पूर्वांचल के इस जिले में नहीं टला खतरा, फिर निकला टिड्डियों का दल, सकते में कृषि विभाग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आजमगढ़ जनपद में अभी टिड्डी दल का खतरा टला नहीं है। लगातार बारिश से टिड्डियों का दल कई खेमों में बंट गया है। गुरुवार को जौनपुर की सीमा से घुसा टिड्डियों का दल किसी तरफ निकल गया था। इससे कृषि विभाग का साथ ही किसानों ने राहत की सांस ली थी। शुक्रवार सुबह में शाहगंज की सीमा से टिड्डियों का दो और दल जनपद की सीमा में घुसा है। हालांकि ये काफी ऊंचाई पर उड़ रहा है। इसलिए अभी नुकसान नहीं हुआ है। मार्टीनगंज तहसील के मोलनापुर, छित्तेपुर और कौरा गहनी में इन्हें देखा गया है। जानकारी होते ही कृषि विभाग की टीम के अधिकारी कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंच गए।
जौनपुर की ओर से से चला टिड्डियों का दल गुरुवार को जनपद पहुंचा था। दीदारगंज, मार्टीनगंज होते हुए ये सरायमीर, रानी की सराय आदि से होकर वापस जौनपुर की ओर निकल गया था। पूरे दिन भारी बारिश होने के कारण टिड्डियों के दल के बिखरने की आशंका जताई जा रही है। छोटे-छोटे झुंड में ये आसमान में काफी ऊपर उड़ रहे हैं। हालांकि अभी कहीं खास नुकसान की शिकायतें सामने नहीं आई है।
कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा के कृषि वैज्ञानिक डा. आरपी सिंह ने बताया कि टिड्डियों के रुकने की अभी स्थिति नहीं बनी है। यदि वे दिखते हैं तो तेज ध्वनि विस्तारक सामानों को बजाकर डराकर उन्हें भगाएं। इसे लेकर कृषि विभाग काफी अलर्ट है।
कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी
आजमगढ़ जिला कृषि अधिकारी डॉ. उमेश कुमार गुप्ता ने बताया कि गुरुवार को जनपद के विकास खंड मार्टीनगंज में फिर टिड्डी दल की आने की सूचना प्राप्त हुई। प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कृषि विभाग के कर्मचारियों को निरंतर कृषकों से संपर्क बनाये रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि टिड्डी दल के बारे में जानकारी प्राप्त होती रहे।
टिड्डी दल को खेतों के आस-पास दिखाई देते ही किसान भाई टोलियां बनाकर सायं काल के समय थाली, ढ़ोल, नगााड़े, घंटियां, डीजे एवं पटाखे आदि की तेज आवाज करके इनको भगा सकते हैं। प्रकाश प्रपंच का प्रयोग कर भी टिड्डियों को एकत्रित करके नष्ट किया जा सकता है। टिड्डी दल के आकाश में दिखाई देने पर घास-फूस जलाकर धुंआ करें। टिड्डी दल के आक्रमण के बाद कीटनाशक उपलब्ध न होने की दशा में ट्रैक्टर चालित पावर स्प्रेयर के द्वारा पानी की तेज बौछार से भी इन्हें भगाया जा सकता है।
इन दवाओं का करें छिड़काव
इन पर नियंत्रण के लिए एजाडीरेक्टीन (नीम ऑयल) 1.50 से 2.00 लीटर प्रति हेक्टेयर 600 से 700 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। टिड्डियों का प्रकोप होने पर क्लोरपायरीफॉस 20 प्रतिशत ईसी 1200 मिली, लेम्डा साइहेलोथ्रीन 5 प्रतिशत ईसी 400 मिली या बेन्थियों कार्ब 80 प्रतिशत 125 ग्राम, 500 लीटर पानी में प्रति हेक्टेयर की दर से घोल बनाकर छिडक़ाव करें या फेनवेलरेट 0.4 प्रतिशत अथवा मैलाथियान 5 प्रतिशत धूल 20 से 25 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से सुबह पत्तियों पर ओस देखकर बुरकाव करें। टिड्डी दल के खेत में बैठने के बाद उनके अंडों को नष्ट करने के लिए खेत की गहरी जुताई कर दें।
इन नंबरों पर दें इनके आक्रमण की सूचना
आक्रमण होने की सूचना ग्राम प्रधान, लेखपाल कृषि विभाग के प्राविधिक सहायकों एवं ग्राम पंचायत अधिकारी के माध्यम से कृषि विभाग अथवा जिला प्रशासन तक तत्काल पहुचाएं। इनके आक्रमण की दशा में जनपद स्तर पर बने कंट्रोल रुम मोबाइल नं0 9919588753, 9450809578, 9260951598 एवं 9415902075 पर जानकारी उपलब्ध कराएं या क्षेत्रीय केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, लखनऊ के फोन नं0 0522-2732063 अथवा अपर निदेशक कृषि रक्षा लखनऊ को फोन नं0- 0522-2205868 पर भी सूचित कर सकते हैं।