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दुष्कर्म पीड़िता से रिश्वत लेते सिपाही गिरफ्तार
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आजमगढ़। पुलिस अधीक्षक कार्यालय में तैनात एक सिपाही को एंटी करप्शन गोरखपुर की टीम ने शनिवार को कुंवर सिंह उद्यान से 20 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा। आरक्षी ने दुष्कर्म पीड़िता को अनुदान को दिलाने के एवज में 25 हजार रुपये मांगे थे।
जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली बालिका के साथ दुष्कर्म का मुकदमा जीयनपुर कोतवाली में दर्ज हुआ था। बालिका के अनुसूचित जाति के होने के कारण इस मामले में अनुदान मिलना था। अनुदान की ढाई लाख रुपये की पहली किस्त बालिका के खाते में आ गई थी। परिवार वालों ने दूसरी किस्त के लिए एसपी कार्यालय में आवेदन किया था। दूसरी किस्त भी भेजने के लिए पुलिस आफिस के विशेष जांच प्रकोष्ठ में तैनात आरक्षी दिलीप कुमार भारती ने 25 हजार रुपये की मांग की। बात 20 हजार रुपये में तय हो गई। दुष्कर्म पीड़िता का भाई ने एंटी करप्शन कार्यालय गोरखपुर में इसकी शिकायत की। तय योजना के अनुसार शनिवार को एंटी करप्शन टीम के प्रभारी रामाधार मिश्र के कहने पर शिकायतकर्ता ने सिपाही को कुंवर सिंह उद्यान में बुलाया। उसने जैसे ही पैसे दिए, एंटी करप्शन टीम के उसे पकड़ लिया। एंटी करप्शन टीम उसे लेकर शहर कोतवाली पहुंची, जहां भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया। सिपाही को गिरफ्तार कर लिया गया। एंटी करप्शन टीम में उदय प्रताप सिंह, चंद्रेश यादव, अशोक कुमार, चंद्रभान मिश्र, शैलेंद्र व नीरज मिश्रा शामिल है।
वसूली के लिए घर तक भेजा था आदमी
आजमगढ़। शिकायतकर्ता ने बताया कि सिपाही बार-बार फोन करके पैसे मांगता था और हद तो तब हो गई जब उसने पैसे के लिए अपना आदमी उसके घर तक भेज दिया। नहीं पैसा न देने पर दूसरी किस्त न जारी करने की धमकी दे रहा था। इससे परेशान हो कर ही उसने एंटी करप्शन टीम की मदद की।। शिकायतकर्ता ने बताया कि कुंवर सिंह उद्यान में आरोपी सिपाही के साथ उसका साथी नरेश मलिक भी मौजूद था, जो उसे धमकी दे रहा था। पुलिस आफिस के सिपाही की गिरफ्तारी ने पुष्ट कर दिया कि यहां भ्रष्टाचार का बोलबाला है। पुलिस आफिस में कई प्रकोष्ठ है, जहां लोगों को अपने जरूरी काम के लिए आना होता है और बिना पैसा लिए शायद ही यहां कोई काम होता हो। अ
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जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली बालिका के साथ दुष्कर्म का मुकदमा जीयनपुर कोतवाली में दर्ज हुआ था। बालिका के अनुसूचित जाति के होने के कारण इस मामले में अनुदान मिलना था। अनुदान की ढाई लाख रुपये की पहली किस्त बालिका के खाते में आ गई थी। परिवार वालों ने दूसरी किस्त के लिए एसपी कार्यालय में आवेदन किया था। दूसरी किस्त भी भेजने के लिए पुलिस आफिस के विशेष जांच प्रकोष्ठ में तैनात आरक्षी दिलीप कुमार भारती ने 25 हजार रुपये की मांग की। बात 20 हजार रुपये में तय हो गई। दुष्कर्म पीड़िता का भाई ने एंटी करप्शन कार्यालय गोरखपुर में इसकी शिकायत की। तय योजना के अनुसार शनिवार को एंटी करप्शन टीम के प्रभारी रामाधार मिश्र के कहने पर शिकायतकर्ता ने सिपाही को कुंवर सिंह उद्यान में बुलाया। उसने जैसे ही पैसे दिए, एंटी करप्शन टीम के उसे पकड़ लिया। एंटी करप्शन टीम उसे लेकर शहर कोतवाली पहुंची, जहां भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया। सिपाही को गिरफ्तार कर लिया गया। एंटी करप्शन टीम में उदय प्रताप सिंह, चंद्रेश यादव, अशोक कुमार, चंद्रभान मिश्र, शैलेंद्र व नीरज मिश्रा शामिल है।
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वसूली के लिए घर तक भेजा था आदमी
आजमगढ़। शिकायतकर्ता ने बताया कि सिपाही बार-बार फोन करके पैसे मांगता था और हद तो तब हो गई जब उसने पैसे के लिए अपना आदमी उसके घर तक भेज दिया। नहीं पैसा न देने पर दूसरी किस्त न जारी करने की धमकी दे रहा था। इससे परेशान हो कर ही उसने एंटी करप्शन टीम की मदद की।। शिकायतकर्ता ने बताया कि कुंवर सिंह उद्यान में आरोपी सिपाही के साथ उसका साथी नरेश मलिक भी मौजूद था, जो उसे धमकी दे रहा था। पुलिस आफिस के सिपाही की गिरफ्तारी ने पुष्ट कर दिया कि यहां भ्रष्टाचार का बोलबाला है। पुलिस आफिस में कई प्रकोष्ठ है, जहां लोगों को अपने जरूरी काम के लिए आना होता है और बिना पैसा लिए शायद ही यहां कोई काम होता हो। अ
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