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महिला अस्पताल में लापरवाही, प्रसूता की हुई मौत
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जिला महिला अस्पताल में मरीज को लेकर परिजनों और अस्पताल कर्मियों के बीच कहा सुनी।
- फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। जिला महिला अस्पताल में रविवार को प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव से महिला की हालत बिगड़ गई। महिला को निजी अस्पताल ले जाने को लेकर चालकों से विवाद के बाद दो एंबुलेंस में तोड़फोड़ की गई। फिर पुलिस के हस्तक्षेप पर ऑटो से महिला को निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने जिला महिला अस्पताल के कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि वे प्रसूता की देखरेख के बजाए नेग मांगने में जुटे थे।
सिधारी थाना क्षेत्र के बैठौली गांव की अरुंधती(28) को प्रसव होना था। परिजनों ने उसे शनिवार को जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। रविवार को दोपहर 12 बजे महिला को लड़की पैदा हुई। इसके बाद अत्यधिक रक्तस्राव के चलते प्रसूता की हालत बिगड़ने लगी। हालत गंभीर होने पर अरुंधती को रेफर कर दिया गया। इसके बाद परिजन और आशा परिसर में खड़े 108 और 102 एंबुलेंस के पास पहुंचे और चालकों से मरीज को तत्काल प्राइवेट अस्पताल ले जाने को लेकर उलझ गए। इस दौरान दो एंबुलेंस के साइड ग्लास तोड़ दिए गए। इसके बाद पुलिस पहुंचे और उसके हस्तक्षेप पर परिजन ऑटो से महिला को सिधारी स्थित प्राइवेट अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। पति विरेंद्र कुमार ने आरोप लगाया कि प्रसूता की देखरेख के बजाय अस्पताल के कर्मचारी नेग मांगने में जुटे थे। अगर रक्तस्राव रोकने के तत्काल प्रयास किए गए होते तो ऐसी नौबत नहीं आती।
एंबुलेंस चालकों ने लगाया आरोप
आजमगढ़। 102 और 108 एंबुलेंस चालकों का आरोप था कि अस्पताल प्रशासन की गड़बड़ी के चलते उन्हें अक्सर ऐसी समस्या का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि मरीज को महिला अस्पताल से हॉयर सेंटर पर ही ले जा सकते हैं। इस एंबुलेंस से प्राइवेट अस्पताल पर ले जाना प्रतिबंधित है। आशा और परिजन मरीज को प्राइवेट अस्पताल पहुंचाने के लिए जोर जबरदस्ती कर रहे थे। इसमें अस्पताल की एक नर्स भी शामिल थी। एंबुलेंस चालकों ने कहा कि वे इसकी शिकायत सीएमओ से करेंगे।
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आमने-सामने हुए एंबुलेंस चालक और अस्पताल स्टाफ
आजमगढ़। पुलिस के जाते ही अस्पताल स्टाफ और एंबुलेंस चालक आमने-सामने हो गये। चालकों ने अस्पताल के नर्स पर आशा के साथ मिल कर दबाव बनाने का आरोप लगाया। साथी नर्स को फंसता देख अन्य नर्सें भी वहां जुट गई और बीच बचाव किया।
प्रकरण अभी हमारे संज्ञान में नहीं है। परिजन आरोप लगा रहे हैं। लेकिन मरीज की मौत कैसे हुई, यह देखना पड़ेगा। अस्पताल में कुछ हुआ होता तो निश्चित तौर पर हमें सूचना मिली होती। पता करते हैं कि मामला क्या है।
- डॉ. विनय सिंह यादव, प्रभारी सीएमएस, जिला महिला अस्पताल।
प्रसूता को ब्लीडिंग हो रही थी और अस्पताल प्रशासन ने उसे रेफर कर दिया था। एंबुलेंस वालों ने जब प्राइवेट अस्पताल ले जाने से मना कर दिया तो एंबुलेंस का साइड शीशा तोड़ दिया गया। इसी को लेकर अस्पताल में कुछ हंगामा हुआ था। पुलिस ने मरीज को अस्पताल भेजवाया और बयान दर्ज कर मामला शांत कराया। प्रसूता की मौत की जानकारी नहीं है।
- अनिल सिंह, कोतवाल, शहर कोतवाली।
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सिधारी थाना क्षेत्र के बैठौली गांव की अरुंधती(28) को प्रसव होना था। परिजनों ने उसे शनिवार को जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। रविवार को दोपहर 12 बजे महिला को लड़की पैदा हुई। इसके बाद अत्यधिक रक्तस्राव के चलते प्रसूता की हालत बिगड़ने लगी। हालत गंभीर होने पर अरुंधती को रेफर कर दिया गया। इसके बाद परिजन और आशा परिसर में खड़े 108 और 102 एंबुलेंस के पास पहुंचे और चालकों से मरीज को तत्काल प्राइवेट अस्पताल ले जाने को लेकर उलझ गए। इस दौरान दो एंबुलेंस के साइड ग्लास तोड़ दिए गए। इसके बाद पुलिस पहुंचे और उसके हस्तक्षेप पर परिजन ऑटो से महिला को सिधारी स्थित प्राइवेट अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। पति विरेंद्र कुमार ने आरोप लगाया कि प्रसूता की देखरेख के बजाय अस्पताल के कर्मचारी नेग मांगने में जुटे थे। अगर रक्तस्राव रोकने के तत्काल प्रयास किए गए होते तो ऐसी नौबत नहीं आती।
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एंबुलेंस चालकों ने लगाया आरोप
आजमगढ़। 102 और 108 एंबुलेंस चालकों का आरोप था कि अस्पताल प्रशासन की गड़बड़ी के चलते उन्हें अक्सर ऐसी समस्या का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि मरीज को महिला अस्पताल से हॉयर सेंटर पर ही ले जा सकते हैं। इस एंबुलेंस से प्राइवेट अस्पताल पर ले जाना प्रतिबंधित है। आशा और परिजन मरीज को प्राइवेट अस्पताल पहुंचाने के लिए जोर जबरदस्ती कर रहे थे। इसमें अस्पताल की एक नर्स भी शामिल थी। एंबुलेंस चालकों ने कहा कि वे इसकी शिकायत सीएमओ से करेंगे।
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आमने-सामने हुए एंबुलेंस चालक और अस्पताल स्टाफ
आजमगढ़। पुलिस के जाते ही अस्पताल स्टाफ और एंबुलेंस चालक आमने-सामने हो गये। चालकों ने अस्पताल के नर्स पर आशा के साथ मिल कर दबाव बनाने का आरोप लगाया। साथी नर्स को फंसता देख अन्य नर्सें भी वहां जुट गई और बीच बचाव किया।
प्रकरण अभी हमारे संज्ञान में नहीं है। परिजन आरोप लगा रहे हैं। लेकिन मरीज की मौत कैसे हुई, यह देखना पड़ेगा। अस्पताल में कुछ हुआ होता तो निश्चित तौर पर हमें सूचना मिली होती। पता करते हैं कि मामला क्या है।
- डॉ. विनय सिंह यादव, प्रभारी सीएमएस, जिला महिला अस्पताल।
प्रसूता को ब्लीडिंग हो रही थी और अस्पताल प्रशासन ने उसे रेफर कर दिया था। एंबुलेंस वालों ने जब प्राइवेट अस्पताल ले जाने से मना कर दिया तो एंबुलेंस का साइड शीशा तोड़ दिया गया। इसी को लेकर अस्पताल में कुछ हंगामा हुआ था। पुलिस ने मरीज को अस्पताल भेजवाया और बयान दर्ज कर मामला शांत कराया। प्रसूता की मौत की जानकारी नहीं है।
- अनिल सिंह, कोतवाल, शहर कोतवाली।

लि महिला अस्पताल में मरीज को ले जाने से इंकार के बाद तोड़ी गई एंबुलेंस।- फोटो : AZAMGARH

जिला महिला अस्पताल में मरीज को ले जाने के लिए एंबुलेंस चालकों से कहा सुनी के बाद पहुंची पुलिस।- फोटो : AZAMGARH