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Azamgarh News: इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर विस्फोट विशेषज्ञ के रूप में काम करता था आतंकी शादाब बेग
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आजमगढ़। दिल्ली में हुए बम धमाके के बाद आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) की जांच में एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का खुलासा में जुटी है। इस मॉड्यूल में शामिल डॉक्टरों के नेटवर्क के अतिरिक्त अब एटीएस की नजर उन युवकों और सहयोगियों पर भी है, जो कथित तौर पर उनके ‘बी-टीम’ का हिस्सा थे। इसी सिलसिले में आजमगढ़ जिले के मिर्जा शादाब बेग का नाम भी चर्चा में आया है। शादाब बेग 2008 में जयपुर में हुए सीरियल ब्लास्ट सहित कई आतंकी घटनाओं में शामिल था। वह आईएम के लिए विस्फोटक विशेषज्ञ के रूप में कार्य करता था।
जानकारी के मुताबिक सात भाई-बहनों में सबसे बड़ा मिर्जा शादाब बेग है। जबकि चार अन्य भाई मिर्जा शाहबाज बेग, मिर्जा आदिल बेग, मिर्जा शारीफ और आतिफ बेग हैं। मिर्जा शारीफ और आतिफ जुड़वा भाई हैं। यह दोनों भाई आजमगढ़ में ही दुकान करते हैं। जबकि आदिल लखनऊ में रहता है। शाहबाज दिल्ली में रहता है। दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है।
मिर्जा शादाब बेग वर्ष 2003 में अल–फलाह यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने गया था। बीटेक के फाइनल सेमेस्टर में शादाब की एचसीएल कंपनी में नौकरी लगी थी। फिर कुछ दिन बाद दुबई की एहतेसुलाद कंपनी में भी जॉब लग गई थी। दुबई की नौकरी के लिए शादाब ने एचसीएल में जॉब छोड़ दी।
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दुबई में ज्वॉइनिंग के लिए उसे पांच अक्तूबर 2008 को फ्लाइट से दुबई जाना था। इस बीच, 19 सितंबर 2008 को घर आने की बात कह कर निकला था। उसके बाद से लापता हो गया था। तब से लेकर आज तक उसका कहीं कोई पता नहीं चला।
मिर्जा शादाब बेग
इलेक्ट्रॉनिक्स व इंस्ट्रूमेंटेशन में किया था बीटेक
आजमगढ़। इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) का आतंकी और आजमगढ़ शहर कोतवाली कोट मोहल्ला निवासी मिर्जा शादाब बेग फरीदाबाद स्थित अल-फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रॉनिक्स व इंस्ट्रूमेंटेशन में बीटेक कर चुका है।
बटला हाउस कांड के बाद से चल रहा फरार
19 सितंबर 2008 को बटला हाउस मुठभेड़ के बाद से शादाब बेग फरार है और सुरक्षा एजेंसियां उसकी तलाश कर रही हैं। जांच में यह संदेह भी गहरा हो गया है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े संस्थानों में आतंकी संगठनों का नेटवर्क पहले से सक्रिय रहा हो सकता है। इसी प्रकार 2007 के गोरखपुर सीरियल बम धमाकों के मामले में भी उसका नाम सामने आ चुका है, जिसके बाद यूपी पुलिस ने उसकी संपत्तियां जब्त कर ली थीं।
2008 जयपुर ब्लास्ट में की विस्फोटकों की सप्लाई
आजमगढ़। मिर्जा शादाब बेग, इंडियन मुजाहिदीन के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण सदस्य था। जांच में सामने आया था कि 2008 के जयपुर धमाकों में विस्फोटक इकट्ठा करने के लिए वह उडुपी गया था। वहीं पर उसने रियाज और यासीन भटकल को बड़ी मात्रा में डेटोनेटर और बेयरिंग उपलब्ध कराए, जिनसे आईईडी तैयार किए गए। इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई के कारण शादाब बम बनाने की तकनीक में काफी माहिर माना जाता था।
अहमदाबाद-सूरत धमाकों में भी बड़ी भूमिका
आजमगढ़। अहमदाबाद धमाकों से करीब 15 दिन पहले शादाब वहां पहुंचा था और पूरे शहर की रेकी की थी। उसने तीन टीमों के साथ मिलकर धमाकों की प्लानिंग की और लॉजिस्टिक, आईईडी फिटिंग और बम तैयार करने का काम संभाला था।
