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वाजिदपुर में गम, नहीं जले चूल्हे
Updated Fri, 05 Jan 2018 12:53 AM IST
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गांव का हर मार्ग पर बन गया काफिला
बागपत। सिपाही अंकित तोमर की मौत के बाद वाजिदपुर गांव में गम पसरा है। चूल्हे ठंडे हैं। हर किसी की जुबान पर सिपाही की बहादुरी के किस्से हैं। हिम्मती स्वभाव और दूसरों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहने के हुनर ने अंकित को सबका अजीज बना दिया था। किसान जयपाल सिंह के घर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा है। अंकित की मौत से गांव में गम का माहौल रहा और अधिकतर घरों में चूल्हे तक नहीं जले। बुधवार रात जैसे ही अंकित की मौत की खबर गांव में पहुंची तो ग्रामीण गम में डूब गए। पीड़ित परिवार के अधिकतर सदस्य तो नोएडा और शामली के लिए रवाना हो गए। घर पर सुबह से ही आसपास के गांव के ग्रामीण पहुंचने शुरू हो गए थे। किसी ने बहादुरी पर सीना ठोका तो किसी ने शहादत पर आंसू बहाए। दिनभर रह रहकर महिलाओं के रुदन से लोग भावुक हो गए। गांव तक पहुंचने वाले हर मार्ग काफिला बना। यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
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बागपत। सिपाही अंकित तोमर की मौत के बाद वाजिदपुर गांव में गम पसरा है। चूल्हे ठंडे हैं। हर किसी की जुबान पर सिपाही की बहादुरी के किस्से हैं। हिम्मती स्वभाव और दूसरों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहने के हुनर ने अंकित को सबका अजीज बना दिया था। किसान जयपाल सिंह के घर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा है। अंकित की मौत से गांव में गम का माहौल रहा और अधिकतर घरों में चूल्हे तक नहीं जले। बुधवार रात जैसे ही अंकित की मौत की खबर गांव में पहुंची तो ग्रामीण गम में डूब गए। पीड़ित परिवार के अधिकतर सदस्य तो नोएडा और शामली के लिए रवाना हो गए। घर पर सुबह से ही आसपास के गांव के ग्रामीण पहुंचने शुरू हो गए थे। किसी ने बहादुरी पर सीना ठोका तो किसी ने शहादत पर आंसू बहाए। दिनभर रह रहकर महिलाओं के रुदन से लोग भावुक हो गए। गांव तक पहुंचने वाले हर मार्ग काफिला बना। यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।