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अमेरिकी सरकार की कार्रवाई: आव्रजन पर प्रशासन की सख्ती पर क्या बोला माइक्रोसॉफ्ट? सीईओ नडेला को मिला सम्मान
Fri, 09 Oct 2026 04:12 AM IST
निर्मल कांत
एजेंसी, वाशिंगटन डीसी।
एजेंसी, वाशिंगटन डीसी।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 09 Oct 2026 04:12 AM IST
सार
अमेरिकी प्रशासन की आव्रजन कार्रवाई के बीच माइक्रोसॉफ्ट ने अपनी एच-1बी वीजा नीति का बचाव किया। वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्या नडेला को नेशनल मेडल ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन से सम्मानित किया।
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सत्या नडेला
- फोटो : amarujala.com
विस्तार
गुरुवार को माइक्रोसॉफ्ट ने ट्रंप प्रशासन की आव्रजन कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दी। कंपनी को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित कर दिया गया था। इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्या नडेला को नेशनल मेडल ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन से सम्मानित किया।
माइक्रोसॉफ्ट ने अपने जवाब में अमेरिकी कार्यबल की ताकत और प्रतिभा में विश्वास जताया। कंपनी ने कहा कि उसके अधिकांश अमेरिकी कर्मचारी अमेरिकी ही हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में उसके करीब 6,000 एच-1बी वीजा आवेदनों में से 80 फीसदी मौजूदा कर्मचारियों की स्थिति बदलने या बढ़ाने के लिए थे। नए कर्मचारियों के लिए शेष आवेदन उन लोगों के लिए थे जो पहले से ही अमेरिका में कानूनी रूप से मौजूद थे। कंपनी ने कहा कि ये कर्मचारी उसके अमेरिकी कार्यबल का केवल एक फीसदी थे। माइक्रोसॉफ्ट ने विदेशी श्रमिकों को कम भुगतान करने के सुझाव का खंडन किया। कंपनी ने कहा कि वह एच-1बी कर्मचारियों को अन्य कर्मचारियों के समान ही वेतन देती है। ट्रंप ने नडेला के नेतृत्व और माइक्रोसॉफ्ट को बदलने में उनकी भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने क्लाउड कंप्यूटिंग और सुपरइंटेलिजेंस में नडेला के योगदान को सराहा।
ये भी पढ़ें: आइवरी कोस्ट में जयशंकर: रक्षा और कृषि में सहयोग बढ़ाने पर जोर; किन नेताओं से हुई मुलाकात, क्या है मकसद?
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आव्रजन कार्रवाई क्यों हुई?
अमेरिकी श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग ने माइक्रोसॉफ्ट को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित करने की घोषणा की। एडोब और कई बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों को भी निलंबित किया गया। उन्होंने कई सक्रिय संघीय जांचों का हवाला दिया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर अमेरिकी श्रमिकों को निकालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कंपनी ने 6,000 अमेरिकी श्रमिकों को निकाला, जबकि 6,300 H-1B वीजा और करीब 3,000 ग्रीन कार्ड का लाभ उठाया।
अन्य कंपनियों और विश्वविद्यालयों पर क्या कार्रवाई हुई?
सोंडरलिंग ने कहा कि श्रम विभाग इन कंपनियों के नए या लंबित आवेदन स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि इन कंपनियों ने 2009 से करीब 30 लाख विदेशी श्रमिकों का अनुरोध किया था। उन्हें 2.30 लाख से अधिक एच-1बी वीजा और 1 लाख से अधिक स्थायी श्रम प्रमाणन मिले थे। श्रम विभाग ने नौ प्रमुख अमेरिकी विश्वविद्यालयों में जे-1 वीजा धोखाधड़ी की ऐतिहासिक जांच की भी घोषणा की। गृह सुरक्षा विभाग ने F-1 छात्रों के लिए वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (ओपीटी) आवेदनों पर 70,000 रुपये और बाद के आवेदनों पर 30,000 रुपये के नए शुल्क का प्रस्ताव दिया है।
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माइक्रोसॉफ्ट ने अपने जवाब में अमेरिकी कार्यबल की ताकत और प्रतिभा में विश्वास जताया। कंपनी ने कहा कि उसके अधिकांश अमेरिकी कर्मचारी अमेरिकी ही हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में उसके करीब 6,000 एच-1बी वीजा आवेदनों में से 80 फीसदी मौजूदा कर्मचारियों की स्थिति बदलने या बढ़ाने के लिए थे। नए कर्मचारियों के लिए शेष आवेदन उन लोगों के लिए थे जो पहले से ही अमेरिका में कानूनी रूप से मौजूद थे। कंपनी ने कहा कि ये कर्मचारी उसके अमेरिकी कार्यबल का केवल एक फीसदी थे। माइक्रोसॉफ्ट ने विदेशी श्रमिकों को कम भुगतान करने के सुझाव का खंडन किया। कंपनी ने कहा कि वह एच-1बी कर्मचारियों को अन्य कर्मचारियों के समान ही वेतन देती है। ट्रंप ने नडेला के नेतृत्व और माइक्रोसॉफ्ट को बदलने में उनकी भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने क्लाउड कंप्यूटिंग और सुपरइंटेलिजेंस में नडेला के योगदान को सराहा।
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आव्रजन कार्रवाई क्यों हुई?
अमेरिकी श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग ने माइक्रोसॉफ्ट को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित करने की घोषणा की। एडोब और कई बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों को भी निलंबित किया गया। उन्होंने कई सक्रिय संघीय जांचों का हवाला दिया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर अमेरिकी श्रमिकों को निकालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कंपनी ने 6,000 अमेरिकी श्रमिकों को निकाला, जबकि 6,300 H-1B वीजा और करीब 3,000 ग्रीन कार्ड का लाभ उठाया।
अन्य कंपनियों और विश्वविद्यालयों पर क्या कार्रवाई हुई?
सोंडरलिंग ने कहा कि श्रम विभाग इन कंपनियों के नए या लंबित आवेदन स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि इन कंपनियों ने 2009 से करीब 30 लाख विदेशी श्रमिकों का अनुरोध किया था। उन्हें 2.30 लाख से अधिक एच-1बी वीजा और 1 लाख से अधिक स्थायी श्रम प्रमाणन मिले थे। श्रम विभाग ने नौ प्रमुख अमेरिकी विश्वविद्यालयों में जे-1 वीजा धोखाधड़ी की ऐतिहासिक जांच की भी घोषणा की। गृह सुरक्षा विभाग ने F-1 छात्रों के लिए वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (ओपीटी) आवेदनों पर 70,000 रुपये और बाद के आवेदनों पर 30,000 रुपये के नए शुल्क का प्रस्ताव दिया है।