दिल्ली ब्लास्ट की गूंज आजमगढ़ तक
आजमगढ़। दिल्ली में 10 नवंबर की शाम लाल किले के पास हुए धमाके की गूंज पूर्वांचल के आजमगढ़ तक महसूस की जा रही है। घटना के बाद जिले में लोग लगातार चर्चाएं करते नजर आए, जबकि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस व खुफिया एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट दिखाई दे रही हैं। इतिहास पर नजर डालें तो 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट, 1997 में गुलशन कुमार हत्याकांड में ‘मेड इन बम्हौर’ मार्किंग वाले हथियार सामने आना, 2006-07 में वाराणसी, गोरखपुर, लखनऊ और फैजाबाद कचहरी ब्लास्ट, 2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट और इसके बाद अनेक आतंकी घटनाओं में आजमगढ़ के कुछ व्यक्तियों के नाम सामने आने के कारण हर बड़ी वारदात के बाद जिले की सुरक्षा पर फोकस बढ़ जाता है।
मुंबई सीरियल ब्लास्ट में अबू सलेम का आजमगढ़ कनेक्शन
आजमगढ़। देश को हिला देने वाले 12 मार्च 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट में आजमगढ़ का नाम भी जुड़ा था। इस आतंकी हमले के प्रमुख आरोपियों में शामिल गैंगस्टर अबू सलेम मूल रूप से आजमगढ़ जनपद के सरायमीर क्षेत्र का रहने वाला है। अबू सलेम का नाम अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के खास गुर्गों में शामिल रहा है। बताया जाता है कि ब्लास्ट की साजिश और हथियारों की सप्लाई में उसकी अहम भूमिका रही थी। विशेष बात यह भी है कि दाऊद इब्राहिम के भाई मुस्तकीम की ससुराल भी आजमगढ़ के मेंहनगर इलाके में है, जिससे जिले का कनेक्शन एक बार फिर सुर्खियों में आया था।
‘मेड इन बम्हौर’ की पिस्टल से हुई थी गुलशन कुमार की हत्या
आजमगढ़। 12 अगस्त 1997 को मुंबई के जुहू इलाके में टी-सीरीज कंपनी के मालिक और ‘कैसेट किंग’ गुलशन कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज हत्या में इस्तेमाल हुई पिस्तौल पर ‘मेड इन बम्हौर’ लिखा मिला, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को चौका दिया। जांच के दौरान पता चला कि आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर थाना क्षेत्र में बम्हौर नाम का एक गांव है, जहां उस समय अवैध असलहे बनाए जाने की चर्चा आम थी। हथियारों की इस कड़ी ने गुलशन कुमार हत्याकांड में आजमगढ़ का नाम एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया था।
लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद कचहरी ब्लास्ट में भी जुड़ा जिले का नाम
आजमगढ़। 23 नवंबर 2007 को लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद की कचहरियों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों ने पूरे प्रदेश को दहला दिया था। इन घटनाओं में आजमगढ़ के कई नाम सामने आए, जिनमें सलीम, इमरान, हुजी संगठन से जुड़े लोग और मौलाना तारिक कासमी प्रमुख रहे। बताया जाता है कि तारिक कासमी का संबंध आजमगढ़ से था और वह गोरखपुर में हुए सीरियल ब्लास्ट में भी शामिल पाया गया था। न्यायालय ने सुनवाई के बाद तारिक कासमी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
वाराणसी और गोरखपुर ब्लास्ट के बाद आजमगढ़ में मिलीं लावारिस कारें
आजमगढ़। वर्ष 2006 में वाराणसी के संकट मोचन हनुमान मंदिर और कैंट स्टेशन पर हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद आजमगढ़ एक बार फिर जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गया था। धमाकों के तुरंत बाद आजमगढ़ रेलवे स्टेशन परिसर से एक लावारिस कार बरामद हुई थी, जिसमें शराब की बोतलें भी मिलीं। इसके एक वर्ष बाद, 2007 में गोरखपुर में हुए सीरियल ब्लास्ट के बाद भी आजमगढ़ के रैदोपुर कॉलोनी क्षेत्र से एक और लावारिस कार बरामद की गई।
अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट का मास्टरमाइंड था अबू बशर
आजमगढ़। 26 जुलाई 2008 को गुजरात के अहमदाबाद शहर में हुए सिलसिलेवार धमाकों ने पूरे देश को दहला दिया था। इस हमले में 56 लोगों की मौत हुई थी जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। जांच आगे बढ़ी तो एक बार फिर आजमगढ़ का नाम सामने आया। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस हमले का मास्टरमाइंड आजमगढ़ जनपद के सरायमीर क्षेत्र के बीनापार निवासी अबू बशर था। उसके साथ जिले के ही कई अन्य युवकों के नाम भी इस आतंकी साजिश में उजागर हुए थे। इनमें संजरपुर के मोहम्मद आरिफ, बाज बहादुर के मोहम्मद सैफ, कंधरापुर क्षेत्र के शाहपुर निवासी शकीब निसार, बदरका चौकी के शैफुर रहमान और जीशान शामिल रहे।
बाटला हाउस एनकाउंटर में भी भी आजमगढ़ के युवकों के नाम आए सामने
आजमगढ़। राजधानी दिल्ली के जामियानगर स्थित बाटला हाउस में वर्ष 2008 में हुई पुलिस मुठभेड़ ने देशभर में सनसनी फैला दी थी। इंडियन मुजाहिदीन के आतंकियों से हुई इस मुठभेड़ में दो आतंकी आतिफ अमीन और मोहम्मद साजिद मारे गए थे, जबकि मोहम्मद जीशान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। वहीं, शहजाद मोहम्मद उर्फ पप्पू और आरिज खान उर्फ जुनैद मौके से भागने में सफल रहे थे। जांच में सामने आया कि इन आतंकियों के तार सरायमीर थाना क्षेत्र के संजरपुर गांव से जुड़े थे। यहां के डॉ. शहनवाज, शादाब उर्फ बड़ा साजिद उर्फ जुनैद चिकना, राशिद उर्फ सुल्तान, आसिफ और आफताब के नाम भी सामने आए। एनआईए ने इन सभी पर 10-10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। इन पर बाटला हाउस मुठभेड़ के साथ-साथ वाराणसी, गोरखपुर, दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में भी शामिल होने के आरोप थे।
लखनऊ में दो आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद जुड़े थे आजमगढ़ के तार
आजमगढ़। 2021 में लखनऊ में दो आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद आजमगढ़ का नाम एक बार फिर सुर्खियों में था। दोनों के ही कनेक्शन आजमगढ़ से बताए गए थे। इसके पीछे की अहम वजह यह भी थी कि सरायमीर, संजरपुर, नसीरपुर और मुबारकपुर जैसे इलाकों के कुछ युवाओं का आज भी पता नहीं है कि वह कहां हैं। उनके बारे में अकसर सुनने को यही मिलता है कि वह देश विरोधी ताकतों के साथ आतंकी प्रशिक्षण लेने के साथ ही दहशतगर्दी की राह चुनकर आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त हैं।
आतंकी सबाउद्दीन की हुई थी गिरफ्तारी
आजमगढ़। यूपी एटीएस ने अगस्त 2022 में आजमगढ़ के मुबारकपुर में छापेमारी कर आईएसआईएस आतंकी सबाउद्दीन आजमी को गिरफ्तार किया था। सबाउद्दीन की साजिश स्वतंत्रता दिवस के पहले धमाके की थी। सबाउद्दीन आईएसआईएस के रिक्रूटर से सीधे संपर्क में था। एटीएस ने उससे आईईडी बनाने का सामान भी बरामद किया है। आईईडी इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस होती है। इसे कई तरीकों से सक्रिय किया जा सकता है। सबाउद्दीन को आईईडी बनाने की विधि व आवश्यक सामग्री बताई गई थीं। इसके साथ ही सबाउद्दीन का संपर्क आईएसआईएस रिक्रूटर अबू उमर से था। अबू उमर ने सोशल मीडिया से हैंड ग्रेनेड, बम व आईईडी बनाने की ट्रेनिंग दी। मुजाहिदीन संगठन तैयार कर भारत में इस्लामिक स्टेट स्थापित करने की प्लानिंग पर काम कर रहा था। सबाउद्दीन का आतंकी संगठन आईएसआईएस के साथ पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से कनेक्शन था। सबाउद्दीन ने बम बनाने की ट्रेनिंग सोशल मीडिया से ली थी। उसके वॉट्सएप ग्रुप में 20 से ज्यादा विदेशी संगठनों से बातचीत सामने आई थी।
