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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   Baghpat: 200 goats came for sacrifice, people of Jain community bought them by paying higher prices, know why

Baghpat: कुर्बानी के लिए आए 200 बकरे, जैन समाज के लोगों ने अधिक दाम देकर खरीद लिए, बोले- नहीं कटने देंगे

Fri, 06 Jun 2025 08:11 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, बागपत
अमर उजाला नेटवर्क, बागपत Published by: मोहम्मद मुस्तकीम Updated Fri, 06 Jun 2025 08:11 PM IST
सार

अमीनगर सराय की बकरा मार्केट में कुर्बानी के लिए आसपास के पशुपालक बकरे बेचने लाए थे। जैन समाज ने ये खरीद लिए। इसके बाद कस्बे की बकराशाला में भिजवा दिए गए, जहां उनका रखरखाव किया जा रहा है।

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Baghpat: 200 goats came for sacrifice, people of Jain community bought them by paying higher prices, know why
बिकने के लिए बाजार में खड़े बकरे। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बकरीद पर अलग-अलग जगह पर कुर्बानी के लिए लाए गए 200 बकरों को जैन समाज के लोगों ने अधिक दाम पर खरीदकर जीवनदान दिया। उनको कस्बे में जीव दया संस्था की बकराशाला में रखवाया गया। साथ ही जैन समाज के लोगों ने बकरों के लिए भरण पोषण के लिए चंदा भी दिया।
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अमीनगर सराय में जैन समाज के लोगों ने जीव दया संस्था बनाकर बकराशाला वर्ष 2016 में शुरू कराई थी। जहां बकरों को लोग छोड़ सकते हैं, जिससे उनकी देखभाल की जा सके। बकरीद पर्व पर कुर्बानी के लिए बागपत व आसपास के जिलों में लाए गए 200 बकरों को जैन समाज के लोगों ने बाजार से अधिक दाम देकर खरीद लिया। जिस पर जैन समाज के लोगों ने 20 लाख रुपये से अधिक खर्च किए। 
 
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जीव दया संस्थान के अध्यक्ष मनोज जैन, संरक्षक सत्यभूषण जैन, महामंत्री मनोज जैन ने बताया कि हर साल ईद से पहले देशभर में रहने वाले जैन समाज के लोग अलग-अलग जगहों से बकरे खरीदकर कुर्बानी से बचाते हैं। कुर्बानी से बचाए गए सभी बकरों को बकराशाला में रखवा दिया गया है। उनके अनुसार बकराशाला में अब 800 से अधिक बकरे हो गए हैं।
 
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कुर्बानी के लिए बकरों की गर्दन पर बंधे थे लाल धागे
बकराशाला के संचालक सौरव जैन, मयंक जैन, दिनेश जैन ने बताया कि बकराशाला में लाए गए सभी बकरों की गर्दन पर कुर्बानी से पहले बांधा जाने वाला लाल धागा भी था, जिनकी खरीद होने के बाद ईद के दिन कुर्बानी दी जानी थी। कुर्बानी से बचाकर बकरों को बकराशाला लाया गया। बताया कि दिल्ली से भी समाज के लोग 101 बकरों की जान बचाकर कस्बे में लेकर आए हैं। यहां बकरों की देखभाल की जा रही है।

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