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अब तक बागपत में सिर्फ 44 लाख कुंतल गन्ने की पेराई
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बागपत। पिछले पेराई सत्र के सापेक्ष इस बार चीनी मिलों ने कम गन्ने की खरीद और पेराई की है। जिस कारण गन्ना खेतों में खड़ा है और किसान समस्याओं से जूझ रहे हैं। गेहूं बुआई का संकट खड़ा हो गया है। दिसंबर तक के आंकड़ों की बात करें तो पिछले पेराई सत्र के सापेक्ष इस बार अभी तक 16 लाख क्विंटल गन्ना कम खरीदा गया है, जिससे किसानों की मुसीबत बढ़ गई है।
मलकपुर चीनी मिल के देरी से शुरू हुए पेराई सत्र, रमाला और बागपत मिल में सफाई कार्य के चलते चीनी मिलों का बीच-बीच में बंद रहने के खामियाजा किसान उठा रहे हैं। आंकड़ें बताते हैं कि इस बार गन्ने की खरीद और पेराई का कार्य पिछले पेराई सत्र के सापेक्ष धीमा है। पिछले पेराई सत्र में 17 दिसंबर 2017 तक बागपत की रमाला, मलकपुर और बागपत चीनी मिल ने 60 लाख आठ हजार क्विंटल गन्ने की खरीद की और 59 लाख 99 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई की थी। लेकिन इस बार 17 दिसंबर 2018 तक चीनी मिलों ने 44 लाख 37 हजार क्विंटल गन्ने की खरीद की और 44 लाख 32 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई की। जाहिर है कि करीब 16 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद का अंतर है। इसका सीधा असर गेहूं बुआई पर हो गया है। किसान इंडेंट के लिए परेशान हैं। खेतों में गन्ना खड़ा है, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।
क्या है वजह
बागपत। मलकपुर चीनी मिल का पेराई सत्र पिछली बार 24 अक्तूबर को शुरू हो गया था, लेकिन इस बार मिल ने 10 नवंबर को पेराई शुरू की। यही वजह है कि पेराई सत्र पिछड़ने से गन्ना पेराई कम हुई है। बागपत और रमाला मिल के बीच-बीच में बंद रहने का खामियाजा भी किसानों को उठाना पड़ रहा है।
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बागपत में 55 हजार हेक्टेयर पर गेहूं
बागपत। जिले में गेहूं का रकबा करीब 55 हजार हेक्टेयर है। उप कृषि निदेशक प्रशांत कुमार बताते हैं कि फिलहाल करीब 30 फीसदी गेहूं की बुआई ही हो सकी है।
क्या कहते हैं किसान
- युवा किसान क्लब के अध्यक्ष सुभाष नैन का कहना है कि समय पर गेहूं की बुआई के लिए इंडेंट का मिलना जरूरी है, लेकिन किसान सिर्फ इंतजार कर रहे हैं। सरकार का ध्यान किसानों पर नहीं है।
- बसपा नेता निर्देश कुमार का कहना है कि सरकार को किसान समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। राजनीतिक मंचों से भाजपा ने जो वादे किए थे, उन्हें पूरा क्यों नहीं किया गया। किसान इस वक्त बेहद समस्या में है।
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मलकपुर चीनी मिल के देरी से शुरू हुए पेराई सत्र, रमाला और बागपत मिल में सफाई कार्य के चलते चीनी मिलों का बीच-बीच में बंद रहने के खामियाजा किसान उठा रहे हैं। आंकड़ें बताते हैं कि इस बार गन्ने की खरीद और पेराई का कार्य पिछले पेराई सत्र के सापेक्ष धीमा है। पिछले पेराई सत्र में 17 दिसंबर 2017 तक बागपत की रमाला, मलकपुर और बागपत चीनी मिल ने 60 लाख आठ हजार क्विंटल गन्ने की खरीद की और 59 लाख 99 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई की थी। लेकिन इस बार 17 दिसंबर 2018 तक चीनी मिलों ने 44 लाख 37 हजार क्विंटल गन्ने की खरीद की और 44 लाख 32 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई की। जाहिर है कि करीब 16 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद का अंतर है। इसका सीधा असर गेहूं बुआई पर हो गया है। किसान इंडेंट के लिए परेशान हैं। खेतों में गन्ना खड़ा है, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।
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क्या है वजह
बागपत। मलकपुर चीनी मिल का पेराई सत्र पिछली बार 24 अक्तूबर को शुरू हो गया था, लेकिन इस बार मिल ने 10 नवंबर को पेराई शुरू की। यही वजह है कि पेराई सत्र पिछड़ने से गन्ना पेराई कम हुई है। बागपत और रमाला मिल के बीच-बीच में बंद रहने का खामियाजा भी किसानों को उठाना पड़ रहा है।
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बागपत में 55 हजार हेक्टेयर पर गेहूं
बागपत। जिले में गेहूं का रकबा करीब 55 हजार हेक्टेयर है। उप कृषि निदेशक प्रशांत कुमार बताते हैं कि फिलहाल करीब 30 फीसदी गेहूं की बुआई ही हो सकी है।
क्या कहते हैं किसान
- युवा किसान क्लब के अध्यक्ष सुभाष नैन का कहना है कि समय पर गेहूं की बुआई के लिए इंडेंट का मिलना जरूरी है, लेकिन किसान सिर्फ इंतजार कर रहे हैं। सरकार का ध्यान किसानों पर नहीं है।
- बसपा नेता निर्देश कुमार का कहना है कि सरकार को किसान समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। राजनीतिक मंचों से भाजपा ने जो वादे किए थे, उन्हें पूरा क्यों नहीं किया गया। किसान इस वक्त बेहद समस्या में है।