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'पूर्वांचल ने मुंबई को बनाया आर्थिक राजधानी'
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Tue, 12 Apr 2016 11:27 PM IST
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राज्यपाल राम नाईक
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बूढ़नपुर तहसील क्षेत्र के अजगरा गांव स्थित सरस्वती महिला महाविद्यालय का लोकार्पण करने के बाद समारोह को संबोधित करते हुए प्रदेश के राज्यपाल रामनाईक ने कहा कि हम जिस प्रांत से हैं, उसकी राजधानी मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी के नाम से भी जाना जाता है। इसे आर्थिक राजधानी बनाने में उत्तर प्रदेश खासकर पूर्वांचल के लोगों की महती भूमिका है लेकिन देश की प्रगति तभी संभव है जब देश की आधी आबादी शिक्षित होगी।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की तरफ से राज्यपाल का स्वागत करने पहुंचे माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री बलराम यादव ने कहा कि महाराष्ट्र और यूपी के बीच की खाई को तीर्थ स्थलों ने पाट दिया है। अब दोनों प्रांतों के बीच दिलों का रिश्ता है।
श्री नाईक ने कहा कि आज की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा आरक्षण हो गया है, लेकिन बेटियां आरक्षण नहीं मांगतीं। सिर्फ पढ़ाई का हक मांगती हैं। ऐेसे में अब जरूरी है कि देश की प्रगति के लिए बेटियों का शिक्षित होना जरूरी हो गया है। बोले, उप्र का राज्यपाल होने के कारण यहां के विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति हूं। दीक्षांत समारोह में जाने के दौरान मैंने देखा कि अब छात्रों से ज्यादा मेडल छात्राएं प्राप्त करती हैं। ऐसे में इस निर्जन स्थान पर महाविद्यालय की स्थापना बड़ी राष्ट्रसेवा है। उन्होंने लड़कियों को नसीहत दी कि सिर्फ किताबी कीड़ा बनने से काम नहीं चलेगा। उनके कुछ कर्तव्य होते हैं, उसे भी वे पूरा करें।
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उन्होंने देश के राष्ट्रपति राधाकृष्णन की बातों का जिक्र किया। बोले, उनका मत था कि एक महिला दो परिवारों को शिक्षित कर सभ्य समाज की कल्पना को पूरा करती हैं। उन्होंने महाविद्यालय के संस्थापक को आगाह किया कि आज शिक्षा को कुछ लोगों ने धंधा बना लिया है। ऐसे में वो इस विद्यालय को इस तरह से संवारे-निखारे कि आने वाले दिनों में दूरदाराज के लोग भी अपनी बेटी का नामकरण यहां कराना चाहें।
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कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की तरफ से राज्यपाल का स्वागत करने पहुंचे माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री बलराम यादव ने कहा कि महाराष्ट्र और यूपी के बीच की खाई को तीर्थ स्थलों ने पाट दिया है। अब दोनों प्रांतों के बीच दिलों का रिश्ता है।
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श्री नाईक ने कहा कि आज की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा आरक्षण हो गया है, लेकिन बेटियां आरक्षण नहीं मांगतीं। सिर्फ पढ़ाई का हक मांगती हैं। ऐेसे में अब जरूरी है कि देश की प्रगति के लिए बेटियों का शिक्षित होना जरूरी हो गया है। बोले, उप्र का राज्यपाल होने के कारण यहां के विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति हूं। दीक्षांत समारोह में जाने के दौरान मैंने देखा कि अब छात्रों से ज्यादा मेडल छात्राएं प्राप्त करती हैं। ऐसे में इस निर्जन स्थान पर महाविद्यालय की स्थापना बड़ी राष्ट्रसेवा है। उन्होंने लड़कियों को नसीहत दी कि सिर्फ किताबी कीड़ा बनने से काम नहीं चलेगा। उनके कुछ कर्तव्य होते हैं, उसे भी वे पूरा करें।
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उन्होंने देश के राष्ट्रपति राधाकृष्णन की बातों का जिक्र किया। बोले, उनका मत था कि एक महिला दो परिवारों को शिक्षित कर सभ्य समाज की कल्पना को पूरा करती हैं। उन्होंने महाविद्यालय के संस्थापक को आगाह किया कि आज शिक्षा को कुछ लोगों ने धंधा बना लिया है। ऐसे में वो इस विद्यालय को इस तरह से संवारे-निखारे कि आने वाले दिनों में दूरदाराज के लोग भी अपनी बेटी का नामकरण यहां कराना चाहें।