फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   Equations of veterans go awry due to new reservation

नए आरक्षण से गड़बड़ाए दिग्गजों के समीकरण

Fri, 26 Mar 2021 11:04 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 26 Mar 2021 11:04 PM IST
विज्ञापन
Equations of veterans go awry due to new reservation
एससी महिला के आरक्षित जिला पंचायत अध्यक्ष पद के दावेदार लगा रहे गुणा-भाग
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। हाईकोर्ट के आदेश के बाद नए सिरे से आरक्षण जारी होने से दिग्गजाें के साथ कई दावेदारों के समीकरण गड़बड़ा गए हैं। कई भावी उम्मीदवारों के अरमानों पर पानी फिर गया है। सबसे बड़ा झटका जिला पंचायत अध्यक्ष पद तक पहुंचने के सपने देख रहे दिग्गजों को लगा है। यह पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया है। जबकि पिछड़े वर्ग से कई दिग्गज जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर अपनी किस्मत आजमाने को तैयार थे। अब ऐसे लोग अपने अनुसूचित जाति के करीबियों को चुनावी मैदान में उतारने की जुगत लगा रहे हैं।
बता दें कि जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर लगातार तीन बार विधायक योगेश धामा के परिवार का कब्जा रहा। उनकी पत्नी रेनू धामा निवर्तमान अध्यक्ष हैं। जबकि इससे पहले खुद योगेश धामा और उससे पहले रेनू धामा इस पद पर रहीं। लेकिन इस बार यह पद किसी दूसरे परिवार के कब्जे में जाना तय हो गया है।
विज्ञापन

सांसद के गांव में बनेगी एससी प्रत्याशी की सरकार
इस बार सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह के गांव बासौली में ग्राम प्रधान का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया। 2015 में यह पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित था। 2010 में अनारक्षित था। गांव में पिछड़े वर्ग के वोट करीब 84.12 फीसदी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

विधायक योगेश धामा के गांव में प्रधान का पद अनारक्षित
बागपत विधायक योगेश धामा के गांव मवीकलां में प्रधान पद इस बार अनारक्षित है। इस गांव में भी पिछड़ा वर्ग के वोटर पूरी तरह से निर्णायक की स्थिति में हैं। यहां पिछड़ा वर्ग की वोट 81 फीसदी हैं। 2015 में यहां प्रधान पद पिछड़ा वर्ग और 2010 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था।
राज्यपाल के गांव में अनुसूचित जाति का होगा प्रधान
मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के गांव हिसावदा में ग्राम प्रधान का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया है। यहां अनुसूचित वर्ग के मतदाता करीब 19 फीसदी हैं। जबकि पिछड़ा वर्ग के मतदाता 37 फीसदी हैं। 2015 में यह पद महिला के लिए आरक्षित था। 2010 में अनारक्षित था।

छपरौली विधायक के गांव में पिछड़ा वर्ग से होगा प्रधान
छपरौली विधायक सहेंद्र सिंह के गांव रमाला में इस बार पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया है। वर्ष 2015 में यह पद अनारक्षित था। 2010 में यह पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। गांव में पिछड़ा वर्ग के मतदाता करीब 74 फीसदी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed