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अली असगर का झूला देख नम हुई आंखें

Wed, 09 Dec 2015 12:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़ Updated Wed, 09 Dec 2015 12:24 AM IST
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My eyes moist cradle of Ali Asghar
करबला में जंग के बाद लुटे हुए काफिले की याद में सोमवार को फूलपुर तहसील क्षेत्र के कंदरी गांव स्थित इमाम बारगाह से अंजुमन पैकरे हुसैन रजिस्टर्ड की तरफ से जुलूस-ए-अमारी अकीदत के साथ निकाला गया।
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इस दौरान हजरत अब्बास का अलम, जुलजनाह, ताबूत और तीन अमारियां निकाली गई। इस दौरान अली असगर के झूले की जियारत कर अजादारों की आंखें नम हो उठी। उन्होंने सीनाजनी और नौहा मातम के जरिए शहीदाने कर्बला को खिराजे अकीदत पेश की।
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 जुलूस से पूर्व मजलिस का आगाम सोजख्वानी से किया गया। मौलाना अफसर हुसैन मुंबई, मौलाना मेराज खां चेन्नई, मौलाना कमर अब्बास जौनपुर और मौलाना कैसर अब्बास ने मजलिस को खिताब किया।
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 मौलाना अफसर ने कहा कि हुसैन इंसानियत का नाम है, और इमाम हुसैन इंसानियत को बचाने के लिए पूरे कुनबे और अपने 71 साथियों के साथ शहीद हो गए। कर्बला का मंजर बयान होते ही अजादार रो पड़े।

उधर, मजलिस के बाद निकले जुलूसे अमारी में रास्ते भर अंजुमन इमामिया रजिस्टर्ड अमिलों, रिजविया हसनपुर, हैदरिया सुल्तानपुर नौहा मातम करते चल रही थीं।

 देर शाम कर्बला में जुलूस का समापन किया गया। जुलूस में गम का काला लिबास पहने और सीनाजनी करते हुए अजादार चल रहे थे। निजामत जीशान अली ने किया।
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