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भक्तों ने स्कंदमाता की पूजा की
Updated Fri, 23 Mar 2018 01:03 AM IST
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बागपत। नवरात्र में मां भगवती के पांचवें स्वरूप स्कंद माता की पूजा की गई। उपवास रख कर माता की साधना की। शाम के समय आराधना के बाद अपने व्रत खोलें।
पांचवें नवरात्र पर स्कंद माता की पूजा की गई। इस दौरान भक्तों ने विभिन्न विधियों से माता की आराधना की। मां के भक्तों ने व्रत रखकर साधना की और शाम के समय पूजा करने के बाद उपवास खोला। ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि माता को गुडहल के फूल, अनार तथा लौंग के जोड़े से पूजा करने से फलदायी रहता है। स्कंद माता की पूजा करने से व्यक्ति को शत्रु से भय नहीं रहता। देवी कमल के आसन पर विराजमान है। सिंह ही इनका वाहन है। जो भक्तजन इनकी आराधना करते हैं, वे सांसारिक बंधनों से मुक्त हो जाते हैं। मृत्युलोक में वे लोग सुख प्राप्त करके अन्नत: मोक्ष की प्राप्ति करते है। शाम को मां भगवती की आरती हुई और आरती के बाद सभी को प्रसाद का वितरण किया। शहर के पक्का घाट मंदिर, सनातन धर्म हनुमान मंदिर, ठाकुरद्वारा स्थित राधा-कृष्ण दामोदर चंद महाराज मंदिर, सालिगराम मंदिर, मेरठ रोड स्थित शिव मंदिर, पुराना कस्बा स्थित बागेश्वर मंदिर, पिपलेश्वर मंदिर और शुगर मिल स्थित दुर्गा मंदिर में भी भक्त पहुंचे और उन्होंने देवी का पूजन किया। सालिगराम मंदिर में माता की पूजा की। इसके अलावा क्षेत्र में बालैनी, अग्रवाल मंडी टटीरी, दाहा, रमाला, दोघट में भक्तों ने पूजा स्कंद माता की पूजा कर मनौती मांगी।
जो राम के जीवन को नहीं जिए, वो कृष्ण के उपदेश नहीं समझते : स्तुति
अमीनगर सराय (बागपत)। श्रीमद् भागवत कथा में कथावाचक बहन स्तुति ने राम और कृष्ण के चरित्र को बड़े ही मनमोहक ढंग से चरितार्थ किया। कहा कि भगवान श्री राम ने जिस तरह मर्यादा में रहते हुए लोकहित कार्य किए वो बड़े ही अद्भूत हैं और इस मायावी संसार में जिसने प्रभु श्रीराम के चरित्र को जिया है वो ही श्रीकृष्ण के कहे उपदेशों को समझ सकता है, क्योंकि सांसारिक मोह माया में रहकर आज मनुष्य अपने पतन की ओर अग्रसर है ओर इस नश्वर संसार मे जिसने श्री राम के चरित्र को जी लिया और जिसने श्रीकृष्ण के उपदेशों का पालन कर लिया समझो वो परम धाम मोक्ष की प्राप्ति कर गया। भौतिकवादिता में भी मनुष्य को अपने सद्कर्मों पर चलने की प्रेरणा दी। काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
देवी मंदिर पर मेला शुरू
दाहा। क्षेत्र के कान्हड़ गांव स्थित देवी मंदिर में श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना के बाद मेले का लुत्फ उठाया। श्रद्धालुओं के मनोरंजन के लिए झूले आदि सुविधाओं का मजा लिया। दूर दराज से लोग देवी मंदिर में आराधना करने के बाद मेले का लुत्फ उठाया।
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दुर्गाष्टमी पर हवन 24 को
बागपत। ज्योतिषाचार्य पंडित राज कुमार शास्त्री ने बताया 24 मार्च को नवरात्र और दुर्गाष्टमी के उपलक्ष्य बाबा जानकी दास के मंदिर में सुबह हवन होगा। संगीतमयी, सुंदर कांड होगा। इसका समापन शाम को होगा।
जिला खाद्य अधिकारी ने की जांच
दोघट (बागपत)। कान्हड़ देवी मंदिर में सोमवार को खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुरेंद्र चौरसिया ने मेले में लगी दुकानों की जांच की। चेतावनी दी कोई भी मिठाई खुली न बेचे और रंग का इस्तेमाल न करें। उन्होंने कहा मिठाई का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजेंगे। गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई होगी।
