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Azamgarh News: रिमोट सेंसिंग से वैज्ञानिक नवाचार के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव
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पल्हनी। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में मंगलवार को रिमोट सेंसिंग एंड जीआईएस फॉर ज्योग्राफिकल रिसर्च एंड एप्लीकेशन विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें देशभर से आए विद्वानों, शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार, मुख्य अतिथि प्रो. पृथ्वीश नाग और मुख्य वक्ता प्रो. सीमा तिवारी ने किया। कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि ऐसे आयोजन विश्वविद्यालय की प्रगति में मील का पत्थर साबित होंगे। रिमोट सेंसिंग और जीआईएस जैसी तकनीकें भौगोलिक अनुसंधान, डेटा संकलन और वैज्ञानिक नवाचार के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रही हैं। ये मानव जीवन और समाज के कल्याण के लिए उपयोगी हैं।
मुख्य अतिथि प्रो. पृथ्वीश नाग ने डेटा तकनीक, सैटेलाइट मानचित्र, डिजिटल एलिवेशन मॉडल और डेटा विजुअलाइजेशन जैसे विषयों पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों और शोधार्थियों के सवालों के जवाब भी दिए। वहीं, मुख्य वक्ता प्रो. सीमा तिवारी ने कहा कि रिमोट सेंसिंग और जीआईएस का उपयोग जनसंख्या वृद्धि, जलवायु परिवर्तन, कृषि और जल सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। यह एक उभरता हुआ और व्यापक क्षेत्र है।
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सम्मेलन में दो तकनीकी सत्र आयोजित हुए। इसमें काशी हिंदू विश्वविद्यालय के डॉ. राम भूषण तिवारी, डॉ. सर्वेश सिंह, डॉ. मनीष कुमार सिंह, डॉ. संदीप सिंह, डॉ. अंजू सिंह और प्रो. एसके सिंह ने विचार रखे। ऑनलाइन सत्र में 30 और ऑफलाइन सत्र में 45 शोधपत्रों का प्रस्तुतिकरण हुआ। समापन सत्र में प्रो. एसके सिंह विभागाध्यक्ष, दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, गोरखपुर ने कहा कि रिमोट सेंसिंग और जीआईएस के क्षेत्र में भविष्य में शोध और अध्ययन की अपार संभावनाएं हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ऋतंभरा और डॉ. दीपिका अग्रवाल ने किया। आभार ज्ञापन कुलसचिव विशेश्वर प्रसाद और प्रवक्ता भूगोल डॉ. शशि प्रकाश शुक्ला ने किया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार, मुख्य अतिथि प्रो. पृथ्वीश नाग और मुख्य वक्ता प्रो. सीमा तिवारी ने किया। कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि ऐसे आयोजन विश्वविद्यालय की प्रगति में मील का पत्थर साबित होंगे। रिमोट सेंसिंग और जीआईएस जैसी तकनीकें भौगोलिक अनुसंधान, डेटा संकलन और वैज्ञानिक नवाचार के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रही हैं। ये मानव जीवन और समाज के कल्याण के लिए उपयोगी हैं।
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मुख्य अतिथि प्रो. पृथ्वीश नाग ने डेटा तकनीक, सैटेलाइट मानचित्र, डिजिटल एलिवेशन मॉडल और डेटा विजुअलाइजेशन जैसे विषयों पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों और शोधार्थियों के सवालों के जवाब भी दिए। वहीं, मुख्य वक्ता प्रो. सीमा तिवारी ने कहा कि रिमोट सेंसिंग और जीआईएस का उपयोग जनसंख्या वृद्धि, जलवायु परिवर्तन, कृषि और जल सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। यह एक उभरता हुआ और व्यापक क्षेत्र है।
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सम्मेलन में दो तकनीकी सत्र आयोजित हुए। इसमें काशी हिंदू विश्वविद्यालय के डॉ. राम भूषण तिवारी, डॉ. सर्वेश सिंह, डॉ. मनीष कुमार सिंह, डॉ. संदीप सिंह, डॉ. अंजू सिंह और प्रो. एसके सिंह ने विचार रखे। ऑनलाइन सत्र में 30 और ऑफलाइन सत्र में 45 शोधपत्रों का प्रस्तुतिकरण हुआ। समापन सत्र में प्रो. एसके सिंह विभागाध्यक्ष, दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, गोरखपुर ने कहा कि रिमोट सेंसिंग और जीआईएस के क्षेत्र में भविष्य में शोध और अध्ययन की अपार संभावनाएं हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ऋतंभरा और डॉ. दीपिका अग्रवाल ने किया। आभार ज्ञापन कुलसचिव विशेश्वर प्रसाद और प्रवक्ता भूगोल डॉ. शशि प्रकाश शुक्ला ने किया।