दिल्ली ब्लास्ट से आजमगढ़ का कोई लिंक है कि नहीं इसका कोई इनपुट ऊपर से नहीं मिला है। जहां तक रही बात निगरानी की तो पुलिस की ओर से सभी अपराधियों की निगरानी की जाती है। यह पुलिस की रूटीन प्रक्रिया है। फिलहाल अभी तक ब्लास्ट से आजमगढ़ का कोई लिंक जुड़ने की सूचना मुझे नहीं मिली है। - सुनील कुमार सिंह, डीआईजी आजमगढ़।
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जानकारी के मुताबिक सात भाई-बहनों में सबसे बड़ा मिर्जा शादाब बेग है। जबकि चार अन्य भाई मिर्जा शाहबाज बेग, मिर्जा आदिल बेग, मिर्जा शारीफ और आतिफ बेग हैं। मिर्जा शारीफ और आतिफ जुड़वा भाई हैं। यह दोनों भाई आजमगढ़ में ही दुकान करते हैं। जबकि आदिल लखनऊ में रहता है। शाहबाज दिल्ली में रहता है। दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है।
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मिर्जा शादाब बेग वर्ष 2003 में अल–फलाह यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने गया था। बीटेक के फाइनल सेमेस्टर में शादाब की एचसीएल कंपनी में नौकरी लगी थी। फिर कुछ दिन बाद दुबई की एहतेसुलाद कंपनी में भी जॉब लग गई थी। दुबई की नौकरी के लिए शादाब ने एचसीएल में जॉब छोड़ दी।
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दुबई में ज्वॉइनिंग के लिए उसे पांच अक्तूबर 2008 को फ्लाइट से दुबई जाना था। इस बीच, 19 सितंबर 2008 को घर आने की बात कह कर निकला था। उसके बाद से लापता हो गया था। तब से लेकर आज तक उसका कहीं कोई पता नहीं चला।
मिर्जा शादाब बेग
इलेक्ट्रॉनिक्स व इंस्ट्रूमेंटेशन में किया था बीटेक
आजमगढ़। इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) का आतंकी और आजमगढ़ शहर कोतवाली कोट मोहल्ला निवासी मिर्जा शादाब बेग फरीदाबाद स्थित अल-फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रॉनिक्स व इंस्ट्रूमेंटेशन में बीटेक कर चुका है।
बटला हाउस कांड के बाद से चल रहा फरार
19 सितंबर 2008 को बटला हाउस मुठभेड़ के बाद से शादाब बेग फरार है और सुरक्षा एजेंसियां उसकी तलाश कर रही हैं। जांच में यह संदेह भी गहरा हो गया है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े संस्थानों में आतंकी संगठनों का नेटवर्क पहले से सक्रिय रहा हो सकता है। इसी प्रकार 2007 के गोरखपुर सीरियल बम धमाकों के मामले में भी उसका नाम सामने आ चुका है, जिसके बाद यूपी पुलिस ने उसकी संपत्तियां जब्त कर ली थीं।
2008 जयपुर ब्लास्ट में की विस्फोटकों की सप्लाई
आजमगढ़। मिर्जा शादाब बेग, इंडियन मुजाहिदीन के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण सदस्य था। जांच में सामने आया था कि 2008 के जयपुर धमाकों में विस्फोटक इकट्ठा करने के लिए वह उडुपी गया था। वहीं पर उसने रियाज और यासीन भटकल को बड़ी मात्रा में डेटोनेटर और बेयरिंग उपलब्ध कराए, जिनसे आईईडी तैयार किए गए। इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई के कारण शादाब बम बनाने की तकनीक में काफी माहिर माना जाता था।
अहमदाबाद-सूरत धमाकों में भी बड़ी भूमिका
आजमगढ़। अहमदाबाद धमाकों से करीब 15 दिन पहले शादाब वहां पहुंचा था और पूरे शहर की रेकी की थी। उसने तीन टीमों के साथ मिलकर धमाकों की प्लानिंग की और लॉजिस्टिक, आईईडी फिटिंग और बम तैयार करने का काम संभाला था।
दिल्ली ब्लास्ट की गूंज आजमगढ़ तक
