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मुनि श्री वारिषेण सागर जी महाराज ने ली समाधि
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खेकड़ा (बागपत)
क्षेत्र के बड़ागांव स्थित श्री पार्श्व दिगंबर जैन साधुवृत्ति आश्रम में परम पूज्य मुनि श्री एक सौ आठ वारिषेण सागर जी महाराज ने समाधि ली। इस दौरान महिला और पुरुष श्रद्धालुओं ने मुनि श्री के अंतिम दर्शन किए।
क्षेत्र के बड़ागांव स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन साधुवृत्ति आश्रम में परम पूज्य मुनि श्री एक सौ आठ वारिषेण सागर जी महाराज तीन वर्ष से रह रहे थे। वह आश्रम में रहकर धर्म ध्यान कर जन जागरण का कार्य कर रहे थे। महाराज श्री का जन्म पींडई जनपद मैनपुर मध्य प्रदेश में हुआ । मंगलवार की सुबह छह बजे महाराज श्री ने समाधि ले ली। महाराज श्री के समाधि लेने की सूचना मिलने के चलते श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई और श्रद्धालु भारी संख्या में आश्रम में पहुंचे।
इसके बाद महाराज श्री के शरीर को विमान सजाकर विमान में बैठाया गया और श्रद्धालुओं ने महाराज श्री के अंतिम दर्शन किए। आश्रम के मंत्री राजीव कुमार जैन ने महाराज श्री के शरीर को अग्नि दी। श्रद्धालुओं ने नम आंखों के बीच महाराज श्री के अंतिम दर्शन किए। भक्त जनेश्वर दयाल जैन ने बताया कि महाराज श्री अत्यंत शांत स्वभाव वाले थे। आश्रम के संबंध में महाराज श्री के विचार बहुत अच्छे थे। आश्रम में बाहुबली भगवान की मूर्ति आने पर महाराज श्री बहुत प्रसन्न हुए थे। उन्होंने तपस्या करने के लिए आश्रम को उपयुक्त स्थान बताया । इस दौरान श्री एक सौ पांच योग भूषण जी महाराज, एक सौ आठ त्रिलोक भूषण महाराज, रचित सागर जी, परम पूज्य क्षुल्लिका एक सौ पांच वीरमती माता जी, क्षुल्लिका संतोषमती माता जी, दृष्टि भूषण माता जी, भाग्यमती माता जी, कमला बाई, मुन्नी बाई, त्रिलोक चंद जैन, राजेंद्र जैन, डॉ. अशोक जैन, अनिल शर्मा, अंकित गर्ग, प्रधानाचार्य विनय कुमार जैन, मदनलाल जैन, डॉ. एसके शर्मा आदि रहे।
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क्षेत्र के बड़ागांव स्थित श्री पार्श्व दिगंबर जैन साधुवृत्ति आश्रम में परम पूज्य मुनि श्री एक सौ आठ वारिषेण सागर जी महाराज ने समाधि ली। इस दौरान महिला और पुरुष श्रद्धालुओं ने मुनि श्री के अंतिम दर्शन किए।
क्षेत्र के बड़ागांव स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन साधुवृत्ति आश्रम में परम पूज्य मुनि श्री एक सौ आठ वारिषेण सागर जी महाराज तीन वर्ष से रह रहे थे। वह आश्रम में रहकर धर्म ध्यान कर जन जागरण का कार्य कर रहे थे। महाराज श्री का जन्म पींडई जनपद मैनपुर मध्य प्रदेश में हुआ । मंगलवार की सुबह छह बजे महाराज श्री ने समाधि ले ली। महाराज श्री के समाधि लेने की सूचना मिलने के चलते श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई और श्रद्धालु भारी संख्या में आश्रम में पहुंचे।
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इसके बाद महाराज श्री के शरीर को विमान सजाकर विमान में बैठाया गया और श्रद्धालुओं ने महाराज श्री के अंतिम दर्शन किए। आश्रम के मंत्री राजीव कुमार जैन ने महाराज श्री के शरीर को अग्नि दी। श्रद्धालुओं ने नम आंखों के बीच महाराज श्री के अंतिम दर्शन किए। भक्त जनेश्वर दयाल जैन ने बताया कि महाराज श्री अत्यंत शांत स्वभाव वाले थे। आश्रम के संबंध में महाराज श्री के विचार बहुत अच्छे थे। आश्रम में बाहुबली भगवान की मूर्ति आने पर महाराज श्री बहुत प्रसन्न हुए थे। उन्होंने तपस्या करने के लिए आश्रम को उपयुक्त स्थान बताया । इस दौरान श्री एक सौ पांच योग भूषण जी महाराज, एक सौ आठ त्रिलोक भूषण महाराज, रचित सागर जी, परम पूज्य क्षुल्लिका एक सौ पांच वीरमती माता जी, क्षुल्लिका संतोषमती माता जी, दृष्टि भूषण माता जी, भाग्यमती माता जी, कमला बाई, मुन्नी बाई, त्रिलोक चंद जैन, राजेंद्र जैन, डॉ. अशोक जैन, अनिल शर्मा, अंकित गर्ग, प्रधानाचार्य विनय कुमार जैन, मदनलाल जैन, डॉ. एसके शर्मा आदि रहे।
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