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घनी आबादी के बीच खड़े जर्जर भवन कभी भी ले सकते हैं जान
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बदरका स्थित जर्जर परिषदीय विद्यालय।
- फोटो : AZAMGARH
शहर की घनी आबादी के बीच खड़े जर्जर भवन हादसों को न्योता दे रहे हैं। दशकों पुराने इन भवनों की मियाद पूरी हो चुकी है। वे खंडहर बन चुके हैं। उनके कई हिस्से आए दिन टूटकर गिरते हैं। बावजूद उन पर न तो भवन स्वामी का ध्यान है और न ही नगर पालिका प्रशासन की नजर पड़ रही है। पूर्व में कई घटनाओं के बावजूद जिम्मेदार बेपरवाह हैं। बारिश का मौसम नजदीक आने के साथ इन भवनों के आस-पास रह रहे लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है।
लगभग 20 हजार भवन नगर पालिका की सीमा में स्थित हैं। पालिका प्रशासन इनसे गृहकर व जलकर भी वसूल करता है। सिर्फ टैक्स वसूली से मतलब रखने वाला नगर पालिका प्रशासन जर्जर भवनों को जान-माल के लिए खतरनाक तो मानता है, मगर आज तक उन्हें सूचीबद्ध नहीं कर पाया है। कई भवनों की हालत ऐसी है, जिसे देखकर ही डर लगता है। उनकी छत और बरामदे की ईंट टूटकर नीचे गिर रही हैं। दीवारें फट चुकी हैं। कई का एक सिरा खंडहर हो चुका है। ऐसे भवन कभी भी धराशायी हो सकते हैं। बावजूद इससे बेफिक्र होकर निहित स्वार्थों में कुछ लोग इन्हें ही ठिकाना बनाए हुए है।
जर्जन भवनों के नीचे किसी ने दुकान खोल रखी है तो कोई जर्जर हिस्से को ढककर उसमें रह रहा है। शहर के पुरानी जेल का भवन भी कुछ ऐसी ही कहानी कह रहा है। वहीं पहले जिला पूर्ति कार्यालय का भवन भी दुर्घटना को दावत दे रहा है। हालांकि जिला प्रशासन ने पिछले वर्ष कलेक्ट्रेट परिसर स्थित जर्जर भवनों को ढहाया लेकिन इसे ढहाना भूल गया। जबकि नगरपालिका ईओ का दावा है कि जर्जर भवनों के चिन्हांकन का कार्य शुरू कर दिया गया है। लेकिन अब तक कितने चिन्हित हुए इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
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जर्जर स्कूलों के भवन भी अभी तक नहीं गए ढहाए
आवासीय भवन तो दूर अभी तक जनपद के जर्जर स्कूली भवनों को भी नहीं ढहाया गया है। होबर्ट स्कूल में नए विद्यालय भवन का निर्माण तो करा दिया गया लेकिन पुराने भवन को उसी तरह से छोड़ दिया गया है। जो कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकता है। जनपद में लगभग 81 विद्यालयों में जर्जर भवन हैं जिन्हें ढहाया नहीं गया है।
क्या कहता है नियम
नियमानुसार नगर पालिका सर्वे कराकर अपनी सीमा में स्थित जर्जर व खतरनाक भवनों को चिह्नित कर उन्हें जमींदोज कराने के लिए भवन स्वामी को नोटिस दे सकता है। नोटिस देने के बाद भी भवन स्वामी स्वेच्छा से निर्माण नहीं ढहाता है तो पालिका प्रशासन उसे गिराकर खर्च वसूल करेगा। अगर भवन स्वामी नए मकान निर्माण में सक्षम नहीं है तो अब प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरी क्षेत्र में जमीन होने पर नए निर्माण के लिए अनुदान भी सरकार की ओर से दिया जा रहा है।
बरसात से पहले जर्जर भवनों के चिन्हांकन का कार्य शुरू कर दिया गया है। लेकिन अभी तक कितने भवन चिन्हित किए गए हैं। इस संबंध में जानकारी नहीं है। संबंधित पटल से ही बात करके बात पाऊंगा।
मनोज कुमार, ईओ नगरपालिका आजमगढ़।
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लगभग 20 हजार भवन नगर पालिका की सीमा में स्थित हैं। पालिका प्रशासन इनसे गृहकर व जलकर भी वसूल करता है। सिर्फ टैक्स वसूली से मतलब रखने वाला नगर पालिका प्रशासन जर्जर भवनों को जान-माल के लिए खतरनाक तो मानता है, मगर आज तक उन्हें सूचीबद्ध नहीं कर पाया है। कई भवनों की हालत ऐसी है, जिसे देखकर ही डर लगता है। उनकी छत और बरामदे की ईंट टूटकर नीचे गिर रही हैं। दीवारें फट चुकी हैं। कई का एक सिरा खंडहर हो चुका है। ऐसे भवन कभी भी धराशायी हो सकते हैं। बावजूद इससे बेफिक्र होकर निहित स्वार्थों में कुछ लोग इन्हें ही ठिकाना बनाए हुए है।
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जर्जन भवनों के नीचे किसी ने दुकान खोल रखी है तो कोई जर्जर हिस्से को ढककर उसमें रह रहा है। शहर के पुरानी जेल का भवन भी कुछ ऐसी ही कहानी कह रहा है। वहीं पहले जिला पूर्ति कार्यालय का भवन भी दुर्घटना को दावत दे रहा है। हालांकि जिला प्रशासन ने पिछले वर्ष कलेक्ट्रेट परिसर स्थित जर्जर भवनों को ढहाया लेकिन इसे ढहाना भूल गया। जबकि नगरपालिका ईओ का दावा है कि जर्जर भवनों के चिन्हांकन का कार्य शुरू कर दिया गया है। लेकिन अब तक कितने चिन्हित हुए इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
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जर्जर स्कूलों के भवन भी अभी तक नहीं गए ढहाए
आवासीय भवन तो दूर अभी तक जनपद के जर्जर स्कूली भवनों को भी नहीं ढहाया गया है। होबर्ट स्कूल में नए विद्यालय भवन का निर्माण तो करा दिया गया लेकिन पुराने भवन को उसी तरह से छोड़ दिया गया है। जो कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकता है। जनपद में लगभग 81 विद्यालयों में जर्जर भवन हैं जिन्हें ढहाया नहीं गया है।
क्या कहता है नियम
नियमानुसार नगर पालिका सर्वे कराकर अपनी सीमा में स्थित जर्जर व खतरनाक भवनों को चिह्नित कर उन्हें जमींदोज कराने के लिए भवन स्वामी को नोटिस दे सकता है। नोटिस देने के बाद भी भवन स्वामी स्वेच्छा से निर्माण नहीं ढहाता है तो पालिका प्रशासन उसे गिराकर खर्च वसूल करेगा। अगर भवन स्वामी नए मकान निर्माण में सक्षम नहीं है तो अब प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरी क्षेत्र में जमीन होने पर नए निर्माण के लिए अनुदान भी सरकार की ओर से दिया जा रहा है।
बरसात से पहले जर्जर भवनों के चिन्हांकन का कार्य शुरू कर दिया गया है। लेकिन अभी तक कितने भवन चिन्हित किए गए हैं। इस संबंध में जानकारी नहीं है। संबंधित पटल से ही बात करके बात पाऊंगा।
मनोज कुमार, ईओ नगरपालिका आजमगढ़।