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शासन में अटकी महायोजना 2031 की फाइल
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लगभग एक वर्ष जनपद की नई महायोजना 2031 पर आई आपत्तियों का निस्तारण कर इसे लागू करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। राज्य स्तरीय कमेटी ने भी इस पर अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी थी। इसके बाद से फाइल मुख्यमंत्री योगी के पास स्वीकृति के लिए पड़ी हुई है। जबकि इस महायोजना का आजमगढ़ विकास प्रधिकरण के साथ ही आम जनता को भी बड़ी बेसब्री से इंतजार है।
जनपद की पुरानी महायोजना 2011 को समाप्त हुए 11 साल बीत गया है। लेकिन अभी तक नई महायोजना 2031 लागू नहीं हो सकी है। जिसका परिणाम है कि जनपद में जो भी कार्य हैं वह पुरानी महायोजना 2011 के प्रारूप पर ही चल रहे हैं। पुरानी महायोजना के प्रतिबंधित क्षेत्रों में निर्माण करने के कारण एडीए द्वारा लोगों को नोटिस दिया जा रहा है। लोग मानचित्र स्वीकृत कराना चाहते हैं लेकिन आजमगढ़ विकास प्रधिकरण उनके मानचित्र को स्वीकृत नहीं कर पा रहा है। जिसका परिणाम है कि लोग मुकदमों की मार झेल रहे हैं। प्राधिकरण में धीरे-धीरे मुकदमों का बोझ बढ़ता जा रहा है। हालांकि एडीए की ओर से नई महायोजना 2031 को लागू कराने के लिए कई बार प्रस्ताव दिया गया लेकिन राज्य स्तरीय कमेटी से स्वीकृत नहीं हुआ।
लगभग एक साल पूर्व भेजी गई महायोजना 2031 पर आई लोगों की आपत्तियों के निस्तारण के बाद राज्य स्तरीय कमेटी के पास भेजा गया था जिस पर राज्य स्तरीय कमेटी की मुहर लग चुकी है। लेकिन अब यह फाइल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास स्वीकृति के बिना अटकी हुई। अगर मुख्यमंत्री योगी इस फाइल पर अपनी स्वीकृति प्रदान कर देते हैं तो आजमगढ़ विकास प्रधिकरण में चल रहे करीब 70 प्रतिशत मुकदमों का निस्तारण अपने आप ही हो जाएगा। क्योंकि बहुत से क्षेत्रों का स्वत: ही लैंडयूज परिवर्तित हो जाएगा। लेकिन इसके लिए लोगों केे समन मानचित्र दाखिल कर उसकी फीस जमाकर मानचित्र स्वीकृत कराना होगा।
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आय में होगी बेतहाशा वृद्घि, शोषण पर लगेगा विराम
नई महायोजना 2031 के लागू होते ही आम जन को एडीए कर्मचारियों के शोषण से मुक्ति मिलेगी। अभी उनके द्वारा ध्वस्तीकरण की धमकी देकर लोगों से अवैध धन की वसूली की जाती है। लेकिन नई महायोजना लागू होने के बाद लोग समन मानचित्र दाखिल कर फीस जमाकर अपने आशियाने का मानचित्र स्वीकृत करा सकेंगे। इसके साथ ही एडीए की आमदनी भी काफी बढ़ जाएगी। जिससे वह शहर के सुनियोजित विकास का खाका खींच सकेगा।
एडीए सचिव बैजनाथ ने बताया कि हमारी ओर से अवैध निर्माणों को लगातार कार्रवाई की जा रही है। अवैध निर्माण कर्ताओं के ऊपर मुकदमा किया जा रहा है। नई महायोजना का प्रस्ताव सीएम के पास स्वीकृति के लिए पड़ा हुआ है। उनकी स्वीकृत मिलते ही बहुत से मुकदमों का स्वत: ही निस्तारण हो जाएगा। क्योंकि नई महायोजना में कई क्षेत्रों का लैंडयूज परिवर्तित हो जाएगा।
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जनपद की पुरानी महायोजना 2011 को समाप्त हुए 11 साल बीत गया है। लेकिन अभी तक नई महायोजना 2031 लागू नहीं हो सकी है। जिसका परिणाम है कि जनपद में जो भी कार्य हैं वह पुरानी महायोजना 2011 के प्रारूप पर ही चल रहे हैं। पुरानी महायोजना के प्रतिबंधित क्षेत्रों में निर्माण करने के कारण एडीए द्वारा लोगों को नोटिस दिया जा रहा है। लोग मानचित्र स्वीकृत कराना चाहते हैं लेकिन आजमगढ़ विकास प्रधिकरण उनके मानचित्र को स्वीकृत नहीं कर पा रहा है। जिसका परिणाम है कि लोग मुकदमों की मार झेल रहे हैं। प्राधिकरण में धीरे-धीरे मुकदमों का बोझ बढ़ता जा रहा है। हालांकि एडीए की ओर से नई महायोजना 2031 को लागू कराने के लिए कई बार प्रस्ताव दिया गया लेकिन राज्य स्तरीय कमेटी से स्वीकृत नहीं हुआ।
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लगभग एक साल पूर्व भेजी गई महायोजना 2031 पर आई लोगों की आपत्तियों के निस्तारण के बाद राज्य स्तरीय कमेटी के पास भेजा गया था जिस पर राज्य स्तरीय कमेटी की मुहर लग चुकी है। लेकिन अब यह फाइल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास स्वीकृति के बिना अटकी हुई। अगर मुख्यमंत्री योगी इस फाइल पर अपनी स्वीकृति प्रदान कर देते हैं तो आजमगढ़ विकास प्रधिकरण में चल रहे करीब 70 प्रतिशत मुकदमों का निस्तारण अपने आप ही हो जाएगा। क्योंकि बहुत से क्षेत्रों का स्वत: ही लैंडयूज परिवर्तित हो जाएगा। लेकिन इसके लिए लोगों केे समन मानचित्र दाखिल कर उसकी फीस जमाकर मानचित्र स्वीकृत कराना होगा।
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आय में होगी बेतहाशा वृद्घि, शोषण पर लगेगा विराम
नई महायोजना 2031 के लागू होते ही आम जन को एडीए कर्मचारियों के शोषण से मुक्ति मिलेगी। अभी उनके द्वारा ध्वस्तीकरण की धमकी देकर लोगों से अवैध धन की वसूली की जाती है। लेकिन नई महायोजना लागू होने के बाद लोग समन मानचित्र दाखिल कर फीस जमाकर अपने आशियाने का मानचित्र स्वीकृत करा सकेंगे। इसके साथ ही एडीए की आमदनी भी काफी बढ़ जाएगी। जिससे वह शहर के सुनियोजित विकास का खाका खींच सकेगा।
एडीए सचिव बैजनाथ ने बताया कि हमारी ओर से अवैध निर्माणों को लगातार कार्रवाई की जा रही है। अवैध निर्माण कर्ताओं के ऊपर मुकदमा किया जा रहा है। नई महायोजना का प्रस्ताव सीएम के पास स्वीकृति के लिए पड़ा हुआ है। उनकी स्वीकृत मिलते ही बहुत से मुकदमों का स्वत: ही निस्तारण हो जाएगा। क्योंकि नई महायोजना में कई क्षेत्रों का लैंडयूज परिवर्तित हो जाएगा।