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आनलाइन हो रही पढ़ाई फिर भी सता रही भविष्य की चिंता
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डाक्टर बनने की चाह लिए जनपद के 29 बच्चों ने यूक्रेन की राह पकड़ी। कम फीस में डाक्टर बनने की अभिलाषा पर उस समय ग्रहण लग गया जब रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण कर दिया। किसी तरह से जान बचाकर घर पहुंचे। परिवार के लोगों ने राहत की सांस ली। वहीं अब बच्चों के साथ ही अभिभावकों को भविष्य की चिंता सताने लगी है। क्योंकि यूक्रेन में तबाही का मंजर है और स्कूल-कालेज सब तबाह हो चुके हैं। बच्चों द्वारा आनलाइन पढ़ाई की जा रही है, लेकिन आगे क्या होगा इसे लेकर वह चिंतित हैं। वहीं अभिभावक बच्चों को दोबारा यूक्रेन भेजने को तैयार नहीं हैं।
निजामाद प्रतिनिधि के अनुसार तहसील क्षेत्र के सोफीपुर गांव के निवासी डा.गिरिजेश यादव के पुत्र अवनीश यादव और अमित यादव एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए यूक्रेन गए थे। चौथे साल पढ़ाई के समय अचानक रूस और यूक्रेन के युद्ध के दौरान उन्हें स्वदेश लौटना पड़ा। उनके पिता डा. गिरजेश यादव ने बताया कि दोनों बेटे ऑनलाइन पढ़ाई इस समय कर रहे हैं। लेकिन आगे की पढ़ाई की चिंता उन्हें सता रही है। लगभग 300000 रुपये देकर बच्चों का एडमिशन एमबीबीएस में कराया था। चौथे साल के सेमेस्टर की पढ़ाई चल रही थी अचानक युद्ध के दौरान पढ़ाई बाधित होने के नाते परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। युद्ध में यूक्रेन मैं सभी बिल्डिंग ध्वस्त कर दी गई हैं वहां पर आकर मचा हुआ है किस तरीके से बच्चों की पढ़ाई होगी आगे की चिंता सता रही है। बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है आगे कैसे पढ़ाई होगी इसकी चिंता बच्चों को सता रही है।
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निजामाद प्रतिनिधि के अनुसार तहसील क्षेत्र के सोफीपुर गांव के निवासी डा.गिरिजेश यादव के पुत्र अवनीश यादव और अमित यादव एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए यूक्रेन गए थे। चौथे साल पढ़ाई के समय अचानक रूस और यूक्रेन के युद्ध के दौरान उन्हें स्वदेश लौटना पड़ा। उनके पिता डा. गिरजेश यादव ने बताया कि दोनों बेटे ऑनलाइन पढ़ाई इस समय कर रहे हैं। लेकिन आगे की पढ़ाई की चिंता उन्हें सता रही है। लगभग 300000 रुपये देकर बच्चों का एडमिशन एमबीबीएस में कराया था। चौथे साल के सेमेस्टर की पढ़ाई चल रही थी अचानक युद्ध के दौरान पढ़ाई बाधित होने के नाते परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। युद्ध में यूक्रेन मैं सभी बिल्डिंग ध्वस्त कर दी गई हैं वहां पर आकर मचा हुआ है किस तरीके से बच्चों की पढ़ाई होगी आगे की चिंता सता रही है। बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है आगे कैसे पढ़ाई होगी इसकी चिंता बच्चों को सता रही है।
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