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कब्रिस्तानों में पढ़ा गया फातिहा,मस्जिदों में पूरी रात हुई इबादत

Sun, 28 Mar 2021 08:31 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 28 Mar 2021 08:31 PM IST
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Fatiha read in cemeteries, prayers performed in mosques all night
आजमगढ़। शब-ए-बारात की रात को इबादत की रात भी कहते है। इस रात अल्लाह की रहमतें और बरकतें नाजिल होती है। इस रात अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ करता है। यह रात गुनाहों से माफी और जहन्नम से निजात की होती है। लोग पूरी रात मस्जिदों में इबादत कर गुजारा।
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लोग ने अपने परिवार के मृतकों के नाम जहां घर में हलुआ और पकवान का नियाज फातिहा कराया,वही उनकी कब्रिस्तान पर जाकर फातिहा पढ़कर उनके हक में अल्लाह से दुआ मांगी।
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कब्रिस्तान से लौटने के बाद महिलाएं जहां घरों में पूरी रात इबादत किया। वही पुरुष मस्जिदों में पूरी रात इबादत कर गुजारे है। ऐसी मान्यता है कि इस रात अल्लाह सातवें आसमान पर आते है और इबादत करने वालों की हर मुरादों को पूरा करने के साथ ही उनके गुनाहों को भी माफ कर देते है। शब-ए-बारात के 15 दिनों के बाद माहे रमजान का आगाज होता है। शब-ए-बारात पर लोग पड़ाका फोडनेे का जो रिवाज बना लिए है यह सख्त मना है। यह त्योहार इबादत करने, अपने गुनाहों की माफी और अपने मृतक परिजनों के हक में अल्लाह से उनके लिए दुआ करने का होता है। इस दिन लोग जहां अपने परिवार के मृतकों की कब्रिस्तान पर जाते है वही शहीदों की मजार पर भी जाकर फातिहा पढ़ते है।
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