आजमगढ़। दिल्ली में 10 नवंबर की शाम लाल किले के पास हुए धमाके की गूंज पूर्वांचल के आजमगढ़ तक महसूस की जा रही है। घटना के बाद जिले में लोग लगातार चर्चाएं करते नजर आए, जबकि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस व खुफिया एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट दिखाई दे रही हैं। इतिहास पर नजर डालें तो 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट, 1997 में गुलशन कुमार हत्याकांड में ‘मेड इन बम्हौर’ मार्किंग वाले हथियार सामने आना, 2006-07 में वाराणसी, गोरखपुर, लखनऊ और फैजाबाद कचहरी ब्लास्ट, 2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट और इसके बाद अनेक आतंकी घटनाओं में आजमगढ़ के कुछ व्यक्तियों के नाम सामने आने के कारण हर बड़ी वारदात के बाद जिले की सुरक्षा पर फोकस बढ़ जाता है।
मुंबई सीरियल ब्लास्ट में अबू सलेम का आजमगढ़ कनेक्शन
आजमगढ़। देश को हिला देने वाले 12 मार्च 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट में आजमगढ़ का नाम भी जुड़ा था। इस आतंकी हमले के प्रमुख आरोपियों में शामिल गैंगस्टर अबू सलेम मूल रूप से आजमगढ़ जनपद के सरायमीर क्षेत्र का रहने वाला है। अबू सलेम का नाम अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के खास गुर्गों में शामिल रहा है। बताया जाता है कि ब्लास्ट की साजिश और हथियारों की सप्लाई में उसकी अहम भूमिका रही थी। विशेष बात यह भी है कि दाऊद इब्राहिम के भाई मुस्तकीम की ससुराल भी आजमगढ़ के मेंहनगर इलाके में है, जिससे जिले का कनेक्शन एक बार फिर सुर्खियों में आया था।
‘मेड इन बम्हौर’ की पिस्टल से हुई थी गुलशन कुमार की हत्या
आजमगढ़। 12 अगस्त 1997 को मुंबई के जुहू इलाके में टी-सीरीज कंपनी के मालिक और ‘कैसेट किंग’ गुलशन कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज हत्या में इस्तेमाल हुई पिस्तौल पर ‘मेड इन बम्हौर’ लिखा मिला, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को चौका दिया। जांच के दौरान पता चला कि आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर थाना क्षेत्र में बम्हौर नाम का एक गांव है, जहां उस समय अवैध असलहे बनाए जाने की चर्चा आम थी। हथियारों की इस कड़ी ने गुलशन कुमार हत्याकांड में आजमगढ़ का नाम एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया था।
लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद कचहरी ब्लास्ट में भी जुड़ा जिले का नाम
आजमगढ़। 23 नवंबर 2007 को लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद की कचहरियों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों ने पूरे प्रदेश को दहला दिया था। इन घटनाओं में आजमगढ़ के कई नाम सामने आए, जिनमें सलीम, इमरान, हुजी संगठन से जुड़े लोग और मौलाना तारिक कासमी प्रमुख रहे। बताया जाता है कि तारिक कासमी का संबंध आजमगढ़ से था और वह गोरखपुर में हुए सीरियल ब्लास्ट में भी शामिल पाया गया था। न्यायालय ने सुनवाई के बाद तारिक कासमी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
वाराणसी और गोरखपुर ब्लास्ट के बाद आजमगढ़ में मिलीं लावारिस कारें
आजमगढ़। वर्ष 2006 में वाराणसी के संकट मोचन हनुमान मंदिर और कैंट स्टेशन पर हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद आजमगढ़ एक बार फिर जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गया था। धमाकों के तुरंत बाद आजमगढ़ रेलवे स्टेशन परिसर से एक लावारिस कार बरामद हुई थी, जिसमें शराब की बोतलें भी मिलीं। इसके एक वर्ष बाद, 2007 में गोरखपुर में हुए सीरियल ब्लास्ट के बाद भी आजमगढ़ के रैदोपुर कॉलोनी क्षेत्र से एक और लावारिस कार बरामद की गई।
अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट का मास्टरमाइंड था अबू बशर
