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मंच पर जीवंत हुई 'अंधेर नगरी'
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Mon, 23 Jan 2017 12:15 AM IST
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मंच पर जीवंत हुई 'अंधेर नगरी'
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सूत्रधार संस्थान की ओर से शहर के शारदा टाकीज में चल रहे 12वें रंगमहोत्सव आरंगम्-2017 का समापन रविवार को हुआ। प्रथम सत्र में वरिष्ठ रंगकर्मी अभिषेक पंडित ने अपने गीतों से जहां लोगों को मुग्ध कर दिया। रंगकर्मियों ने भारतेंदु हरिशचंद्र कृत नाटक 'अंधेर नगरी' का जीवंत मंचन किया, जिसे लोगों ने सराहा। कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले कलाकारों को सम्मानित भी किया गया।
आरगम्-2017 के अंतिम दिन का शुभारंभ भारतेंदु नाट्य अकादमी के निदेशक रमेशचंद्र गुप्ता, डा. अनूप सिंह एवं सत्यदेव त्रिपाठी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। संध्या के प्रथम सत्र रंग-संगीत में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त अभिषेक पंडित एक अलग ही अंदाज में दिखे। उन्होंने अपने गायन से दर्शकों को जहां चकित कर दिया। समापन पर भारतेंदु हरिश्चंद्र कृत नाटक 'अंधेर नगरी' का मंचन किया गया। भारतेंदु हरिश्चंद्र कृत यह नाटक आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
नाटक में महंत (दिव्य दृष्टा संजय) और उसके दो चेले गोवर्धनदास (संदीप) और नारायण दास (रितेश) भिक्षाटन करते-करते एक अंजान नगर पहुंचते हैं। जहां पर सबकुछ 'टके सेर' बिक रहा है। महंत यह अंधेरगर्दी देखकर वहां से जाने का निर्णय लेते हैं लेकिन गोवर्धनदास लालच में फंसकर वहीं रुक जाता है। एक दिन अचानक फरियादी (रीता गुप्ता) की बकरी कल्लू बनिया (रितेश रंजन) की दीवार से नीचे दबकर मर जाती है। वहां का राजा चौपटलाल (श्रवण सिंह राणा) अपने हास्यापद न्याय के द्वारा कोतवाल को फांसी की सजा देता है। लेकिन सिपाहियों के मिली भगत में कोतवाल (धर्मेंद्र) बच जाता है और बेकसूर गोवर्धनदास इस चक्कर में फंस जाता है। इस मुसीबत की घड़ी में गोवर्धनदास की मदद करने महंत आते है।
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अंत में मूर्ख राजा स्वयं ही फांसी चढ़ जाता है। मंत्री की भूमिका में नंदकिशोर यादव, सिपाहियों की भूमिका में विनय और रवि, कारीगर द्वारिका विश्वकर्मा, भिश्ती रामजनम, चूने वाली ममता पंडित, कसाई बालेंदू राणा, गड़ेरिया रिंकू गुप्ता, बाबा बामदेव नदीम और फलवाला अमरजीत ने अपने अभिनय और संवाद अदायगी से और दीपक के ढोलक की थाप ने दर्शकों को हंसा-हंसा कर लोटपोट कर दिया। सुग्रीव विश्वकर्मा का सेट और क्राफ्ट, विशाल तिवारी द्वारा मुख-सज्जा, सारांश भट्ट का वस्त्र विन्यास, शशिकांत कुमार का संगीत व रणजीत कुमार की प्रकाश परिकल्पना सराहनीय रही।
नाटक के समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया। इस अवसर पर संगम पांडेय, सुभाषचंद्र कुशवाहा, राकेश कुमार, स्वस्ति सिंह, डा. हेमबाला यादव, डा. निर्मल श्रीवास्तव, डा. एके सिंह, डा. खुश्बू सिंह, डा. अलका सिंह, विवेक पांडेय, तरुण राय, अविनाश सिंह समेत कई लोग उपस्थित रहे।
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आरगम्-2017 के अंतिम दिन का शुभारंभ भारतेंदु नाट्य अकादमी के निदेशक रमेशचंद्र गुप्ता, डा. अनूप सिंह एवं सत्यदेव त्रिपाठी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। संध्या के प्रथम सत्र रंग-संगीत में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त अभिषेक पंडित एक अलग ही अंदाज में दिखे। उन्होंने अपने गायन से दर्शकों को जहां चकित कर दिया। समापन पर भारतेंदु हरिश्चंद्र कृत नाटक 'अंधेर नगरी' का मंचन किया गया। भारतेंदु हरिश्चंद्र कृत यह नाटक आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
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नाटक में महंत (दिव्य दृष्टा संजय) और उसके दो चेले गोवर्धनदास (संदीप) और नारायण दास (रितेश) भिक्षाटन करते-करते एक अंजान नगर पहुंचते हैं। जहां पर सबकुछ 'टके सेर' बिक रहा है। महंत यह अंधेरगर्दी देखकर वहां से जाने का निर्णय लेते हैं लेकिन गोवर्धनदास लालच में फंसकर वहीं रुक जाता है। एक दिन अचानक फरियादी (रीता गुप्ता) की बकरी कल्लू बनिया (रितेश रंजन) की दीवार से नीचे दबकर मर जाती है। वहां का राजा चौपटलाल (श्रवण सिंह राणा) अपने हास्यापद न्याय के द्वारा कोतवाल को फांसी की सजा देता है। लेकिन सिपाहियों के मिली भगत में कोतवाल (धर्मेंद्र) बच जाता है और बेकसूर गोवर्धनदास इस चक्कर में फंस जाता है। इस मुसीबत की घड़ी में गोवर्धनदास की मदद करने महंत आते है।
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अंत में मूर्ख राजा स्वयं ही फांसी चढ़ जाता है। मंत्री की भूमिका में नंदकिशोर यादव, सिपाहियों की भूमिका में विनय और रवि, कारीगर द्वारिका विश्वकर्मा, भिश्ती रामजनम, चूने वाली ममता पंडित, कसाई बालेंदू राणा, गड़ेरिया रिंकू गुप्ता, बाबा बामदेव नदीम और फलवाला अमरजीत ने अपने अभिनय और संवाद अदायगी से और दीपक के ढोलक की थाप ने दर्शकों को हंसा-हंसा कर लोटपोट कर दिया। सुग्रीव विश्वकर्मा का सेट और क्राफ्ट, विशाल तिवारी द्वारा मुख-सज्जा, सारांश भट्ट का वस्त्र विन्यास, शशिकांत कुमार का संगीत व रणजीत कुमार की प्रकाश परिकल्पना सराहनीय रही।
नाटक के समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया। इस अवसर पर संगम पांडेय, सुभाषचंद्र कुशवाहा, राकेश कुमार, स्वस्ति सिंह, डा. हेमबाला यादव, डा. निर्मल श्रीवास्तव, डा. एके सिंह, डा. खुश्बू सिंह, डा. अलका सिंह, विवेक पांडेय, तरुण राय, अविनाश सिंह समेत कई लोग उपस्थित रहे।