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Azamgarh News: मिठाई पर चांदी नहीं, एल्युमिनियम का वर्क, फूड पॉइजनिंग व कैंसर का खतरा
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आजमगढ़। बाजार की मिठाई, खोवा, पनीर और दही का सेवन सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। दुकानों में काउंटर के अंदर रखी सिल्वर कलर की चमकती मिठाई लोगों की पहली पसंद बन रही है, मगर सेहत के लिए यह खतरनाक है।
कानू बर्फी, मेवा लड्डू या दूधिया रंग का कलाकंद, इन पर लगा चमकीला वर्क चांदी का नहीं, बल्कि एल्युमिनियम का है। विशेषज्ञ इसे कैंसर और फूड पॉइजनिंग का कारक मानते हैं। जिले में अभी खाद्य सुरक्षा की टीम छापा मारने में जुटी है।
एल्युमिनियम वर्क वाली चमकीली मिठाई के साथ अफलातून मिठाई भी खतरनाक है। जानकारों की मानें तो धंधेबाज कानपुर, मथुरा एवं अन्य शहरों से ऑर्डर पर रेडीमेड अफलातून मिठाई मंगा रहे हैं। खोवे से तैयार होने वाली लाल रंग की यह मिठाई दिखने में ही मिलावटी लग रही है।
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जानकार बताते हैं कि दूध से तैयार होने वाला खोवा उतना लाल नहीं होता है, जितना बाजार में लाल अफलातून मिठाई बिक रही है। इसमें मिलावट के साथ प्रचुर मात्रा में रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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कानू बर्फी, मेवा लड्डू या दूधिया रंग का कलाकंद, इन पर लगा चमकीला वर्क चांदी का नहीं, बल्कि एल्युमिनियम का है। विशेषज्ञ इसे कैंसर और फूड पॉइजनिंग का कारक मानते हैं। जिले में अभी खाद्य सुरक्षा की टीम छापा मारने में जुटी है।
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एल्युमिनियम वर्क वाली चमकीली मिठाई के साथ अफलातून मिठाई भी खतरनाक है। जानकारों की मानें तो धंधेबाज कानपुर, मथुरा एवं अन्य शहरों से ऑर्डर पर रेडीमेड अफलातून मिठाई मंगा रहे हैं। खोवे से तैयार होने वाली लाल रंग की यह मिठाई दिखने में ही मिलावटी लग रही है।
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जानकार बताते हैं कि दूध से तैयार होने वाला खोवा उतना लाल नहीं होता है, जितना बाजार में लाल अफलातून मिठाई बिक रही है। इसमें मिलावट के साथ प्रचुर मात्रा में रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा है।