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कई विद्यालयों में बिजली कनेक्शन ही नहीं, कक्षा में गर्मी से बेहाल हैं नौनिहाल
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जूनियर विद्यालय भरौली में विद्युत कनेक्शन ना होने के कारण गर्मी से परेशान बच्चे।
- फोटो : AZAMGARH
परिषदीय विद्यालयों में 19 पैरामीटर पर ऑपरेशन कायाकल्प से पूरा कराना है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण विद्यालयों में बिजली की सप्लाई चालू करना है। अभी भी जिले के कई परिषदीय विद्यालय ऐसे हैं जहां पर बिजली नहीं पहुंच सकी है या कनेक्शन काट दिए गए हैं। भीषण गर्मी में बिना पंखे के बच्चों को पढ़ाई करनी पड़ रही है।
जिला में परिषदीय विद्यालयों की संख्या 2702 हैं। जिसमें 528 कंपोजिट, 1720 प्राथमिक और 454 उच्च प्राथमिक विद्यालय मौजूद हैं। अधिकांश विद्यालयों में विद्युतीकरण कराया गया है। दो वर्षों से कोरोना संक्रमण के कारण विद्यालय बंद थे। कोरोना संक्रमण थमने के बाद विद्यालय खुल गए। उधर, बिजली विभाग ने बकाया बिल को लेकर करीब 355 विद्यालयों की बिजली काट दी गई है। हालांकि कुछ विद्यालयों का बिल जमा कर स्कूलों में कनेक्शन कराया गया है। जिन विद्यालयों में बिजली कनेक्शन नहीं है उनमें पढ़ने वाले बच्चे गर्मी में परेशान हैं। बीएसए अतुल कुमार सिंह ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों का बिजली बिल बाकी होने से कनेक्शन काटे गए हैं। सरकारी स्कूलों का भुगतान ग्राम पंचायत को करना है। भुगतान होने के बाद विद्यालयों में कनेक्शन कर दिया जाएगा।
सुबह 11.30 बजे, पंखे तो हैं पर बिजली कनेक्शन नहीं
शिक्षा क्षेत्र ठेकमा के प्राथमिक विद्यालय कुड़िहर में भीषण गर्मी और तपिश में बच्चों का हाल बेहाल थ। यहां पंखे तो हैं पर बिजली कनेक्शन नहीं है। प्रधानाध्यापक संतोष कुमार पाल ने बताया कि यहां करीब छह साल से हर कमरे में बोर्ड, बिजली का कनेक्शन है लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि आज तक कनेक्शन नहीं हो पाया है। जिसके चलते बच्चों को गर्मी में परेशानी हो रही है।
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सुबह 11.00 बजे, बिजली नहीं, बच्चे पसीने से थे तरबतर
सगड़ी। शिक्षा के क्षेत्र में सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है। इसके बावजूद सरकारी विद्यालय में पानी-बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं है। जूनियर विद्यालय भरौली में भी बिजली कनेक्शन नहीं है। जिसके चलते बच्चों को परेशानी हो रही है। विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे पसीने से तरबतर नजर आ रहे है। शिक्षक भी इस स्थिति में बच्चों को खुले बरामदे में बिठाने के लिए विवश हैं।
बिजली कटौती से बच्चे परेशान
ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित परिषदीय विद्यालयों में बिजली कनेक्शन कराए गए हैं। जब बिजली रहती है तो पंखे चलते हैं लेकिन वर्तमान समय में दिन में हो रही कटौती के चलते बच्चे उमसभरी गर्मी में पढ़ने को विवश है।
सोलर बिजली देने की योजना खटाई में
परिषदीय विद्यालयों को सोलर उर्जा से जोड़ने की योजना बनाई गई है। योजना के मूर्त रूप न लिए जाने के कारण बच्चों को बिजली का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं इस समय दिन में बिजली आपूर्ति गेहूं की फसल की वजह से बंद है। जिससे बच्चों को गर्मी में पढ़ना पड़ रहा है।
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जिला में परिषदीय विद्यालयों की संख्या 2702 हैं। जिसमें 528 कंपोजिट, 1720 प्राथमिक और 454 उच्च प्राथमिक विद्यालय मौजूद हैं। अधिकांश विद्यालयों में विद्युतीकरण कराया गया है। दो वर्षों से कोरोना संक्रमण के कारण विद्यालय बंद थे। कोरोना संक्रमण थमने के बाद विद्यालय खुल गए। उधर, बिजली विभाग ने बकाया बिल को लेकर करीब 355 विद्यालयों की बिजली काट दी गई है। हालांकि कुछ विद्यालयों का बिल जमा कर स्कूलों में कनेक्शन कराया गया है। जिन विद्यालयों में बिजली कनेक्शन नहीं है उनमें पढ़ने वाले बच्चे गर्मी में परेशान हैं। बीएसए अतुल कुमार सिंह ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों का बिजली बिल बाकी होने से कनेक्शन काटे गए हैं। सरकारी स्कूलों का भुगतान ग्राम पंचायत को करना है। भुगतान होने के बाद विद्यालयों में कनेक्शन कर दिया जाएगा।
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सुबह 11.30 बजे, पंखे तो हैं पर बिजली कनेक्शन नहीं
शिक्षा क्षेत्र ठेकमा के प्राथमिक विद्यालय कुड़िहर में भीषण गर्मी और तपिश में बच्चों का हाल बेहाल थ। यहां पंखे तो हैं पर बिजली कनेक्शन नहीं है। प्रधानाध्यापक संतोष कुमार पाल ने बताया कि यहां करीब छह साल से हर कमरे में बोर्ड, बिजली का कनेक्शन है लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि आज तक कनेक्शन नहीं हो पाया है। जिसके चलते बच्चों को गर्मी में परेशानी हो रही है।
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सुबह 11.00 बजे, बिजली नहीं, बच्चे पसीने से थे तरबतर
सगड़ी। शिक्षा के क्षेत्र में सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है। इसके बावजूद सरकारी विद्यालय में पानी-बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं है। जूनियर विद्यालय भरौली में भी बिजली कनेक्शन नहीं है। जिसके चलते बच्चों को परेशानी हो रही है। विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे पसीने से तरबतर नजर आ रहे है। शिक्षक भी इस स्थिति में बच्चों को खुले बरामदे में बिठाने के लिए विवश हैं।
बिजली कटौती से बच्चे परेशान
ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित परिषदीय विद्यालयों में बिजली कनेक्शन कराए गए हैं। जब बिजली रहती है तो पंखे चलते हैं लेकिन वर्तमान समय में दिन में हो रही कटौती के चलते बच्चे उमसभरी गर्मी में पढ़ने को विवश है।
सोलर बिजली देने की योजना खटाई में
परिषदीय विद्यालयों को सोलर उर्जा से जोड़ने की योजना बनाई गई है। योजना के मूर्त रूप न लिए जाने के कारण बच्चों को बिजली का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं इस समय दिन में बिजली आपूर्ति गेहूं की फसल की वजह से बंद है। जिससे बच्चों को गर्मी में पढ़ना पड़ रहा है।