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सज गई मस्जिदें, बरसेगा अल्लाह का नूर
Updated Thu, 17 May 2018 12:56 AM IST
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बागपत। रमजान के पाक महीने की दस्तक हो चुका है। मस्जिदें सज गई हैं। रोजेदारों पर अल्लाह का नूर बरसेगा। हर बुराई से दूर रखते हुए अल्लाह के करीब जाने के सबसे खास दिन होंगे। बृहस्पतिवार से पहला रोजा होगा। शहर से लेकर देहात तक मस्जिदों की सफाई का कार्य किया । बच्चों में खास उत्साह है।
शहर के पुरानी तहसील और पुराने कसबे के अलावा जिले में मस्जिदों में सफाई अभियान को तेज किया। रोजेदारों के लिए सुविधाओं का खास ख्याल रखा जा रहा है। शहर काजी हबीबुर्रहमान ने कहा इबादत का महीना है। रोजेदारों पर अल्लाह का नूर बरसता है। इस महीने इबादत और गरीबों की मदद करनी चाहिए। जिला मुख्यालय के अलावा खेकड़ा और बड़ौत में भी रमजान की तैयारियां की गई। बाजारों में खरीददारों की भीड़ बढ़ी। दुकानों पर इफ्तारी और सहरी के लिए सामान खरीदा गया। मस्जिदों में तरावीह पढ़ी गई।
यूं बरसती है अल्लाह की रहमत
बागपत। रमजान माह के 30 दिन को तीन असर में बांटा है। पहला असर रहमत का है। बताते हैं कि इसमें अल्लाह अकीदतमंदों पर रहमत लुटाता है। दूसरा असर बरकत का है, इसमें खुदा बरकत नाजिल करता है। तीसरा असर ‘मगफिरत’ का है। अल्लाह अकीदतमंदों के गुनाह माफ कर देता है।
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रमजान में यह भी जानिए
रमजान में पांच जुमे। आखिरी जुमा 15 जून को होगा।
इस बार साढ़े 15 घंटे से भी अधिक लंबे होंगे रोजे।
पानी हलक में चला जाए तो रोजा टूट जाता है।
कान में तेल डालने से रोजा टूट जाता है।
आदमी कमजोर या बीमार हो तो रोजा कजा किया जा सकता है।
इफ्तार और सहरी का महत्व
बागपत। रोजेदार सुबह सूरज उगने के बाद से लेकर सूरज छिपने तक बिना खाए पिएं रहते हैं। रोजेदार सूरज उगने के पहले सहरी करते है, यानि कुछ खा लेते हैं और शाम को सूरज छिपने के बाद इफ्तार करके रोजा खोलते हैं।
चांद दिखते ही तरावीह शुरू
बागपत। रमजान माह का चांद दिखते ही तरावीह शुरू हो गई है। बाजारों में रौनक रही। खरीदारों की भीड़ रही। उधर, दूध और फलों के दाम रमजान माह में बढ़ सकते हैं।
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शहर के पुरानी तहसील और पुराने कसबे के अलावा जिले में मस्जिदों में सफाई अभियान को तेज किया। रोजेदारों के लिए सुविधाओं का खास ख्याल रखा जा रहा है। शहर काजी हबीबुर्रहमान ने कहा इबादत का महीना है। रोजेदारों पर अल्लाह का नूर बरसता है। इस महीने इबादत और गरीबों की मदद करनी चाहिए। जिला मुख्यालय के अलावा खेकड़ा और बड़ौत में भी रमजान की तैयारियां की गई। बाजारों में खरीददारों की भीड़ बढ़ी। दुकानों पर इफ्तारी और सहरी के लिए सामान खरीदा गया। मस्जिदों में तरावीह पढ़ी गई।
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यूं बरसती है अल्लाह की रहमत
बागपत। रमजान माह के 30 दिन को तीन असर में बांटा है। पहला असर रहमत का है। बताते हैं कि इसमें अल्लाह अकीदतमंदों पर रहमत लुटाता है। दूसरा असर बरकत का है, इसमें खुदा बरकत नाजिल करता है। तीसरा असर ‘मगफिरत’ का है। अल्लाह अकीदतमंदों के गुनाह माफ कर देता है।
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रमजान में यह भी जानिए
रमजान में पांच जुमे। आखिरी जुमा 15 जून को होगा।
इस बार साढ़े 15 घंटे से भी अधिक लंबे होंगे रोजे।
पानी हलक में चला जाए तो रोजा टूट जाता है।
कान में तेल डालने से रोजा टूट जाता है।
आदमी कमजोर या बीमार हो तो रोजा कजा किया जा सकता है।
इफ्तार और सहरी का महत्व
बागपत। रोजेदार सुबह सूरज उगने के बाद से लेकर सूरज छिपने तक बिना खाए पिएं रहते हैं। रोजेदार सूरज उगने के पहले सहरी करते है, यानि कुछ खा लेते हैं और शाम को सूरज छिपने के बाद इफ्तार करके रोजा खोलते हैं।
चांद दिखते ही तरावीह शुरू
बागपत। रमजान माह का चांद दिखते ही तरावीह शुरू हो गई है। बाजारों में रौनक रही। खरीदारों की भीड़ रही। उधर, दूध और फलों के दाम रमजान माह में बढ़ सकते हैं।