{"_id":"5d73eb368ebc3e93cb7642be","slug":"govt-stopped-budget-of-six-municipal-bodies-azamgarh-news-vns4825351190","type":"story","status":"publish","title_hn":"छह नगर निकायों की राज्य वित्त की धनराशि शासन ने रोकी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छह नगर निकायों की राज्य वित्त की धनराशि शासन ने रोकी
विज्ञापन
आजमगढ़। सपत्ति कर नगर निकायों की आय का प्रमुख साधन होते हैं। इसके बाद भी मंडल के सात निकायों में वर्ष 2017-18, 2018-19 में सपत्ति कर की वसूली नहीं की गई। शासन ने ऐसे नगर निकायों का राज्य वित्त की धनरासि रोकने का फैसला लिया जिसमें या तो संपत्ति कर वसूला नहीं जा रहा है या लगाया ही नहीं गया है। मंडल में ऐसे सात निकाय है। आजमगढ़ के नगर पंचायच माहुल में संपत्ति कर का निर्धारण ही नहीं किया गया। बलिया के नगर पंचायत चितबड़ागांव और बैरिया, मऊ के वलीदपुर और चिरैयाकोट तथा मधुबन भी इसी दायरे में हैं। शासन ने संपत्ति कर की वसूली कर अवगत कराने तक इन निकायों की राज्य वित्त की धनराशि रोक दी है।
जनपद में वर्ष 2014 में माहुल नगर पंचायत का गठन किया गया था। गठन के बाद यहां एक बार चुनाव भी हो चुका है और चेयरमैन बदरे आलम अपने पद पर आसीन हैं। गठन के बाद नगर पंचायत में राज्य वित्त और 14वें वित्त से मिलने वाली धनराशि से नगर का विकास तो होने लगा है, लेकिन नगर पंचायत प्रशासन प्रशासन की लापरवाही से आज तक नगर में लगने वाले करों का निर्धारण नहीं किया जा सका है। संपत्ति कर नगर निकायों की आय का प्रमुख साधन होते हैं। कर नहीं वसूले जाने से प्रति वर्ष नगर पंचायत को लाखों की चपत लग रही है। सिर्फ माहुल ही नहीं मंडल के सात निकायों की यही स्थिति है। आजमगढ़ के नगर पंचायत माहुल के साथ ही बलिया के नगर पंचायत चितबड़ागांव और बैरिया, मऊ के वलीदपुर,चिरैयाकोट और मधुबन भी इसी दायरे में हैं। इन निकायों में वर्ष 2017-18, 2018-19 में सपत्ति कर की वसूली नहीं की गई। इससे राजस्व का घाटा हो रहा है। शासन ने ऐसे नगर निकायों के राज्य वित्त की धनराशि रोकने का फैसला लिया। निर्देश दिए गए हैं कि जब तक संपत्ति कर का निर्धारण और वसूली कर शासन को अवगत नहीं कराया जाता है तब तक राज्य वित्त की धनराशि जारी नहीं की जाएगी।
कर्मचारियों के वेतन और पेंशन के साथ ही होंगे अन्य संकट
आजमगढ़ राज्य वित्त से मिलने वाली धनराशि से नगर निकाय में कार्यरत स्थायी कर्मचाजिरयों का वेतन, पेंशन आदि भुगतान के साथ, संविदा और डेलीवेजर के रूर में रखे गए कर्मियों का भुगतान किया जाता है। शेष बची धनराशि का प्रयोग विकास कार्यों में किया जाता है। राज्य वित्त की धनराशि रोके जाने से मुख्य परेशानी वेतन, मानदेय और पेंशन को आएगी। इसके साथ ही विकास कार्य भी प्रभावित होंगे।
विज्ञापन
नगर पंचायत में संपत्ति कर लगाने के लिए गजट करा दिया गया है। प्रक्रिया शुरू हो गई है। ईओ को जल्द से जल्द कर निर्धारण और वसूली के लिए निर्देशित किया जाएगा। - नरेंद्र सिंह, एडीएम प्रशासन एवं प्रभारी अधिकारी नगरीय निकाय
विज्ञापन
जनपद में वर्ष 2014 में माहुल नगर पंचायत का गठन किया गया था। गठन के बाद यहां एक बार चुनाव भी हो चुका है और चेयरमैन बदरे आलम अपने पद पर आसीन हैं। गठन के बाद नगर पंचायत में राज्य वित्त और 14वें वित्त से मिलने वाली धनराशि से नगर का विकास तो होने लगा है, लेकिन नगर पंचायत प्रशासन प्रशासन की लापरवाही से आज तक नगर में लगने वाले करों का निर्धारण नहीं किया जा सका है। संपत्ति कर नगर निकायों की आय का प्रमुख साधन होते हैं। कर नहीं वसूले जाने से प्रति वर्ष नगर पंचायत को लाखों की चपत लग रही है। सिर्फ माहुल ही नहीं मंडल के सात निकायों की यही स्थिति है। आजमगढ़ के नगर पंचायत माहुल के साथ ही बलिया के नगर पंचायत चितबड़ागांव और बैरिया, मऊ के वलीदपुर,चिरैयाकोट और मधुबन भी इसी दायरे में हैं। इन निकायों में वर्ष 2017-18, 2018-19 में सपत्ति कर की वसूली नहीं की गई। इससे राजस्व का घाटा हो रहा है। शासन ने ऐसे नगर निकायों के राज्य वित्त की धनराशि रोकने का फैसला लिया। निर्देश दिए गए हैं कि जब तक संपत्ति कर का निर्धारण और वसूली कर शासन को अवगत नहीं कराया जाता है तब तक राज्य वित्त की धनराशि जारी नहीं की जाएगी।
विज्ञापन
कर्मचारियों के वेतन और पेंशन के साथ ही होंगे अन्य संकट
आजमगढ़ राज्य वित्त से मिलने वाली धनराशि से नगर निकाय में कार्यरत स्थायी कर्मचाजिरयों का वेतन, पेंशन आदि भुगतान के साथ, संविदा और डेलीवेजर के रूर में रखे गए कर्मियों का भुगतान किया जाता है। शेष बची धनराशि का प्रयोग विकास कार्यों में किया जाता है। राज्य वित्त की धनराशि रोके जाने से मुख्य परेशानी वेतन, मानदेय और पेंशन को आएगी। इसके साथ ही विकास कार्य भी प्रभावित होंगे।
विज्ञापन
नगर पंचायत में संपत्ति कर लगाने के लिए गजट करा दिया गया है। प्रक्रिया शुरू हो गई है। ईओ को जल्द से जल्द कर निर्धारण और वसूली के लिए निर्देशित किया जाएगा। - नरेंद्र सिंह, एडीएम प्रशासन एवं प्रभारी अधिकारी नगरीय निकाय