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जब छात्रों के आंदोलन ने बदल दी चुनाव की दिशा
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आजमगढ़। बात 13 अप्रैल 1978 की है जब छात्रों के एक आंदोलन ने लोक सभा चुनाव में जनता दल के पूरे गणित को बिगाड़ दिया था। छात्र पुलिस की लाठियां खाते रहे, जेल भी गए लेकिन अपनी जिद नहीं छोड़ी। छात्रों के इस आंदोलन ने लोकसभा उपचुनाव की दिशा ही बदल दी।
किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष इम्तेयाज बेग ने बताया कि उस समय उप्र के सीएम रामनरेश यादव थे। जनता दल के प्रत्याशी रामबचन यादव को नामांकन कराने के लिए वह डाक बंगले में आए थे। उनके साथ उनके मंत्रिमंडल के कई मंत्री भी थे। शिब्ली कॉलेज के अध्यक्ष मजहर मुस्तफा, डीएवी पीजी कॉलेज के अध्यक्ष भागवत राय के साथ कई छात्र अपना मांग पत्र लेकर उनसे मिलने के लिए डाक बंगला पहुंचे। उन्होंने तीन मांगें रखी जिसमें आजमगढ़ में पूर्वांचल विश्वविद्यालय की स्थापना कराई जाए। जनपद में बाहर से काफी छात्र पढ़ने के लिए आते हैं लेकिन उनके रहने की कोई व्यवस्था नही है। इसलिए जनपद में 2000 छात्रों के रहने के लिए हास्टल का निर्माण कराया जाए और रेलवे स्टेशन से लेकर आईटीआई कॉलेज तक सिटी बस सेवा शुरू की जाए। लेकिन सीएम रामनरेश यादव ने छात्र नेताओं की मांगों को मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद छात्रों की बैठक हुई। बैठक में यह निर्णय लिया गया नामांकन के बाद जनता दल की मेहता पार्क में होने वाली जनसभा को नहीं होने दिया जाएगा। फिर क्या था जनसभा शुरू होने से पहले ही छात्रों ने हंगामा शुरू हो गया। उस समय जिले के एसपी एसके सरन थे। उन्होंने लाठीचार्ज का निर्देश दिया। उनके निर्देश पर पुलिस ने सात बार लाठियां भांजी। जिसमें कई छात्रों के सिर फूट गए। 23 छात्रों को जेल भेज दिया गया। छात्रों के इस आंदोलन ने इतना जोर पकड़ा जनता दल के प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा।
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किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष इम्तेयाज बेग ने बताया कि उस समय उप्र के सीएम रामनरेश यादव थे। जनता दल के प्रत्याशी रामबचन यादव को नामांकन कराने के लिए वह डाक बंगले में आए थे। उनके साथ उनके मंत्रिमंडल के कई मंत्री भी थे। शिब्ली कॉलेज के अध्यक्ष मजहर मुस्तफा, डीएवी पीजी कॉलेज के अध्यक्ष भागवत राय के साथ कई छात्र अपना मांग पत्र लेकर उनसे मिलने के लिए डाक बंगला पहुंचे। उन्होंने तीन मांगें रखी जिसमें आजमगढ़ में पूर्वांचल विश्वविद्यालय की स्थापना कराई जाए। जनपद में बाहर से काफी छात्र पढ़ने के लिए आते हैं लेकिन उनके रहने की कोई व्यवस्था नही है। इसलिए जनपद में 2000 छात्रों के रहने के लिए हास्टल का निर्माण कराया जाए और रेलवे स्टेशन से लेकर आईटीआई कॉलेज तक सिटी बस सेवा शुरू की जाए। लेकिन सीएम रामनरेश यादव ने छात्र नेताओं की मांगों को मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद छात्रों की बैठक हुई। बैठक में यह निर्णय लिया गया नामांकन के बाद जनता दल की मेहता पार्क में होने वाली जनसभा को नहीं होने दिया जाएगा। फिर क्या था जनसभा शुरू होने से पहले ही छात्रों ने हंगामा शुरू हो गया। उस समय जिले के एसपी एसके सरन थे। उन्होंने लाठीचार्ज का निर्देश दिया। उनके निर्देश पर पुलिस ने सात बार लाठियां भांजी। जिसमें कई छात्रों के सिर फूट गए। 23 छात्रों को जेल भेज दिया गया। छात्रों के इस आंदोलन ने इतना जोर पकड़ा जनता दल के प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा।
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