यमुना की बदलती धार से बढ़ गई तकरार
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दोनों राज्यों के किसानों के बीच फिर से टकराव के आसान बन गए हैं। निवाड़ा गांव के किसान इतने दहशत में हैं कि वह अपने खेतों में नहीं जा पा रहे हैं। विवाद की नींव वर्ष 1961 में रखी गई थी। किसानों का कहना है कि उस समय तीन दिन के अंदर यमुना की धार पूरी तरह से बदल गई थी। यूपी के किसानों की जमीन हरियाणा में चली गई थी। जमीन के सीमांकन के लिए झगड़े हुए। अधिकारियों ने दौरे किए, लेकिन इतने साल बाद भी कुछ हासिल नहीं हुआ।
गठित किया गया था दीक्षित अवार्ड
बागपत। केंद्रीयगृहराज्य मंत्री रहे उमाशंकर दीक्षित ने इस विवाद के समाधान के लिए वर्ष 1972-73 में यमुना-खादर का हवाई सर्वे किया था। उसके बाद एक कमेटी का गठन किया गया था। इसमें दर्शाया गया था कि यमुना की धार बदलने से जमीन, एक-दूसरे राज्य में जा सकती है। इससे जमीन का मालिकाना हक नहीं बदलेगा।
किसानों को नहीं मिल मालिकाना हक
निवाड़ा गांव के किसान अखलाक अली, निसार, अनीस, साबिर, तैमूर का कहना है कि उनके गांव की 5500 बीघा जमीन हरियाणा में चली गई। वहां के लोग उनकी जमीन पर कब्जा किए हुए हैं। बागपत प्रशासन ने वर्ष 1987 में सोनीपत के अफसरों को जमीन का रिकार्ड सौंप दिया था, लेकिन अभी तक दस्तावेजों में उनके नाम नहीं दर्शाए गए हैं। जमीन पर मालिकाना हक प्राप्त करने के लिए चंडीगढ़ कोर्ट में वर्ष 1995 से केस चल रहा है।
अफसरों की 20 से अधिक हो चुकी है मीटिंग
हरियाणा और बागपत के किसानों की कम से कम 20 बार मीटिंग हो चुकी है। कई मीटिंग बेनतीजा रही तो कई में उनकी समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया गया, लेकिन अभी तक नतीजा शून्य है।
किसान बोले, पलायन की मजबूरी
हरियाणा के किसानों के उत्पीड़न से निवाड़ा के किसान तंग आ चुके हैं। उनका कहना है कि वे फसल की बुआई करते हैं और हरियाणा के किसान उनकी फसल को बर्बाद कर देते हैं। 20 दिन पहले जाजल गांव के लोगों ने पुलिस के साथ मिलकर कई किसानों के साथ गालीगलोज की तथा जान से मारने की धमकी देते हुए चले गए। हरियाणा के लोगों ने उनके साथ इस बार मारपीट की तो वे गांव से पलायन करके चले जाएंगे। यहां चौधरी वजीर, मतलूब, अब्बास, जब्बार, अहसान, उम्मेद अली, सरताज अली मौजूद रहे।
विवाद के समाधान का चल रहा प्रयास : एसपी
एसपी अजय शंकर राय का कहना है कि निवाड़ा के किसानों ने उनसे शिकायत की थी। इसकी जांच बागपत सीओ को सौंपी गई है।