा कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों की ओर से कराए गए सर्वे में ये खुलासा हुआ है। वहीं आंकड़ों के मुताबिक गन्ने का उत्पादन 20 फीसदी और धान का 15 फीसदी तक कम हुआ है। पढ़ें ये खबर।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तर प्रदेश के 22 जनपदों में लहरा रही फसलों के लिए छह कीट खतरा बनते जा रहे हैं। इसका खुलासा कृषि विभाग के अधिकारियों की रिपोर्ट में हुआ है। चिंताजनक की बात यह है कि ये कीट अब इतने आदी हो चुके है कि इन पर कीटनाशकों का भी असर नहीं पड़ रहा है। कोई कीट फसलों की जड़ पर हमला बोल रहा है तो कोई पत्तियों पर। यहीं वजह है कि हर साल गन्ना, गेहूं, धान, सरसों सहित सब्जी और दलहनी फसलों के उत्पादन पर इसका असर बुरा पड़ रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों मुताबिक कीटों के असर के कारण गन्ने का उत्पादन 20 फीसदी और धान का 15 फीसदी तक कम हुआ है।
खेकड़ा कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि पिछले साल धान का उत्पादन प्रति बीघा 3.70 क्विंटल का था, लेकिन इस बार यह 2.90 क्विंटल पर सिमट गया है। वर्ष 2019 में गन्ने का उत्पादन 75 से 80 क्विंटल प्रति बीघा था। वर्ष 2020 में 70 से 75 क्विंटल प्रति बीघा था, लेकिन वर्ष 2021 में हुए सर्वे के हिसाब से 65 से 70 क्विंटल प्रति बीघा रह गया है।
बताया कि वर्ष 2019 में सरसों का उत्पादन प्रति बीघा 2.50 क्विंटल था जो वर्ष 2020 में 2.35 रह गया था। वर्ष 2021 में सरसों की दोगुनी बुआई के बावजूद उत्पादन दी क्विंटल प्रति बीघा का अनुमान है। आंकलन के मुताबिक गन्ने का उत्पादन 20 फीसदी घटा है। धान का उत्पादन पिछलेेेे कुछ वर्षों के मुकाबले 15 फीसदी कम हुआ है।
यह भी सुनें: Meerut News Today 25 November: मेरठ समाचार | सुनिए शहर की ताजातरीन खबरें
2015 के बाद बढ़ा खतरा
वैज्ञानिक डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में गन्ना, धान, गेहूं और आलू मुख्य फसलों में शामिल है। सब्जी और दलहनी फसलों का रकबा भी काफी है। वर्ष 2015 के बाद इन फसलों पर छह खतरनाक कीटों का खतरा बढ़ा है। ये तमाम फसलें अब रोग वाली हो चली है। कृषि वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के अनुसार यह छह कीट फसलों की क्वालिटी को बिगाड़ रहे है।
इन जनपदों में सबसे ज्यादा असर
बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, बुलंदशहर, एटा, आगरा, मथुरा, हाथरस, बरेली, लखीमपुरखीरी, बदायूं, गोरखपुर, मुरादाबाद, आजमगढ़, संभल, इटावा, मेरठ, गाजियाबाद, मैनपुरी, कासगंज, फिरोजाबाद में इन कीटों का ज्यादा असर है।
बार-बार बदलनी पड़ रही दवा, मात्रा भी बढ़ रही
एडीओ कृषि रक्षा नरेश कुमार का कहना है कि मार्केट में कीटों के खात्मे के लिए कोरोजन, एनिडा, क्लोरो सहित तमात दवाइयां उपलब्ध है, लेकिन अब धीरे-धीरे इन दवाइयों का असर भी कीटों पर नहीं हो रहा है। बड़ौत नगर के कीटनाशक विक्रेता संजीव बताते है कि काफी समय से इस व्यवसाय में है। उन्होंने बताया कि कीटों को मारने के लिए साइपर मीथने दवा लंबे समय से प्रचलन में है। पहले कम मात्रा में दवाई के इस्तेमाल से कीट मर जाते थे, लेकिन अब मात्रा बढ़ाने के बाद भी कीट नहीं मर रहे। किसान विपिन पूनिया के अनुसार धीरे-धीरे कीट भी दवा के आदी होते जा रहे है।
कीटों के नाम प्रभावित फसलें
व्हाइट गर्भ (सफेद सूंडी) गन्ना, मूंगफली, आलू, शकरकंद
सफेद मक्खी भिंडी, आलू, मूंग, मिर्च, टमाटर, सभी चौडे़ पत्ते वाले पौधे
टिड्डा गन्ना, धान, ज्वार, बाजरा
गंधी धान की बोलियों का रस जूसकर सूखा देता है।
माहू यह नाजुक कीट है। सरसों, गोभी, जौौ, मूली, शलजम, आलू
दीमक गन्ना, धान, गेहूं, सरसों और सभी फलवाले पौधे