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एएसआई के पैतृक गांव बावली में दौड़ी दुख की लहर
Updated Fri, 25 Aug 2017 01:43 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
खुदकशी करने की सूचना पर दिल्ली के जैतपुर थाने में तैनात एएसआई के पैतृक गांव में बावली में शोक की लहर डूब गई। गांव में उसका भतीजा अपने परिवार के साथ रह रहा है। जबकि एएसआई का परिवार लोनी के शांति नगर में रहता है।
देवेंद्र पुत्र जयचंद बावली गांव का है। वह दिल्ली के जैतपुर थाने में एएसआई पद में तैनात था। मंगलवार को उसने अपनी सर्विस रिवाल्वर से गोली मारकर खुदकुशी की। उसका शव कालिंदी कुंज के पास सुनसान जगह पर पड़ा मिला। उसने अपने सुसाइड नोट में लिखा उसने यह घटना एसओ से परेशान होकर की । इसकी सूचना गांव में रह रहे उसके भतीजे संदीप और उसकी पत्नी संजू को मिली तो वे शोक में डूब गए। गांव के लोग भी इस घटना को सुन दंग रह गए। भतीजे संदीप ने बताया 19 साल पहले वह घर से चले गए और परिवार सहित लोनी के शांति नगर में परिवार सहित रहते हैं । अब उसके दो बच्चे हैं। संदीप बुधवार की सुबह लोनी चला गया और रात में अंत्येष्टि के बाद घर लौटा। उसने बताया कि इस संबंध में हम लोगों ने डीसीपी से भी बात की और उन्हें वह सुसाइड नोट भी दिया। उसने बताया देवेंद्र के पांच भाई हैं। इनमें सबसे बड़ा हरपाल, कृष्णपाल, देवेंद्र, बिजेंद्र सीआरपीएफ में हैं और रविंद्र है। इनमें हरपाल, कृष्णपाल, रविंद्र की पहले ही बीमारी से मौत हो चुकी है। अब एक भाई बिजेंद्र है जो सीआरपीएफ में झारखंड में तैनात है। देवेंद्र 18 अगस्त को गांव आया और कुछ घंटे रहने के बाद चला गया । उसके हिस्से में छह बीघा जमीन है। इसे वह अपने पौत्र मोहित के नाम करना चाहता था, लेकिन वह भी उसकी इच्छा पूरी नहीं हुई।
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खुदकशी करने की सूचना पर दिल्ली के जैतपुर थाने में तैनात एएसआई के पैतृक गांव में बावली में शोक की लहर डूब गई। गांव में उसका भतीजा अपने परिवार के साथ रह रहा है। जबकि एएसआई का परिवार लोनी के शांति नगर में रहता है।
देवेंद्र पुत्र जयचंद बावली गांव का है। वह दिल्ली के जैतपुर थाने में एएसआई पद में तैनात था। मंगलवार को उसने अपनी सर्विस रिवाल्वर से गोली मारकर खुदकुशी की। उसका शव कालिंदी कुंज के पास सुनसान जगह पर पड़ा मिला। उसने अपने सुसाइड नोट में लिखा उसने यह घटना एसओ से परेशान होकर की । इसकी सूचना गांव में रह रहे उसके भतीजे संदीप और उसकी पत्नी संजू को मिली तो वे शोक में डूब गए। गांव के लोग भी इस घटना को सुन दंग रह गए। भतीजे संदीप ने बताया 19 साल पहले वह घर से चले गए और परिवार सहित लोनी के शांति नगर में परिवार सहित रहते हैं । अब उसके दो बच्चे हैं। संदीप बुधवार की सुबह लोनी चला गया और रात में अंत्येष्टि के बाद घर लौटा। उसने बताया कि इस संबंध में हम लोगों ने डीसीपी से भी बात की और उन्हें वह सुसाइड नोट भी दिया। उसने बताया देवेंद्र के पांच भाई हैं। इनमें सबसे बड़ा हरपाल, कृष्णपाल, देवेंद्र, बिजेंद्र सीआरपीएफ में हैं और रविंद्र है। इनमें हरपाल, कृष्णपाल, रविंद्र की पहले ही बीमारी से मौत हो चुकी है। अब एक भाई बिजेंद्र है जो सीआरपीएफ में झारखंड में तैनात है। देवेंद्र 18 अगस्त को गांव आया और कुछ घंटे रहने के बाद चला गया । उसके हिस्से में छह बीघा जमीन है। इसे वह अपने पौत्र मोहित के नाम करना चाहता था, लेकिन वह भी उसकी इच्छा पूरी नहीं हुई।
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