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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Azamgarh News ›   Dinesh Lal Yadav Nirahua told reason for defeat in lok sabha election from Azamgarh

UP: दिनेश लाल यादव निरहुआ ने बताई आजमगढ़ से हार की वजह, बोले- बहकावे में आ गई जनता, पांच साल बाद पूछेगी सवाल

Mon, 17 Jun 2024 05:45 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़।
अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़। Published by: प्रगति चंद Updated Mon, 17 Jun 2024 05:45 PM IST
सार

आजमगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव हारने के बाद पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ ने हार की वजह बताई। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन की ओर से जनता को भ्रमित किया गया। खटाखट पैसे देने और संविधान खत्म करने की बात से लोगों को गुमराह किया गया। 

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Dinesh Lal Yadav Nirahua told reason for defeat in lok sabha election from Azamgarh
दिनेश लाल यादव निरहुआ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आजमगढ़ जिले की सदर लोकसभा सीट से चुनाव हारने के बाद आजमगढ़ के पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ सोमवार को पहली बार मीडिया से मुखातिब हुए। उन्होंने कहा कि वह चुनाव हारने के बाद लखनऊ गए थे, सीएम योगी आदित्यनाथ से मिले। उन्होंने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आपने चुनाव बहुत अच्छा लड़ा और आपको आजमगढ़ छोड़ना नहीं है। केंद्र और प्रदेश में दोनों जगह सरकार हमारी है जिससे आजमगढ़ में कोई भी विकास का कार्य रुकेगा नहीं। 

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उन्होंने कहा कि 3 लाख 47 हजार लोगों ने मुझे आशीर्वाद दिया है। उस आशीर्वाद के दम पर मैं आजमगढ़ में डटकर खड़ा रहूंगा और पांच साल बाद जब फिर से चुनाव होगा तो फिर हम लोग यहां के सांसद धर्मेंद्र यादव से सवाल पूछेंगे। हमने जो दो साल में आजमगढ़ के लिए किया था, वह जनता के सामने है। लेकिन, आपने पांच साल में कितना काम किया है वह बताइए। जीत और हार तो होती रहती है, लेकिन आप जब जनता के प्रतिनिधि के रूप में मैदान में उतरे हैं तो आपका काम यही होना चाहिए कि आप जीतें या हारें आप जनता के बीच रहें। उनका काम करें, वही हम लोग करने वाले हैं। 
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निरहुआ ने अपनी हार को लेकर बताया कि चुनाव में जिस तरह से 'इंडिया' गठबंधन के लोगों ने दुष्प्रचार किया। संविधान खत्म करने की बात कही, खटाखट पैसे देने की बात कही, उन चीजों को लेकर जनता भ्रमित रही और उनके बहकावे में आकर उन्होंने उन्हें मत किया। लेकिन, इसके बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही बने। यह अपने आप में एक बड़ी जीत है। आने वाले समय में जब दोबारा चुनाव होगा, पब्लिक इनसे पूछेगी कि आखिर क्या हुआ उनके चुनावी वादों का। तब उनके पास जवाब नहीं होगा और तब यही जीते प्रत्याशी चुनाव हारेंगे।
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