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रशादी पर दर्ज मुकदमों का संज्ञान ले रही पुलिस
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Sat, 16 Dec 2017 12:15 AM IST
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उलेमा काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आमिर रशादी
- फोटो : facebook
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आजमगढ़। बहू की हत्या और लाश गायब करने का आरोप झेल रहे राष्ट्रीय ओलमा काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आमिर रशादी की बहू फौजिया के बिसरे की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। रिपोर्ट आने से पहले पुलिस कार्रवाई करने के लिए जहां तथ्य और सबूत जुटा रही है, वहीं आमिर रशादी के विरुद्ध पूर्व में दर्ज मुकदमों का भी संज्ञान लिया जा रहा।
उधर दूसरी ओर मामला हाईप्रोफाइल और राजनीतिक व्यक्ति से जुड़ा होने की वजह से इसे दबाने का भी दवाब बनाया जा रहा है।
वर्ष 2008 में दिल्ली के बाटला एनकाउंटर के बाद देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त युवकों को बेगुनाह बताते हुए उनके हक की लड़ाई लड़ने के लिए वर्ष 2009 में आमिर रशादी की अध्यक्षता में ओलमा काउंसिल का गठन हुआ।
इसे बाद में राष्ट्रीय ओलमा काउंसिल बना दिया गया। ओलमा काउंसिल के लोगों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन किया। समय के साथ-साथ विरोध प्रदर्शन तो जारी रहा, लेकिन उसकी रफ्तार धीमी पड़ गई।
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भड़काऊ भाषण के चलते रशादी पर आजमगढ़, कानपुर आदि जिलों में कई संगीन धाराओं में केस दर्ज कराया गया। इसमें राष्ट्रद्रोह तक की धाराएं शामिल है। हालांकि राजनीतिक दवाब के चलते पुलिस इन्हें पकड़ने की हिम्मत नहीं उठा पाई।
इसी बीच 22 नवंबर 2017 को सरायमीर थाना क्षेत्र के संजरपुर गांव निवासी हामीद संजरी ने शहर कोतवाली में आमिर रशादी, उनके भाई हम्मान सहित तीन लोगों के विरुद्ध बहू फौजिया की हत्या और सबूत नष्ट करने की धारा में केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू की।
चार दिसंबर को फौजिया का पीएम कराकर जिला अस्पताल से घर लौट रहे परिजनों पर हर्रा की चुंगी मुहल्ले में पथराव होने लगा। बीच बचाव करने में पुलिस की गाड़ी भी टूट गई।
पत्थरबाजी और जानलेवा हमला होने के संबंध में चौकी प्रभारी पहाड़पुर धर्मेंद्र कुमार और फौजिया के मायके वालों की तरफ से आमिर रशादी, उनके बेटे सहित पांच लोगों के विरुद्ध हत्या का प्रयास, मारपीट और पथराव करने की धारा में भी केस दर्ज किया है।
तभी से पुलिस का सिकंजा इन पर कसते जा राि। पुलिस सूत्रों की मानें तो कुछ दिग्गज राजनीतिज्ञ इसे दबाने का दवाब बना रहे। लेकिन पुलिस पर उनका कोई असर नहीं।
ओलमा काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आमिर रशादी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के लिए इनके खिलाफ पूर्व में दर्ज मुकदमे का भी संज्ञान लिया जा रहा। पुलिस संबंधित थाना और कोर्ट के भी रिकार्ड खंगालते हुए स्थिति का पता कर रही है। - अजय कुमार साहनी, पुलिस अधीक्षक, आजमगढ़
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उधर दूसरी ओर मामला हाईप्रोफाइल और राजनीतिक व्यक्ति से जुड़ा होने की वजह से इसे दबाने का भी दवाब बनाया जा रहा है।
वर्ष 2008 में दिल्ली के बाटला एनकाउंटर के बाद देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त युवकों को बेगुनाह बताते हुए उनके हक की लड़ाई लड़ने के लिए वर्ष 2009 में आमिर रशादी की अध्यक्षता में ओलमा काउंसिल का गठन हुआ।
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इसे बाद में राष्ट्रीय ओलमा काउंसिल बना दिया गया। ओलमा काउंसिल के लोगों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन किया। समय के साथ-साथ विरोध प्रदर्शन तो जारी रहा, लेकिन उसकी रफ्तार धीमी पड़ गई।
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भड़काऊ भाषण के चलते रशादी पर आजमगढ़, कानपुर आदि जिलों में कई संगीन धाराओं में केस दर्ज कराया गया। इसमें राष्ट्रद्रोह तक की धाराएं शामिल है। हालांकि राजनीतिक दवाब के चलते पुलिस इन्हें पकड़ने की हिम्मत नहीं उठा पाई।
इसी बीच 22 नवंबर 2017 को सरायमीर थाना क्षेत्र के संजरपुर गांव निवासी हामीद संजरी ने शहर कोतवाली में आमिर रशादी, उनके भाई हम्मान सहित तीन लोगों के विरुद्ध बहू फौजिया की हत्या और सबूत नष्ट करने की धारा में केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू की।
चार दिसंबर को फौजिया का पीएम कराकर जिला अस्पताल से घर लौट रहे परिजनों पर हर्रा की चुंगी मुहल्ले में पथराव होने लगा। बीच बचाव करने में पुलिस की गाड़ी भी टूट गई।
पत्थरबाजी और जानलेवा हमला होने के संबंध में चौकी प्रभारी पहाड़पुर धर्मेंद्र कुमार और फौजिया के मायके वालों की तरफ से आमिर रशादी, उनके बेटे सहित पांच लोगों के विरुद्ध हत्या का प्रयास, मारपीट और पथराव करने की धारा में भी केस दर्ज किया है।
तभी से पुलिस का सिकंजा इन पर कसते जा राि। पुलिस सूत्रों की मानें तो कुछ दिग्गज राजनीतिज्ञ इसे दबाने का दवाब बना रहे। लेकिन पुलिस पर उनका कोई असर नहीं।
ओलमा काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आमिर रशादी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के लिए इनके खिलाफ पूर्व में दर्ज मुकदमे का भी संज्ञान लिया जा रहा। पुलिस संबंधित थाना और कोर्ट के भी रिकार्ड खंगालते हुए स्थिति का पता कर रही है। - अजय कुमार साहनी, पुलिस अधीक्षक, आजमगढ़