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Baghpat News: मशीनों की लाइफ बढ़ाने वाले कैपेसिटर बैंक खा रहे जंग
Sat, 22 Jun 2024 03:53 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Sat, 22 Jun 2024 03:53 AM IST
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बड़ौत। मशीनों की लाइफ बढ़ाने, लाइन लॉस कम करने व लो-वोल्टेज की समस्या को दूर करने के लिए जनपद के लगभग 50 बिजलीघरों में विभिन्न योजनाओं के तहत तकरीबन आठ करोड़ रुपयों की कीमत से लगाए गए कैपेसिटर बैंक खुद बीमार हैं। देखरेख व चालू न किए जाने की स्थित में कैपेसिटर बैंक जंग खाकर बर्बाद हो रहे है। हैरानी की बात यह है कि ऊर्जा निगम के अधिकारी व कर्मचारी दस साल बीत जाने के बाद भी कैपेसिटर को चालू करने के लिए न तो कोई मैकनिक ढूंढ पाएं हैं और न ही स्पेयर पाटर्स।
बता दें कि जनपद में तकरीबन 82 बिजलीघर हैं। इनमें से तकरीबन 50 बिजलीघरों पर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2014-2015 में बिजलीघरों से निकलने वाली बिजली को घरों को बराबर पहुंचाने के लिए कैपेसिटर बैंक लगाने के आदेश दिए थे। आदेश मिलते ही निगम के कर्मचारियों ने तुंरत-फुरत में बिजलीघरों पर पहुंचकर जगह चिह्नित कर कैपेसिटर बैंक स्थापित कर दिए गए थे, जिनमें लगभग आठ करोड़ की लागत आई थी, लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि पिछले दस साल से कुछ माह चलने के बाद आई तकनीकी खराबी के कारण आज तक उक्त कैपेसिटर बैंक चालू नहीं हुए। अब जंग लगने से कैपेसिटर बैंक खराब हो रहे है।
एक कैपेसिटर बैंक पर खर्च हुए थे 8 से 10 लाख-- -- -
बड़ौत। विभगीय रिकार्डों के अनुसार एक बिजलीघर पर कैपेसिटर बैंक लगाने के लिए विभाग ने आठ से दस लाख रुपये खर्च किए थे। जनपद में 82 बिजलीघरों में से तकरीबन 50 बिजलीघरों में दो-दो कैपेसिटर बैंक स्थापित किए गए थे। यानी एक बिजलीघर पर तकरीबन 16 लाख रुपये खर्च कैपेसिटर बैंक लगाने मेंं किए गए थे।
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इन योजनाओं के तहत बिजलीघरों पर लगाए गए थे कैपेसिटर बैंक-- --
बड़ौत। बिजलीघरों पर उक्त कैपेसिटर बैंक राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना, पंडित दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण विद्युतीकरण योजना सहित अन्य योजनाओं के तहत लगाएं गए थे।
इस तरह काम करता है कैपेसिटर बैंक-- --
बड़ौत। कैपेसिटर बैंक लगे होने से एक ट्रांसफार्मर से निकलने वाली बिजली सभी घरों में बराबर पहुंचती है। यदि कैपेसिटर नहीं लगा है तो ट्रांसफार्मर के निकट के घरों में बिजली का पूरा लोड आता है, लेकिन जैसे-जैसे घरों में बिजली का इस्तेमाल बढ़ता है, दूसरे घरों में वोल्टेज की दिक्कत आ जाती है। यानी इसकी मद्द से वोल्टेज को नियंत्रित रखा जा सकता है। इससे लाइन लॉस को काफी हद तक कम किया जा सकता है और घरेलू उपकरणों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
इन महीनों में सबसे ज्यादा कैपेसिटर बैंक की पड़ती है जरूरत-- -- --
बड़ौत। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे स्थित विद्युत कार्यालय पर तैनात एसडीओ प्रवेश गिरि ने बताया कि ज्यादातर मामलों में विद्युत ट्रासंफार्मर लो-वोल्टेज या हाई-वोल्टेज के चलते फूंक जाते हैं। क्योंकि अप्रैल, मई, जून, जुलाई, अगस्त व सितंबर माह में बिजली की जरूरत पड़ने से लोड़ बढ़ जाता है, ऐसे में कैपिसिटर बैंक बिजलीघरों से घरों में बराबर बिजली पहुंचाने का काम करता है।
