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भगवान की भक्ति के लिए कोई उम्र नहीं होती-स्तुति
Updated Sun, 30 Sep 2018 01:05 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
कथा व्यास स्तुति ने कहा भगवान की भक्ति के लिए उम्र विशेष नहीं होती। वे शनिवार को श्री राम चरित्र मानस प्रचार समिति के तत्वावधान में चल रहे श्रीमद भागवत कथा में बोल रही थी।
उन्होंने कहा कि लोगों की सोच है कि जब बुढ़ापा आएगा, तब भगवान का ध्यान करेंगे और बुढ़ापा आने पर विभिन्न प्रकार से ग्रस्त होने पर वह भगवान का नाम जप नहीं पाता और सारा जीवन छल व कपट और अंत में भगवान से मरने की विनती करता है। उन्होंने बताया कि ध्रुव महाराज ने मात्र पांच वर्ष की अवस्था में कठिन परिश्रम कर भगवान को प्राप्त कर लिया था और भगवान ने 36 हजार वर्ष राज करने के बाद सशरीर ध्रुव पद पर प्रदान किया। ध्रुव की मृत्यु नहीं हुई, मृत्यु के सिर पर पैर रखकर भगवान के पास उनके ध्रुव लोक ले गए। बताया कि आज भी ध्रुव तारा आकाश मंडल में स्थिति है, समस्त सृष्टि का विनाश करने पर भी ध्रुव का विनाश नहीं होगा। भगवान की सच्ची भक्ति करनी चाहिए। बताया कि मनुष्य अपने चालाकी से दुनिया मेें लोगों को मूर्ख बना सकता है, लेकिन भगवान के पारसद चित्रगुप्त के साथ हर मनुष्य के साथ प्रति क्षण रहते हैं और सही व गलत का लेखन करते हैं और यमराज प्रत्येक जीव को उसके द्वारा किए कर्मों के अनुसार नरों का निराधार करते हैं। कथा में नगीन चंद, बाबूराम, रमेश गुप्ता, विनोद, मधु गुप्ता, सतेंद्र गुप्ता, रमेश कुच्छल आदि रहे।
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कथा व्यास स्तुति ने कहा भगवान की भक्ति के लिए उम्र विशेष नहीं होती। वे शनिवार को श्री राम चरित्र मानस प्रचार समिति के तत्वावधान में चल रहे श्रीमद भागवत कथा में बोल रही थी।
उन्होंने कहा कि लोगों की सोच है कि जब बुढ़ापा आएगा, तब भगवान का ध्यान करेंगे और बुढ़ापा आने पर विभिन्न प्रकार से ग्रस्त होने पर वह भगवान का नाम जप नहीं पाता और सारा जीवन छल व कपट और अंत में भगवान से मरने की विनती करता है। उन्होंने बताया कि ध्रुव महाराज ने मात्र पांच वर्ष की अवस्था में कठिन परिश्रम कर भगवान को प्राप्त कर लिया था और भगवान ने 36 हजार वर्ष राज करने के बाद सशरीर ध्रुव पद पर प्रदान किया। ध्रुव की मृत्यु नहीं हुई, मृत्यु के सिर पर पैर रखकर भगवान के पास उनके ध्रुव लोक ले गए। बताया कि आज भी ध्रुव तारा आकाश मंडल में स्थिति है, समस्त सृष्टि का विनाश करने पर भी ध्रुव का विनाश नहीं होगा। भगवान की सच्ची भक्ति करनी चाहिए। बताया कि मनुष्य अपने चालाकी से दुनिया मेें लोगों को मूर्ख बना सकता है, लेकिन भगवान के पारसद चित्रगुप्त के साथ हर मनुष्य के साथ प्रति क्षण रहते हैं और सही व गलत का लेखन करते हैं और यमराज प्रत्येक जीव को उसके द्वारा किए कर्मों के अनुसार नरों का निराधार करते हैं। कथा में नगीन चंद, बाबूराम, रमेश गुप्ता, विनोद, मधु गुप्ता, सतेंद्र गुप्ता, रमेश कुच्छल आदि रहे।
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