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चितौड़ से कलानौर और फिर पहुंच गए बागपत
Updated Fri, 02 Nov 2018 01:37 AM IST
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बागपत। नवाब कोकब हमीद हमेशा के लिए हवेली से रुखसत हो गए। अब सिर्फ उनकी यादें और बातें बची हैं। बागपत की हवेली का इतिहास 200 साल पुराना है। बागपत आने से पहले खानदान को रईसजादा कलानौर का खिताब हासिल था। बाद में इन्हें बागपत के नवाब की पदवी से नवाजा गया।
बागपत के नवाब खानदान के इतिहास को संग्रहीत कर रहे जाकिर बताते हैं कि खानदान के लोग चित्तौड़गढ़ से हरियाणा के रोहतक के नजदीक कलानौर में आकर बसे। करम अली अंग्रेजी दौर में गाजियाबाद में सरकार के बड़े अफसर बनें। इनके बेटे खुरशैद अली को रईसजादा कलानौर के खिताब से नवाजा गया । नौकरी के चलते परिवार के लोगों का गाजियाबाद आना जाना लगा रहा। इसके बाद बागपत में हवेली बनाई और यह परिवार हमेशा के लिए बागपत का होकर रह गया। खुरशैद अली के बेटे राव अब्दुल हमीद और नवाब जमशेद अली हुए। राव अब्दुल हमीद के बेटे शौकत हमीद खान कांग्रेस के विधायक रहे। इनके बेटे नवाब कोकब हमीद थे। हवेली का इतिहास करीब दो सौ साल पुराना है।
नवाब खानदान के वारिस होंगे अहमद हमीद
बागपत। नवाब कोकब हमीद के इंतकाल के बाद उनके बेटे अहमद हमीद ही खानदान के वारिस होंगे। राजनीतिक वारिस उन्हें पहले ही बनाया जा चुका है। साल 2017 का चुनाव अहमद हमीद ने ही लड़ा, लेकिन वह हार गए।
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बागपत के नवाब खानदान के इतिहास को संग्रहीत कर रहे जाकिर बताते हैं कि खानदान के लोग चित्तौड़गढ़ से हरियाणा के रोहतक के नजदीक कलानौर में आकर बसे। करम अली अंग्रेजी दौर में गाजियाबाद में सरकार के बड़े अफसर बनें। इनके बेटे खुरशैद अली को रईसजादा कलानौर के खिताब से नवाजा गया । नौकरी के चलते परिवार के लोगों का गाजियाबाद आना जाना लगा रहा। इसके बाद बागपत में हवेली बनाई और यह परिवार हमेशा के लिए बागपत का होकर रह गया। खुरशैद अली के बेटे राव अब्दुल हमीद और नवाब जमशेद अली हुए। राव अब्दुल हमीद के बेटे शौकत हमीद खान कांग्रेस के विधायक रहे। इनके बेटे नवाब कोकब हमीद थे। हवेली का इतिहास करीब दो सौ साल पुराना है।
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नवाब खानदान के वारिस होंगे अहमद हमीद
बागपत। नवाब कोकब हमीद के इंतकाल के बाद उनके बेटे अहमद हमीद ही खानदान के वारिस होंगे। राजनीतिक वारिस उन्हें पहले ही बनाया जा चुका है। साल 2017 का चुनाव अहमद हमीद ने ही लड़ा, लेकिन वह हार गए।
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