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मलेरिया के खिलाफ जंग में उतरी 50 टीमें
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विश्व मलेरिया दिवस
जिले को मलेरिया मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने की तैयारी
सीएचसी बड़ौत क्षेत्र में दो साल से मलेरिया का कोई केस नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस बार मलेरिया मुक्त जिला बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में लोगों को मलेरिया के प्रति जागरूक करने के लिए विभाग की ओर से शहर से लेकर गांवों में कुल 55 टीमों का गठन किया गया है। इसके अलावा सीएचसी व पीएचसी पर टीकाकरण कराने के लिए आने वाले लोगों को भी मलेरिया की रोकथाम की लिए लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। यह जागरूकता का ही नतीजा है कि सीएचसी बड़ौत के अंतर्गत दो साल से मलेरिया का कोई केस नहीं आया।
मौसम लगातार बदल रहा है और अप्रैल मेें भी फरवरी जैसा एहसास हो रहा है। इसी के मद्देनजर इस बार स्वास्थ्य विभाग की टीम कोरोना संक्रमण के दौरान मलेरिया को लेकर पूरी अलर्ट है। स्वास्थ्य कर्मी कोरोना पॉजिटिव के संपर्क में आने वाले लोगों की पहचान कर रहे है। नगर व गांवों में कुल 55 टीमों का गठन किया गया है, जो घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रही है। बुखार पीड़ित लोगों की लगातार रक्त स्लाइड बनाई जा रही है। जिला अस्पताल, पीएचसी व सीएचसी स्तर पर मलेरिया के लिए रक्त सैंपलों की जांच हो रही है।
हाई रिस्क क्षेत्र में साधा जा रहा संपर्क
हाई रिस्क क्षेत्र के अलावा फैक्टरियों व हाईवे के किनारे रहने वाले परिवारों से लगातार संपर्क साधा जा रहा है। इन क्षेत्र में सबसे ज्यादा मच्छरों की भरमार रहती है। इसलिए टीम लोगों को मच्छरों से बचाव के उपाय बता रही है।
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ये है मलेरिया के लक्षण व बचाव
सर्दी लगने से बुखार आना, सिर दर्द, पीठ दर्द, घुटनों में दर्द शुरू हो जाता है। इसके साथ ही मरीज को उल्टी भी लग सकती है। ऐसे में मलेरिया से बचने के लिए लोगों को अपने घरों के आसपास पानी एकत्रित नहीं होने दे। रात में सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल अवश्य करें। हौद व बर्तन में काफी दिन तक पानी एकत्रित नहीं होने दे।
इस बार मलेरिया मुक्त जिला बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए लोगों को मलेरिया बचाव के लिए विभाग की ओर से लगातार संपर्क कर जागरूक किया जा रहा है। हाई रिस्क क्षेत्र के अलावा फैक्टरियों व हाईवे के साथ-साथ रहने वाले परिवारों की तरफ विभाग को पूरा ध्यान दिया जा रहा है। - डॉ. विजय कुमार, सीएचसी अधीक्षक।
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जिले को मलेरिया मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने की तैयारी
सीएचसी बड़ौत क्षेत्र में दो साल से मलेरिया का कोई केस नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस बार मलेरिया मुक्त जिला बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में लोगों को मलेरिया के प्रति जागरूक करने के लिए विभाग की ओर से शहर से लेकर गांवों में कुल 55 टीमों का गठन किया गया है। इसके अलावा सीएचसी व पीएचसी पर टीकाकरण कराने के लिए आने वाले लोगों को भी मलेरिया की रोकथाम की लिए लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। यह जागरूकता का ही नतीजा है कि सीएचसी बड़ौत के अंतर्गत दो साल से मलेरिया का कोई केस नहीं आया।
मौसम लगातार बदल रहा है और अप्रैल मेें भी फरवरी जैसा एहसास हो रहा है। इसी के मद्देनजर इस बार स्वास्थ्य विभाग की टीम कोरोना संक्रमण के दौरान मलेरिया को लेकर पूरी अलर्ट है। स्वास्थ्य कर्मी कोरोना पॉजिटिव के संपर्क में आने वाले लोगों की पहचान कर रहे है। नगर व गांवों में कुल 55 टीमों का गठन किया गया है, जो घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रही है। बुखार पीड़ित लोगों की लगातार रक्त स्लाइड बनाई जा रही है। जिला अस्पताल, पीएचसी व सीएचसी स्तर पर मलेरिया के लिए रक्त सैंपलों की जांच हो रही है।
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हाई रिस्क क्षेत्र में साधा जा रहा संपर्क
हाई रिस्क क्षेत्र के अलावा फैक्टरियों व हाईवे के किनारे रहने वाले परिवारों से लगातार संपर्क साधा जा रहा है। इन क्षेत्र में सबसे ज्यादा मच्छरों की भरमार रहती है। इसलिए टीम लोगों को मच्छरों से बचाव के उपाय बता रही है।
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ये है मलेरिया के लक्षण व बचाव
सर्दी लगने से बुखार आना, सिर दर्द, पीठ दर्द, घुटनों में दर्द शुरू हो जाता है। इसके साथ ही मरीज को उल्टी भी लग सकती है। ऐसे में मलेरिया से बचने के लिए लोगों को अपने घरों के आसपास पानी एकत्रित नहीं होने दे। रात में सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल अवश्य करें। हौद व बर्तन में काफी दिन तक पानी एकत्रित नहीं होने दे।
इस बार मलेरिया मुक्त जिला बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए लोगों को मलेरिया बचाव के लिए विभाग की ओर से लगातार संपर्क कर जागरूक किया जा रहा है। हाई रिस्क क्षेत्र के अलावा फैक्टरियों व हाईवे के साथ-साथ रहने वाले परिवारों की तरफ विभाग को पूरा ध्यान दिया जा रहा है। - डॉ. विजय कुमार, सीएचसी अधीक्षक।