{"_id":"62a23ac39144c003ab16ac18","slug":"operation-kayakalp-progress-is-poor-schools-are-unable-to-get-saturated-with-19-parameters-azamgarh-news-vns658093584","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऑपरेशन कायाकल्प की प्रगति खराब, 19 पैरामीटर से संतृप्त नहीं हो पा रहे विद्यालय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऑपरेशन कायाकल्प की प्रगति खराब, 19 पैरामीटर से संतृप्त नहीं हो पा रहे विद्यालय
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले के परिषदीय विद्यालयों की दशा सुधरने में अभी और वक्त लगेगा। ज्यादातर विद्यालय शासन के 19 पैरामीटर को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। जिले में एक भी परिषदीय विद्यालय सौ फीसदी मानकों को पूरा नहीं कर पा रहा। 19 बिदुओं में से कोई न कोई बिंदु अधूरा पड़ा है। जबकि, शासन के निर्देशानुसार इसे काफी पहले ही पूरा करने का निर्देश था। बीएसए ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
कायाकल्प योजना में खंडहर जैसे दिखने वाले परिषदीय विद्यालय नए रूप में दिखने लगे हैं। विद्यालयों की रंगाई-पुताई से लेकर शौचालय, कक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है। दिव्यांगों के लिए भी रेलिंग बनाने का नियम है। बहुत से विद्यालयों में काम पूरा हुआ है। लेकिन, वहां दिव्यांग बच्चों का नामांकन न होने से रेलिग नहीं बनवाई जा रही है। ग्राम पंचायत से ड्रिंकिंग वाटर, बालक व बालिका शौचालय व यूरिनल, टाइलिंग, रनिंग वाटर, दिव्यांग शौचालय, कक्षाओं में टाइलिंग, टॉप रनिंग वाटर, किचन सुंदरीकरण एवं बाउंड्रीवाल कराया जाना है। वहीं बेसिक शिक्षा विभाग से मल्टीपल हैंडवास, ब्लैकबोर्ड, रंगाई-पोताई, रैंप, बिजली की व्यवस्था व बिजली कनेक्शन की व्यवस्था कराना है। उक्त सभी बिंदु पर सभी विद्यालयों में कुछ न कुछ छूटा हुआ है। विभागीय आंकड़ों की माने तो विभिन्न बिदुओं पर स्कूलों में 76.51 फीसद काम किया गया। विभाग की माने तो एक भी विद्यालय 19 बिंदु से पूर्ण रूप से संतृप्त नहीं है।
विज्ञापन
कायाकल्प योजना में खंडहर जैसे दिखने वाले परिषदीय विद्यालय नए रूप में दिखने लगे हैं। विद्यालयों की रंगाई-पुताई से लेकर शौचालय, कक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है। दिव्यांगों के लिए भी रेलिंग बनाने का नियम है। बहुत से विद्यालयों में काम पूरा हुआ है। लेकिन, वहां दिव्यांग बच्चों का नामांकन न होने से रेलिग नहीं बनवाई जा रही है। ग्राम पंचायत से ड्रिंकिंग वाटर, बालक व बालिका शौचालय व यूरिनल, टाइलिंग, रनिंग वाटर, दिव्यांग शौचालय, कक्षाओं में टाइलिंग, टॉप रनिंग वाटर, किचन सुंदरीकरण एवं बाउंड्रीवाल कराया जाना है। वहीं बेसिक शिक्षा विभाग से मल्टीपल हैंडवास, ब्लैकबोर्ड, रंगाई-पोताई, रैंप, बिजली की व्यवस्था व बिजली कनेक्शन की व्यवस्था कराना है। उक्त सभी बिंदु पर सभी विद्यालयों में कुछ न कुछ छूटा हुआ है। विभागीय आंकड़ों की माने तो विभिन्न बिदुओं पर स्कूलों में 76.51 फीसद काम किया गया। विभाग की माने तो एक भी विद्यालय 19 बिंदु से पूर्ण रूप से संतृप्त नहीं है।
विज्ञापन