आजमगढ़। 26 जुलाई 2008 को गुजरात के अहमदाबाद शहर में हुए सिलसिलेवार धमाकों ने पूरे देश को दहला दिया था। इस हमले में 56 लोगों की मौत हुई थी जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। जांच आगे बढ़ी तो एक बार फिर आजमगढ़ का नाम सामने आया। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस हमले का मास्टरमाइंड आजमगढ़ जनपद के सरायमीर क्षेत्र के बीनापार निवासी अबू बशर था। उसके साथ जिले के ही कई अन्य युवकों के नाम भी इस आतंकी साजिश में उजागर हुए थे। इनमें संजरपुर के मोहम्मद आरिफ, बाज बहादुर के मोहम्मद सैफ, कंधरापुर क्षेत्र के शाहपुर निवासी शकीब निसार, बदरका चौकी के शैफुर रहमान और जीशान शामिल रहे।
बाटला हाउस एनकाउंटर में भी भी आजमगढ़ के युवकों के नाम आए सामने
आजमगढ़। राजधानी दिल्ली के जामियानगर स्थित बाटला हाउस में वर्ष 2008 में हुई पुलिस मुठभेड़ ने देशभर में सनसनी फैला दी थी। इंडियन मुजाहिदीन के आतंकियों से हुई इस मुठभेड़ में दो आतंकी आतिफ अमीन और मोहम्मद साजिद मारे गए थे, जबकि मोहम्मद जीशान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। वहीं, शहजाद मोहम्मद उर्फ पप्पू और आरिज खान उर्फ जुनैद मौके से भागने में सफल रहे थे। जांच में सामने आया कि इन आतंकियों के तार सरायमीर थाना क्षेत्र के संजरपुर गांव से जुड़े थे। यहां के डॉ. शहनवाज, शादाब उर्फ बड़ा साजिद उर्फ जुनैद चिकना, राशिद उर्फ सुल्तान, आसिफ और आफताब के नाम भी सामने आए। एनआईए ने इन सभी पर 10-10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। इन पर बाटला हाउस मुठभेड़ के साथ-साथ वाराणसी, गोरखपुर, दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में भी शामिल होने के आरोप थे।
लखनऊ में दो आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद जुड़े थे आजमगढ़ के तार
आजमगढ़। 2021 में लखनऊ में दो आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद आजमगढ़ का नाम एक बार फिर सुर्खियों में था। दोनों के ही कनेक्शन आजमगढ़ से बताए गए थे। इसके पीछे की अहम वजह यह भी थी कि सरायमीर, संजरपुर, नसीरपुर और मुबारकपुर जैसे इलाकों के कुछ युवाओं का आज भी पता नहीं है कि वह कहां हैं। उनके बारे में अकसर सुनने को यही मिलता है कि वह देश विरोधी ताकतों के साथ आतंकी प्रशिक्षण लेने के साथ ही दहशतगर्दी की राह चुनकर आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त हैं।
आतंकी सबाउद्दीन की हुई थी गिरफ्तारी
आजमगढ़। यूपी एटीएस ने अगस्त 2022 में आजमगढ़ के मुबारकपुर में छापेमारी कर आईएसआईएस आतंकी सबाउद्दीन आजमी को गिरफ्तार किया था। सबाउद्दीन की साजिश स्वतंत्रता दिवस के पहले धमाके की थी। सबाउद्दीन आईएसआईएस के रिक्रूटर से सीधे संपर्क में था। एटीएस ने उससे आईईडी बनाने का सामान भी बरामद किया है। आईईडी इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस होती है। इसे कई तरीकों से सक्रिय किया जा सकता है। सबाउद्दीन को आईईडी बनाने की विधि व आवश्यक सामग्री बताई गई थीं। इसके साथ ही सबाउद्दीन का संपर्क आईएसआईएस रिक्रूटर अबू उमर से था। अबू उमर ने सोशल मीडिया से हैंड ग्रेनेड, बम व आईईडी बनाने की ट्रेनिंग दी। मुजाहिदीन संगठन तैयार कर भारत में इस्लामिक स्टेट स्थापित करने की प्लानिंग पर काम कर रहा था। सबाउद्दीन का आतंकी संगठन आईएसआईएस के साथ पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से कनेक्शन था। सबाउद्दीन ने बम बनाने की ट्रेनिंग सोशल मीडिया से ली थी। उसके वॉट्सएप ग्रुप में 20 से ज्यादा विदेशी संगठनों से बातचीत सामने आई थी।
दिल्ली ब्लास्ट से आजमगढ़ का कोई लिंक है कि नहीं इसका कोई इनपुट ऊपर से नहीं मिला है। जहां तक रही बात निगरानी की तो पुलिस की ओर से सभी अपराधियों की निगरानी की जाती है। यह पुलिस की रूटीन प्रक्रिया है। फिलहाल अभी तक ब्लास्ट से आजमगढ़ का कोई लिंक जुड़ने की सूचना मुझे नहीं मिली है। - सुनील कुमार सिंह, डीआईजी आजमगढ़।