वर्जन--
जिन बिजलीघरों पर कैपेसिटर बैंक बंद पड़े हुए है, उनका तत्काल प्रभाव से चालू करने के लिए अधिशासी अभियंता समेत सहायक अभियंता को निर्देशित कर रखा है। यदि इसमें कोई लापरवाही करता है तो विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - केपी खान अधीक्षण अभियंता बागपत।
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बता दें कि जनपद में तकरीबन 82 बिजलीघर हैं। इनमें से तकरीबन 50 बिजलीघरों पर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2014-2015 में बिजलीघरों से निकलने वाली बिजली को घरों को बराबर पहुंचाने के लिए कैपेसिटर बैंक लगाने के आदेश दिए थे। आदेश मिलते ही निगम के कर्मचारियों ने तुंरत-फुरत में बिजलीघरों पर पहुंचकर जगह चिह्नित कर कैपेसिटर बैंक स्थापित कर दिए गए थे, जिनमें लगभग आठ करोड़ की लागत आई थी, लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि पिछले दस साल से कुछ माह चलने के बाद आई तकनीकी खराबी के कारण आज तक उक्त कैपेसिटर बैंक चालू नहीं हुए। अब जंग लगने से कैपेसिटर बैंक खराब हो रहे है।
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एक कैपेसिटर बैंक पर खर्च हुए थे 8 से 10 लाख
बड़ौत। विभगीय रिकार्डों के अनुसार एक बिजलीघर पर कैपेसिटर बैंक लगाने के लिए विभाग ने आठ से दस लाख रुपये खर्च किए थे। जनपद में 82 बिजलीघरों में से तकरीबन 50 बिजलीघरों में दो-दो कैपेसिटर बैंक स्थापित किए गए थे। यानी एक बिजलीघर पर तकरीबन 16 लाख रुपये खर्च कैपेसिटर बैंक लगाने मेंं किए गए थे।
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इन योजनाओं के तहत बिजलीघरों पर लगाए गए थे कैपेसिटर बैंक
बड़ौत। बिजलीघरों पर उक्त कैपेसिटर बैंक राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना, पंडित दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण विद्युतीकरण योजना सहित अन्य योजनाओं के तहत लगाएं गए थे।
इस तरह काम करता है कैपेसिटर बैंक
बड़ौत। कैपेसिटर बैंक लगे होने से एक ट्रांसफार्मर से निकलने वाली बिजली सभी घरों में बराबर पहुंचती है। यदि कैपेसिटर नहीं लगा है तो ट्रांसफार्मर के निकट के घरों में बिजली का पूरा लोड आता है, लेकिन जैसे-जैसे घरों में बिजली का इस्तेमाल बढ़ता है, दूसरे घरों में वोल्टेज की दिक्कत आ जाती है। यानी इसकी मद्द से वोल्टेज को नियंत्रित रखा जा सकता है। इससे लाइन लॉस को काफी हद तक कम किया जा सकता है और घरेलू उपकरणों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
इन महीनों में सबसे ज्यादा कैपेसिटर बैंक की पड़ती है जरूरत
बड़ौत। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे स्थित विद्युत कार्यालय पर तैनात एसडीओ प्रवेश गिरि ने बताया कि ज्यादातर मामलों में विद्युत ट्रासंफार्मर लो-वोल्टेज या हाई-वोल्टेज के चलते फूंक जाते हैं। क्योंकि अप्रैल, मई, जून, जुलाई, अगस्त व सितंबर माह में बिजली की जरूरत पड़ने से लोड़ बढ़ जाता है, ऐसे में कैपिसिटर बैंक बिजलीघरों से घरों में बराबर बिजली पहुंचाने का काम करता है।
वर्जन
जिन बिजलीघरों पर कैपेसिटर बैंक बंद पड़े हुए है, उनका तत्काल प्रभाव से चालू करने के लिए अधिशासी अभियंता समेत सहायक अभियंता को निर्देशित कर रखा है। यदि इसमें कोई लापरवाही करता है तो विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - केपी खान अधीक्षण अभियंता बागपत।