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बदहाली की लू में सूख गए पौधे
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Wed, 27 Apr 2016 11:55 PM IST
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पौधरोपण
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एक तरफ ग्लोबल वार्मिंग को लेकर पूरे विश्व में हायतौबा मची है। ग्लोबल वार्मिंग से निपटने और जनपद को हरा भरा बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च हो गए लेकिन अभी तक इसमें कामयाबी नहीं मिली। इसके लिए जिम्मेदार वन विभाग के अधिकारी मौन हैं। जनपद में वन क्षेत्र का दायरा प्रतिवर्ष सिकुड़ता जा रहा है। जो दर्शाता है कि जितने पेड़ प्रतिवर्ष लगाए नहीं जाते, उससे ज्यादा काट दिए जाते हैं।
अगर जनपद में वन क्षेत्रफल पर नजर डालें तो वर्ष 2013-14 में यह क्षेत्र 273 हेक्टेयर था, जो 2015-16 में 249 हेक्टेयर पर पहुंच गया। आंकड़े से स्पष्ट होता है कि एक वर्ष में 24 हेक्टेयर वन क्षेत्र का दायरा घटा। अगर यही हाल रहा तो जनपद लगभग छह वर्षों में वनविहीन हो जाएगा। इस बार वन विभाग के लिए मुख्यमंत्री एजेंडे के तहत एक दिन में साढ़े पांच लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इसके अलावा अन्य मदों से भी पौधरोपण किया जाना है। जिलाधिकारी प्रांजल यादव ने वर्ष 2012-13 में बंधे पर 20 हजार पौधरोपण कराया था लेकिन आज बंधे पर गिनती के पेड़ हैं। इसी तरह से वन विभाग द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर प्रतिवर्ष पौधे लगाए जाते हैं लेकिन मात्र गिनती के पौधे ही पेड़ बन पाते हैं। इसके लिए वन विभाग, नगरपालिका और आमजन जिम्मेदार हैं। वन विभाग शासन से मिले लक्ष्य को पौधे का रोपण कर पूरा कर लेता है लेकिन पौधरोपण के बाद वह पौधों की देखभाल करना भूल जाता है। वहीं नगरपालिका द्वार पूरे शहर से निकलने वाले कूड़े को बंधे पर गिराया जाता है।
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कूड़े में मिलने वाली पालीथिन पौधों के विकास में बाधक बनती है। यहीं कूड़ा जब काफी मात्रा में इकठ्ठा हो जाता है तो नगरपालिका द्वारा उसमें आग लगा दी जाती है। इसके कारण लगे पौधे भी जलकर सूख जाते हैं। आमलोगों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जो पेड़ लगाए गए हैं, उनका कटान भी तेजी से किया जा रहा है। जनपद में जो वन क्षेत्र है, वह भी सिकुड़ता जा रहा है।
वाराणसी-लुंबनी मार्ग पर फोरलेन निर्माण में आजमगढ़ से वाराणसी के बीच जिले की सीमा में सड़क किनारे लगाए गए सैकड़ों पेड़ काटे गए। ये पेड़ विकास की भेंट चढ़ गए। देखना है कि क्या आने वाले दिन में पुन: सड़क के किनारे पेड़ लगाया जाता है या नहीं।
हर बार शासन से तय लक्ष्य के अनुरूप वन विभाग द्वारा पौधरोपण किया जाता है। इस बार एक दिन में साढ़े पांच लाख पौधे लगाने का लक्ष्य है। रही बात बंधे पर वर्ष 2012-13 में पौध लगाने कि तो वह विभाग द्वारा नहीं लगाया गया था। - आरपी सिंह, वरिष्ठ सहायक, वन विभाग
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अगर जनपद में वन क्षेत्रफल पर नजर डालें तो वर्ष 2013-14 में यह क्षेत्र 273 हेक्टेयर था, जो 2015-16 में 249 हेक्टेयर पर पहुंच गया। आंकड़े से स्पष्ट होता है कि एक वर्ष में 24 हेक्टेयर वन क्षेत्र का दायरा घटा। अगर यही हाल रहा तो जनपद लगभग छह वर्षों में वनविहीन हो जाएगा। इस बार वन विभाग के लिए मुख्यमंत्री एजेंडे के तहत एक दिन में साढ़े पांच लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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इसके अलावा अन्य मदों से भी पौधरोपण किया जाना है। जिलाधिकारी प्रांजल यादव ने वर्ष 2012-13 में बंधे पर 20 हजार पौधरोपण कराया था लेकिन आज बंधे पर गिनती के पेड़ हैं। इसी तरह से वन विभाग द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर प्रतिवर्ष पौधे लगाए जाते हैं लेकिन मात्र गिनती के पौधे ही पेड़ बन पाते हैं। इसके लिए वन विभाग, नगरपालिका और आमजन जिम्मेदार हैं। वन विभाग शासन से मिले लक्ष्य को पौधे का रोपण कर पूरा कर लेता है लेकिन पौधरोपण के बाद वह पौधों की देखभाल करना भूल जाता है। वहीं नगरपालिका द्वार पूरे शहर से निकलने वाले कूड़े को बंधे पर गिराया जाता है।
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कूड़े में मिलने वाली पालीथिन पौधों के विकास में बाधक बनती है। यहीं कूड़ा जब काफी मात्रा में इकठ्ठा हो जाता है तो नगरपालिका द्वारा उसमें आग लगा दी जाती है। इसके कारण लगे पौधे भी जलकर सूख जाते हैं। आमलोगों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जो पेड़ लगाए गए हैं, उनका कटान भी तेजी से किया जा रहा है। जनपद में जो वन क्षेत्र है, वह भी सिकुड़ता जा रहा है।
वाराणसी-लुंबनी मार्ग पर फोरलेन निर्माण में आजमगढ़ से वाराणसी के बीच जिले की सीमा में सड़क किनारे लगाए गए सैकड़ों पेड़ काटे गए। ये पेड़ विकास की भेंट चढ़ गए। देखना है कि क्या आने वाले दिन में पुन: सड़क के किनारे पेड़ लगाया जाता है या नहीं।
हर बार शासन से तय लक्ष्य के अनुरूप वन विभाग द्वारा पौधरोपण किया जाता है। इस बार एक दिन में साढ़े पांच लाख पौधे लगाने का लक्ष्य है। रही बात बंधे पर वर्ष 2012-13 में पौध लगाने कि तो वह विभाग द्वारा नहीं लगाया गया था। - आरपी सिंह, वरिष्ठ सहायक, वन विभाग