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Azamgarh News: पश्चिमी यूपी में लंपी की दस्तक, जिले में पशुपालन विभाग सतर्क

Sun, 06 Sep 2026 01:43 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 06 Sep 2026 01:43 AM IST
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Lumpi attacks western UP, district animal husbandry department on alert
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पशुओं में लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) के मामले सामने आने के बाद जिले में भी पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। विभाग ने सभी पशु चिकित्साधिकारियों को सतर्क रहने और क्षेत्र में भ्रमण कर निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। पशुपालकों को भी मवेशियों में लंपी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल विभाग को सूचना देने को कहा गया है। एहतियात के तौर पर शासन से 2.20 लाख लंपी रोधी टीकों की मांग की गई है। जिले में पांच स्थायी और 79 अस्थायी समेत कुल 84 गोशालाएं हैं। इनमें करीब साढ़े आठ हजार गोवंश संरक्षित हैं। इसके अलावा 2.12 लाख गोवंश पशुपालकों के पास हैं। सीवीओ डॉ. मुकेश गुप्ता ने बताया कि लंपी एक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित पशु के संपर्क में आने से फैलती है। इसमें गोवंश के शरीर पर गांठें पड़ने के साथ तेज बुखार आता है और दूध उत्पादन कम हो जाता है। समय पर उपचार न मिलने पर पशु की मौत भी हो सकती है।
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पशुपालन विभाग के अनुसार, अभी तक जिले में लंपी का कोई मामला सामने नहीं आया है। एहतियात के तौर पर सभी 22 ब्लॉकों के पशु चिकित्साधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें क्षेत्र में भ्रमण कर पशुओं की निगरानी करने को कहा गया है। किसी पशु में लंपी के लक्षण दिखाई देने पर उसे स्वस्थ पशुओं से अलग रखने और तत्काल नजदीकी पशु अस्पताल में संपर्क करने की सलाह दी गई है। गोशालाओं में साफ-सफाई रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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लंपी बीमारी के लक्षण
तेज बुखार होना
शरीर पर दाने या गांठें निकलना
आंख और नाक से पानी आना
दूध उत्पादन कम होना
पैरों में सूजन आना
कोट
अभी जिले में लंपी बीमारी का एक भी मामला नहीं मिला है। प्रदेश के सीमा वाले जिलों में बीमारी के मामले सामने आ रहे हैं। सतर्कता के तौर पर शासन से 2.20 लाख लंपी रोधी टीकों की मांग की गई है। - डॉ. मुकेश गुप्ता, सीवीओ, आजमगढ़।
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