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तीन दोषियों को आजीवन कारावास
Updated Tue, 29 Aug 2017 12:56 AM IST
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तीन दोषियों को आजीवन कारावास
बागपत। हेवा गांव में युवक बिट्टू की सवा चार साल पहले हुई हत्या के केस में कोर्ट ने तीनों आरोपियों को साक्ष्य के आधार पर दोषी माना। कोर्ट ने उनको आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
हेवा गांव निवासी वसुदेव ने छपरौली थाने में दी तहरीर में बताया उनके घर में उसका मौसेरा भाई बिट्टू पुत्र वीरेंद्र सिंह निवासी पट्टी बावली और रिश्तेदार संजीव पुत्र राम सिंह निवासी छपरौली 10 अप्रैल 2013 को आए। रात में करीब 10 बजे सभी चारपाई पर बैठकर बातें कर रहे थे। तभी हेवा गांव के तीन लोग वहां पर आए और बिट्टू के साथ गाली-गलौज कर कहा बड़ा दादा बनता है, आज तुझे खत्म ही कर देंगे। इसके बाद बिट्टू को गोली मार दी। इससे उसकी मौत हो गई। विरोध करने पर आरोपी तमंचे लहराते हुए भाग गए। इस मामले में आरोपी राम बाबू पुत्र राजवीर, तरुण उर्फ डॉन पुत्र तेजपाल, विपिन उर्फ भगोट पुत्र आशाराम के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
एडीजीसी (फौजदारी) राजीव कुमार ने बताया यह केस अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी द्वितीय) विपिन कुमार की कोर्ट में चल रहा था। न्यायालय ने केस की सुनवाई कर साक्ष्य के आधार पर आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
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बागपत। हेवा गांव में युवक बिट्टू की सवा चार साल पहले हुई हत्या के केस में कोर्ट ने तीनों आरोपियों को साक्ष्य के आधार पर दोषी माना। कोर्ट ने उनको आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
हेवा गांव निवासी वसुदेव ने छपरौली थाने में दी तहरीर में बताया उनके घर में उसका मौसेरा भाई बिट्टू पुत्र वीरेंद्र सिंह निवासी पट्टी बावली और रिश्तेदार संजीव पुत्र राम सिंह निवासी छपरौली 10 अप्रैल 2013 को आए। रात में करीब 10 बजे सभी चारपाई पर बैठकर बातें कर रहे थे। तभी हेवा गांव के तीन लोग वहां पर आए और बिट्टू के साथ गाली-गलौज कर कहा बड़ा दादा बनता है, आज तुझे खत्म ही कर देंगे। इसके बाद बिट्टू को गोली मार दी। इससे उसकी मौत हो गई। विरोध करने पर आरोपी तमंचे लहराते हुए भाग गए। इस मामले में आरोपी राम बाबू पुत्र राजवीर, तरुण उर्फ डॉन पुत्र तेजपाल, विपिन उर्फ भगोट पुत्र आशाराम के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
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एडीजीसी (फौजदारी) राजीव कुमार ने बताया यह केस अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी द्वितीय) विपिन कुमार की कोर्ट में चल रहा था। न्यायालय ने केस की सुनवाई कर साक्ष्य के आधार पर आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
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