यूपी: पांच आईपीएस समेत सात अफसरों के खिलाफ गबन मामले में हुई सुनवाई, ये था पूरा मामला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागपत जिले में पांच आईपीएस सहित सात अधिकारियों के खिलाफ गबन का मामला फिर से चर्चाओं में आ गया है। पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाकर सभी अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी थी। लेकिन वादी ने कोर्ट में एफआर पर आपत्ति लगाकर केस की जांच स्वतंत्र एजेंसी या सक्षम अधिकारी से कराने की मांग की थी। इस पर शुक्रवार को सिविल जज सीनियर डिविजन कोर्ट में सुनवाई हुई। अगली सुनवाई दो दिसंबर को होगी।
वादी पक्ष के अधिवक्ता विजयपाल सिंह तोमर ने बताया कि पुलिस कार्यालय बागपत में तैनात सिपाही सुशील कौशिक ने पांच दिसंबर 2010 को न्यायालय के आदेश पर साल 2005 से 2009 के बीच बागपत में तैनात रहे एसपी अशोक कुमार त्यागी, सुशील कुमार, पीके मिश्रा, के. एंजिल रशन, कृपा शंकर, प्रतिसार निरीक्षक पुलिस लाइन योगेंद्र पाल सिंह, प्रभारी आंकिक सोहनलाल के खिलाफ धारा 409, 506 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कराया था।
वादी का कहना था कि पुलिस कर्मचारियों के लिए पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद द्वारा अव्यावसायिक खंड हेतु जिला एमेनिटिज फंड के लिए प्रति माह पुलिस कर्मियों के वेतन में से चार रुपये काटने के लिए तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक ने चार अगस्त 1998 को निर्देश दिए थे। इसके बाद उनके वेतन में से चार रुपये प्रतिमाह कटने लगे। 2005 में तत्कालीन एसपी अशोक कुमार त्यागी, प्रतिसार निरीक्षक योगेंद्र पाल सिंह ने अवैध लाभ कमाने के लिए प्रति माह 15 रुपये काटने शुरू कर दिए। जबकि पुलिस कर्मियों को इसकी जानकारी नहीं दी गई। इस तरह 2005 से 2009 तक 4.50 लाख रुपये का गबन किया गया। इस समय अवधि में पांच एसपी बदले। इस प्रकरण की जांच तत्कालीन एसएसआई इरफान उर रहमान खान से कराई गई। विवेचक ने सभी अधिकारियों को क्लीन चिट देते हुए न्यायालय में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। वादी सुशील कौशिक ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से पुलिस द्वारा लगाई गई एफआर पर आपत्ति जताते हुए न्यायालय में पत्र दाखिल किया था।
यह भी पढ़ें: यूपी: 2.60 करोड़ के घोटाले में कई बड़े खुलासे, अब इन अधिकारियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
उन्होंने यह भी कहा था कि केस के विवेचक एसएसआई ने आईपीएस अधिकारियों के दबाव में एफआर लगाई है। शुक्रवार को सिविल जज सीनियर डिविजन किरण गौड की कोर्ट में सुनवाई हुई। दो दिसंबर को सुनवाई के लिए अगली तिथि निर्धारित की गई है।
नौ साल से सिस्टम के खिलाफ लड़ रहा सुशील
वादी सुशील कौशिक का हेड कांस्टेबल पद पर प्रमोशन हो चुका है। अब वे कानपुर देहात पुलिस लाइन में तैनात हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास गबन के पूरे साक्ष्य हैं। वे पिछले नौ साल से अपने ही सिस्टम के खिलाफ भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़ रहे है। इस केस को भी आखिरी दम तक लड़ेंगे।
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/