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शोरूम में डबल बेड, ड्रेसिंग टेबल, सोफा शोपीस बना
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बड़ौत। कोरोना कर्फ्यू में लकड़ी कमी और सहालग में शादियां न होने पर फर्नीचर कारोबार टूटने के कगार पर है। फर्नीचर का काम केवल सहालग पर ही होता है। इसका इंतजार भी कारोबारियों को होता है। दो साल से कोरोना संक्रमण में शादियों में बारातियों की संख्या नियत होने से लोगों ने शादियां भी टाल दी या फिर सादे समारोह में की। इससे फर्नीचर भी नहीं खरीदा जा सका। अब शोरूम में डबल बेड, ड्रेसिंग टेबल, सोफा, डाइनिंग टेबिल आदि चीजें शोपीस बनकर रह गई है। शोरूम स्वामियों की लागत तक नहीं निकल सकी। अब उन्हें कोरोना संक्रमण खत्म होने और बारातियों की संख्या बढ़ने की गाइड लाइन का इंतजार है।
ये बोले कारोबारी-------
बड़ौत। अमर सेफ के मालिक ओमपाल गुप्ता ने बताया कि अप्रैल में सहालग था, लेकिन पिछले कोरोना कर्फ्यू के दौरान शादियों पर कोविड की सख्ती से कम ही व्यापार हुआ। बताया कि नगर में फर्नीचर की लगभग 15 दुकानें हैं। सभी दुकानदारों का ऐसा ही हाल है। कर्मचारियों को तनख्वाह भी अपने जेब से देनी पड़ रही है।
बड़ौत। दीपक फर्नीचर हाउस से कुलदीप जैन ने बताया कि दो साल में कोरोना महामारी ने फर्नीचर कारोबार को डुबो दिया है। पिछले साल बनवाए माल के कारीगरों के रुपये तक नहीं दे सके हैं।
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बड़ौत। सुनील जैन ने बताया कि कोरोना काल में फर्नीचर की खरीद-फरोख्त कम हुई, इससे उनकी भी आमदनी नहीं हो सकी। ऐसे में कोई दूसरा रास्ता भी नहीं सूझता है। सभी के कारोबार पर प्रभाव पड़ा है।
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ये बोले कारोबारी-------
बड़ौत। अमर सेफ के मालिक ओमपाल गुप्ता ने बताया कि अप्रैल में सहालग था, लेकिन पिछले कोरोना कर्फ्यू के दौरान शादियों पर कोविड की सख्ती से कम ही व्यापार हुआ। बताया कि नगर में फर्नीचर की लगभग 15 दुकानें हैं। सभी दुकानदारों का ऐसा ही हाल है। कर्मचारियों को तनख्वाह भी अपने जेब से देनी पड़ रही है।
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बड़ौत। दीपक फर्नीचर हाउस से कुलदीप जैन ने बताया कि दो साल में कोरोना महामारी ने फर्नीचर कारोबार को डुबो दिया है। पिछले साल बनवाए माल के कारीगरों के रुपये तक नहीं दे सके हैं।
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बड़ौत। सुनील जैन ने बताया कि कोरोना काल में फर्नीचर की खरीद-फरोख्त कम हुई, इससे उनकी भी आमदनी नहीं हो सकी। ऐसे में कोई दूसरा रास्ता भी नहीं सूझता है। सभी के कारोबार पर प्रभाव पड़ा है।