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अंडर ग्राउंड केबिल का कार्य अधूरा
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Wed, 12 Apr 2017 11:03 PM IST
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जगह-जगह बिखरे पड़े है केबल और जक्शन बाक्स।
वर्ष 2012 में सपा सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जनपद को तारों के मकड़जाल से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार ने 72 करोड़ रुपये की लागत से अंडर ग्राउंड केबिल बिछाने का निर्णय लिया। नवंबर 2013 में शुरू हुआ कार्य नवंबर 2015 में पूरा होना था। लेकिन चार बाद पूरा हुआ।
जनपद में 72 करोड़ की लागत से नवंबर 2013 में अंडरग्राउंड केबिल बिछाने का कार्य शुरू हुुआ। कार्यदायी संस्था ने तेजी से कार्य को शुरू किया। लेकिन इस बीच राजनीति के कारण पहली कंपनी को हटाकर दूसरी कंपनी पाली कैब को कार्य कराने का जिम्मा सौंप दिया गया। जबसे केबिल बिछाने का कार्य शुरू हुआ तभी से इसे मानक के विपरीत केबिल बिछाने के आरोप लगते रहेे। इस आरोप की सत्यता की जांच के लिए तत्कालीन ऊर्जा राज्य मंत्री वसीम अहमद ने केबिल कार्य का निरीक्षण भी किया और बताया कि केबिल मानक के अनुसार बिछाई जा रही है। इस बीच केबिल बिछाने का बजट बढ़कर 83 करोड़ रुपये हो गया। नवंबर 2015 समाप्त हो गया लेकिन कंपनी अपना कार्य पूरा नहीं कर सकी। इसके बाद इसके समय को बढ़ाकर नवंबर 2016 कर दिया गया। फिर भी कंपनी कार्य को पूरा नहीं कर सकी।
तब तत्कालीन वन मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव ने बिजली विभाग के अधिकारियों और कार्यदायी संस्था के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कंपनी को मार्च 2017 तक का समय दिया और कहा कि अगर इस समय सीमा में कंपनी ने कार्य को पूरा नहीं किया तो वह स्वयं उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएंगे। मार्च का महीना बीत गया लेकिन कंपनी फिर भी अपने कार्य को पूरा नहीं कर सकी। इस बीच विधानसभा चुनाव हुए और सत्ता परिवर्तन हो गया। कार्य शुरू होने के चार वर्ष बाद भी अभी तक 43 साइटों का कार्य बाकी है।
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जनपद में 72 करोड़ की लागत से नवंबर 2013 में अंडरग्राउंड केबिल बिछाने का कार्य शुरू हुुआ। कार्यदायी संस्था ने तेजी से कार्य को शुरू किया। लेकिन इस बीच राजनीति के कारण पहली कंपनी को हटाकर दूसरी कंपनी पाली कैब को कार्य कराने का जिम्मा सौंप दिया गया। जबसे केबिल बिछाने का कार्य शुरू हुआ तभी से इसे मानक के विपरीत केबिल बिछाने के आरोप लगते रहेे। इस आरोप की सत्यता की जांच के लिए तत्कालीन ऊर्जा राज्य मंत्री वसीम अहमद ने केबिल कार्य का निरीक्षण भी किया और बताया कि केबिल मानक के अनुसार बिछाई जा रही है। इस बीच केबिल बिछाने का बजट बढ़कर 83 करोड़ रुपये हो गया। नवंबर 2015 समाप्त हो गया लेकिन कंपनी अपना कार्य पूरा नहीं कर सकी। इसके बाद इसके समय को बढ़ाकर नवंबर 2016 कर दिया गया। फिर भी कंपनी कार्य को पूरा नहीं कर सकी।
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तब तत्कालीन वन मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव ने बिजली विभाग के अधिकारियों और कार्यदायी संस्था के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कंपनी को मार्च 2017 तक का समय दिया और कहा कि अगर इस समय सीमा में कंपनी ने कार्य को पूरा नहीं किया तो वह स्वयं उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएंगे। मार्च का महीना बीत गया लेकिन कंपनी फिर भी अपने कार्य को पूरा नहीं कर सकी। इस बीच विधानसभा चुनाव हुए और सत्ता परिवर्तन हो गया। कार्य शुरू होने के चार वर्ष बाद भी अभी तक 43 साइटों का कार्य बाकी है।
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