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पांचवें नवरात्र पर स्कंद माता की पूजा की गई। इस दौरान भक्तों ने विभिन्न विधियों से माता की आराधना की। मां के भक्तों ने व्रत रखकर साधना की और शाम के समय पूजा करने के बाद उपवास खोला। ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि माता को गुडहल के फूल, अनार तथा लौंग के जोड़े से पूजा करने से फलदायी रहता है। स्कंद माता की पूजा करने से व्यक्ति को शत्रु से भय नहीं रहता। देवी कमल के आसन पर विराजमान है। सिंह ही इनका वाहन है। जो भक्तजन इनकी आराधना करते हैं, वे सांसारिक बंधनों से मुक्त हो जाते हैं। मृत्युलोक में वे लोग सुख प्राप्त करके अन्नत: मोक्ष की प्राप्ति करते है। शाम को मां भगवती की आरती हुई और आरती के बाद सभी को प्रसाद का वितरण किया। शहर के पक्का घाट मंदिर, सनातन धर्म हनुमान मंदिर, ठाकुरद्वारा स्थित राधा-कृष्ण दामोदर चंद महाराज मंदिर, सालिगराम मंदिर, मेरठ रोड स्थित शिव मंदिर, पुराना कस्बा स्थित बागेश्वर मंदिर, पिपलेश्वर मंदिर और शुगर मिल स्थित दुर्गा मंदिर में भी भक्त पहुंचे और उन्होंने देवी का पूजन किया। सालिगराम मंदिर में माता की पूजा की। इसके अलावा क्षेत्र में बालैनी, अग्रवाल मंडी टटीरी, दाहा, रमाला, दोघट में भक्तों ने पूजा स्कंद माता की पूजा कर मनौती मांगी।
जो राम के जीवन को नहीं जिए, वो कृष्ण के उपदेश नहीं समझते : स्तुति
अमीनगर सराय (बागपत)। श्रीमद् भागवत कथा में कथावाचक बहन स्तुति ने राम और कृष्ण के चरित्र को बड़े ही मनमोहक ढंग से चरितार्थ किया। कहा कि भगवान श्री राम ने जिस तरह मर्यादा में रहते हुए लोकहित कार्य किए वो बड़े ही अद्भूत हैं और इस मायावी संसार में जिसने प्रभु श्रीराम के चरित्र को जिया है वो ही श्रीकृष्ण के कहे उपदेशों को समझ सकता है, क्योंकि सांसारिक मोह माया में रहकर आज मनुष्य अपने पतन की ओर अग्रसर है ओर इस नश्वर संसार मे जिसने श्री राम के चरित्र को जी लिया और जिसने श्रीकृष्ण के उपदेशों का पालन कर लिया समझो वो परम धाम मोक्ष की प्राप्ति कर गया। भौतिकवादिता में भी मनुष्य को अपने सद्कर्मों पर चलने की प्रेरणा दी। काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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देवी मंदिर पर मेला शुरू
दाहा। क्षेत्र के कान्हड़ गांव स्थित देवी मंदिर में श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना के बाद मेले का लुत्फ उठाया। श्रद्धालुओं के मनोरंजन के लिए झूले आदि सुविधाओं का मजा लिया। दूर दराज से लोग देवी मंदिर में आराधना करने के बाद मेले का लुत्फ उठाया।
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दुर्गाष्टमी पर हवन 24 को
बागपत। ज्योतिषाचार्य पंडित राज कुमार शास्त्री ने बताया 24 मार्च को नवरात्र और दुर्गाष्टमी के उपलक्ष्य बाबा जानकी दास के मंदिर में सुबह हवन होगा। संगीतमयी, सुंदर कांड होगा। इसका समापन शाम को होगा।
जिला खाद्य अधिकारी ने की जांच
दोघट (बागपत)। कान्हड़ देवी मंदिर में सोमवार को खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुरेंद्र चौरसिया ने मेले में लगी दुकानों की जांच की। चेतावनी दी कोई भी मिठाई खुली न बेचे और रंग का इस्तेमाल न करें। उन्होंने कहा मिठाई का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजेंगे। गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई होगी।