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Azamgarh News: सम्राट अशोक की जयंती धूमधाम से मनाई
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पवई ब्लाक के भर चकिया गांव चक्रवर्ती सम्राट अशोक की जयंती समारोह के कार्यक्रम में उपस्थित लोग।
पवई। क्षेत्र के भर चकिया गांव में सामाजिक संगठन अशोक सेवा संस्थान ने चक्रवर्ती सम्राट अशोक महान की जयंती धूमधाम से मनाई। इस दौरान लोगों ने सम्राट अशोक के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
मुख्य अतिथि समाजसेवी लौटन निषाद ने दीप प्रज्वलित कर एवं माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व जिस तरह अशांति और युद्ध की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में बौद्ध धर्म के सिद्धांतों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। इससे समाज और देश में शांति स्थापित हो सके। राष्ट्रीय अध्यक्ष राम सुधार मौर्य ने कहा कि सम्राट अशोक के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उनके शासनकाल में न्याय व्यवस्था अत्यंत सुदृढ़ थी और वे अपनी प्रजा को पुत्र-पुत्री के समान मानते थे।
यदि किसी को कोई कष्ट होता था, तो उसका त्वरित समाधान किया जाता था। वक्ताओं ने कहा कि आज के समाज में सम्राट अशोक के आदर्शों को अपनाना आवश्यक है, जिससे जातिवाद, भ्रष्टाचार और सामाजिक असमानता को समाप्त कर भारत को पुनः विश्व में सम्मानजनक स्थान दिलाया जा सके। इस अवसर पर दीनानाथ मौर्य, त्रिभुवन प्रसाद मौर्य, विकास मौर्य, राम बचन प्रजापति, बलिराम, आजाद, सतीश कुमार यादव, संजय गौतम, संगीता, सारंधा आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता रामधनी मौर्य ने किया।
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मुख्य अतिथि समाजसेवी लौटन निषाद ने दीप प्रज्वलित कर एवं माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व जिस तरह अशांति और युद्ध की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में बौद्ध धर्म के सिद्धांतों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। इससे समाज और देश में शांति स्थापित हो सके। राष्ट्रीय अध्यक्ष राम सुधार मौर्य ने कहा कि सम्राट अशोक के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उनके शासनकाल में न्याय व्यवस्था अत्यंत सुदृढ़ थी और वे अपनी प्रजा को पुत्र-पुत्री के समान मानते थे।
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यदि किसी को कोई कष्ट होता था, तो उसका त्वरित समाधान किया जाता था। वक्ताओं ने कहा कि आज के समाज में सम्राट अशोक के आदर्शों को अपनाना आवश्यक है, जिससे जातिवाद, भ्रष्टाचार और सामाजिक असमानता को समाप्त कर भारत को पुनः विश्व में सम्मानजनक स्थान दिलाया जा सके। इस अवसर पर दीनानाथ मौर्य, त्रिभुवन प्रसाद मौर्य, विकास मौर्य, राम बचन प्रजापति, बलिराम, आजाद, सतीश कुमार यादव, संजय गौतम, संगीता, सारंधा आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता रामधनी मौर्य ने किया।
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