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इमाम हुसैन की कुर्बानी से जिंदा है इंसानियत
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Tue, 03 Feb 2015 12:15 AM IST
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अपने संबोधन में उलेमा ने इमाम हुसैन की कुर्बानी से इंसानियत के जिंदा होने की बात कही। जबकि देर रात तक चली मजलिस में कर्बला का बयान सुनकर अजादार रो पड़े।
मजलिस को खिताब करते हुए आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सदस्य मौलाना कल्बे रूशैद ने कहा कि आतंकवाद से इस्लाम का कोई संबंध नही है।
आज दुनिया में जो इंसानियत हैं वह इमामे हुसैन की कुर्बानी की वजह से है। उन्होंने कहा कि जमीन से ज्यादा आसमान का रास्ता जानने वाला सबका रहबर होता है। दुनिया उस आदमी के पीछे चलती हैं जो जमीन के रास्ते से हट कर आसमान के रास्ते को बताता है।
मौलाना सैयद जीशान हैदर ने भी मजलिस को खिताब किया। उन्होंने इमाम हुसैन, अली असगर और जनाबे फातिमा के साथ ही कर्बला के मंजर बयान किए तो मौजूद अजादार अपने आंसू नहीं रोक सके और फफक पड़े।
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खिताब के बाद मौजूद अजादारों ने अंजुमनों के साथ मिलकर नौहा और मातम कर कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत भी पेश्ा की।
जबकि मजलिस से पूर्व नायाब हल्लौरी ने पेशख्वानी की। निजामत काशिफ अयोध्यावी और शुक्रिया शहंशाह हुसैन और सैयद मुहम्मद अब्बास ने किया।
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मजलिस को खिताब करते हुए आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सदस्य मौलाना कल्बे रूशैद ने कहा कि आतंकवाद से इस्लाम का कोई संबंध नही है।
आज दुनिया में जो इंसानियत हैं वह इमामे हुसैन की कुर्बानी की वजह से है। उन्होंने कहा कि जमीन से ज्यादा आसमान का रास्ता जानने वाला सबका रहबर होता है। दुनिया उस आदमी के पीछे चलती हैं जो जमीन के रास्ते से हट कर आसमान के रास्ते को बताता है।
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मौलाना सैयद जीशान हैदर ने भी मजलिस को खिताब किया। उन्होंने इमाम हुसैन, अली असगर और जनाबे फातिमा के साथ ही कर्बला के मंजर बयान किए तो मौजूद अजादार अपने आंसू नहीं रोक सके और फफक पड़े।
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खिताब के बाद मौजूद अजादारों ने अंजुमनों के साथ मिलकर नौहा और मातम कर कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत भी पेश्ा की।
जबकि मजलिस से पूर्व नायाब हल्लौरी ने पेशख्वानी की। निजामत काशिफ अयोध्यावी और शुक्रिया शहंशाह हुसैन और सैयद मुहम्मद अब्बास ने किया।