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निजामाबाद से धार्मिक स्थल का चयन न करने का मामला पहुंचा सीएम दरबार

Fri, 25 Sep 2020 11:27 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 25 Sep 2020 11:27 PM IST
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Issue of not choosing religious place from Nizamabad gone to CM
लखनऊ में मुख्यमंत्री से मुलाकात करते निजामाबाद स्थित गुरुद्वारा चरण पादुका साहिब के ग्रंथी सतन? - फोटो : AZAMGARH
निजामाबाद। बीते साल सीएम ने हर विधानसभा के एक धार्मिक स्थल का विकास कराने का निर्देश दिया था। विधायकों के प्रस्ताव पर जनपद में नौ विधानसभा के 11 धार्मिक स्थलों का चयन किया है। वहीं, निजामाबाद विधानसभा से कोई प्रस्ताव नहीं मिला था। अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता के साथ उठाया था। इससे ऐतिहासिक गुरुद्वारा चरणपादुका साहिब के पदाधिकारी खासे आहत हैं। उन्होंने सीएम से मिलकर अपनी पीड़ा बताई है। चरण पादुका साहिब से दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से सिख समाज के लोग आते हैं। इसके बाद भी इसकी अनदेखी की गई है।
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ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो निजामाबाद तहसील काफी समृद्ध है। यहां महर्षि दुर्वासा, दत्तात्रेय आश्रमों के साथ ही ऐतिहासिक गुरुद्वारा चरणपादुका साहिब भी है। सीएम ने हर विधानसभा से एक धार्मिक स्थल का पर्यटन स्थल के रूप में विकास के लिए घोषणा की थी। 10 विधानसभाओं में नौ विधायकों ने 11 धार्मिक स्थलों का प्रस्ताव भेज दिया था। पर्यटन विभाग की ओर से इनका डीपीआर भी तैयार कर लिया गया है। निजामाबाद विधानसभा से कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया था। इससे क्षेत्र के लोगों की भावनाएं आहत हैं। पिछले दिनों भाजपा के पदाधिकारी ने भी इसका विरोध जताया था। अब गुरुद्वारा चरण पादुका साहिब के जत्थेदार सतनाम सिंह बृहस्पतिवार को अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य सरकार परमेंद्र सिंह के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले। स्थानीय विधायक और अधिकारियों पर ऐतिहासिक गुरुद्वारे के साथ भेदभाव का आरोप लगाया। कहा कि गुरुद्वारा चरणपादुका साहिब अपने आप में इतिहास समेटे हैं। इसके बाद भी इसके विकास के लिए कोई कार्य नहीं किया जा रहा है। इस योजना के तहत भी चयन नहीं करने से काफी निराशा हुई है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की योजना के तहत गुरुद्वारा को चयनित कर इसका विकास कराया जाए।
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गुरुद्वारे का ऐतिहासिक महत्व
आजमगढ़। ऐतिहासिक गुरुद्वारा चरण पादुका साबिह निजामाबाद में स्थित है। इस पवित्र स्थान पर 21 दिन तक गुरु नानकदेव ने तप किया था। बाबा श्रीचंद भी आए। गुरु तेग बहादुर साहिब पटना से पंजाब जाते समय इस स्थान पर आए थे। कुछ दिन रुक कर तप किया। यहां 25 हस्तलिखित आदि श्री गुरु ग्रंथ साहिब, छह हस्तलिखित दशम ग्रंथ और कुछ छोटी पोथिया भी है। गुरु नानक देव और गुरु तेग बहादुर के खड़ांउ आज भी दर्शन के लिए रखी है। पुरातन शस्त्र आज भी दर्शन के लिए रखे गए हैं जो खुदाई में प्राप्त हुए हैं। तमसा नदी के एक किनारे गुरु नानक घाट और आनंद बाग भी स्थित है। मार्च महीने में तीन दिवसीय सालाना जोड़ मेले का आयोजन किया जाता है। यहां पूरे देश से सिखों का जत्था पहुंचता है। आगरा गुरुद्वारे के संत बाबा प्रीतम सिंह की अध्यक्षता में मेले की व्यवस्था की जाती है। हजारों की संख्या में सिख समुदाय आते हैं।
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