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बहनों ने बांधा प्यार का धागा

Sun, 30 Aug 2015 12:24 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आजमगढ़
ब्यूरो अमर उजाला, आजमगढ़ Updated Sun, 30 Aug 2015 12:24 AM IST
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Sisters love fastened thread
भाई-बहनों के स्नेह का पर्व रक्षाबंधन जिले में शनिवार को परंपरागत रुप से मनाया गया। दिन भर बहनों ने व्रत रखा और मुर्हत का समय होते ही भाईयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा। वहीं भाइयों ने आजीवन बहनों की रक्षा का संकल्प लिया।
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 भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक रक्षा बंधन पर्व पर बहने सप्ताह भर पूर्व से ही तैयारी में जुट गई थी। ससुराल रह रहीं बहनों में अधिकतर कोरियर और डाक के जरिए पहले ही भाइयों को आकर्षक राखियां भेज चुकी थीं। शनिवार को शुभ मुर्हत दोपहर डेढ़ बजे होने के कारण पूरे दिन बहने बिना अन्न ग्रहण किए घर की साफ-सफाई के बाद भाईयों के लिए स्वादिष्ट पकवान बनाने में जुट गई।
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शुभ मुहूर्त से पूर्व ही थाली में सजी चमचमाती राखी, रोरी, अगरबत्ती, लड्डू लेकर भाई की कलाई में राखी बांधने पहुंच गईं। बहनों ने भाईयों की आरती उतारी। तिलक-चंदन लगाकर उनकी कलाईयों पर प्यार का धागा बांधा और उन्हें मिठाई खिलाई। वहीं भाईयों ने भी बहनों की रक्षा का संकल्प लिया। साथ ही बहनों को आकर्षक उपहार भेंट किया। भाई से उपहार पाकर बहनों के चेहरे खिल गए।
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मेजवां संवाददाता के अनुसार, भाई-बहन के प्यार का प्रतीक रक्षाबंधन क्षेत्र में हर्षोल्लास के साथ मनाया गयां। इस दौरान बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी कुशलता की कामना किया। न्यू आक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल में बच्चों ने खूब मस्ती किया। कार्यक्रम के दौरान स्कूल की प्रधानाचार्या वंदना चौरसिया ने बच्चों को पर्व की महत्ता बताई। उधर, रक्षाबंधन पर डाकघर खुले रहे और राखी की आई डाकों का वितरण किया गया।

उधर, ब्राह्मण समाज कल्याण परिषद के तत्वावधान में शनिवार को सनातन धर्म संस्कृत पाठशाला में रक्षाबंधन त्योहार के अवसर पर पूजन अर्चन किया गया। ब्राह्मण बटुकों को सूर्य प्रस्थान एवं तर्पण कराया गया। इस अवसर पर ब्राह्मण कल्याण परिषद के महामंत्री बृजेश नंदन पांडेय ने रक्षा बंधन(श्रावणी) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि    इंद्राणी ने इंद्र को सबसे पहले रक्षा सूत्र बांधे।


उन्होंने बताया कि जब देवताओं और दैत्यों के बीच युद्ध हुआ और देवताओं की शक्ति क्षीण होने लगी तब इद्राणी ने मंत्रोच्चार के साथ इंद्र को रक्षा सूत्र बांधा था जिसके कारण देवताओं ने युद्ध में विजय प्राप्त की। तारकेश्वर मिश्र ने कहा कि श्रावणी पूर्णिमा हमें प्रकृति का संदेश देती है। समय पर इसे हमेशा याद रखना होगा।

इस अवसर पर आनंद उपाध्याय, बृजेश मिश्र, सतीश मिह्यश्र, मनोज कुमार त्रिपाठी, विध्याचल उपाध्याय के साथ ही विद्यालय के काफी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।
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