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वन दरोगा के घर के पास से बिना अनुमति काट लिए हरे पेड़
Updated Sun, 22 Jul 2018 11:40 PM IST
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पवई(आजमगढ़)। ब्लाक के गांव गोखवल में वन दरोगा के मकान के पास से ही तीन दिन में शीशम के पांच पुराने हरे पेड़ को काट लिया गया और बेच भी दिया गया, लेकिन विभाग ने इसे रोकने की जरूरत नहीं समझी। हालांकि वन दरोगा की ओर से अब मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर देने की बात कही जा रही है।
पवई ब्लाक के गोखवल गांव में जंगल और झाड़ी की सरकारी जमीन पर वन विभाग की ओर से पौधरोपण किया गया था। शीसम के पेड़ लगाए गए थे। तीन दिन में यहां से शीसम के पांच पुराने हरे पेड़ को काट लिया गया। मजे की बात ये है कि जहां से पेड़ काटा गया है वहां तीन सौ मीटर की दूरी पर वन दरोगा विक्रम मौर्य का मकान भी है। इसके बाद भी इसे रोकने की जरूरत नहीं समझी गई। इससे वन माफियाओं ने लाखों की कीमत के इन पेड़ों को बेचकर ठिकाने लगा दिया गया। इस संबंध में वन दरोगा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि फारेस्ट गार्ड ने उन्हें पेड़ कटने की सूचना दी थी। इस संबंध में कोई अनुमति भी नहीं ली गई थी। एफआईआर के लिए थाने में तहरीर दी गई है। ग्रामीणों की माने तो पेड़ों के कटने में प्रधान के साथ ही वन विभाग की भूमिका भी संदिग्ध है। मिलीभगत से कीमती पेड़ों को ठिकाने लगाया जा रहा है।
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पवई ब्लाक के गोखवल गांव में जंगल और झाड़ी की सरकारी जमीन पर वन विभाग की ओर से पौधरोपण किया गया था। शीसम के पेड़ लगाए गए थे। तीन दिन में यहां से शीसम के पांच पुराने हरे पेड़ को काट लिया गया। मजे की बात ये है कि जहां से पेड़ काटा गया है वहां तीन सौ मीटर की दूरी पर वन दरोगा विक्रम मौर्य का मकान भी है। इसके बाद भी इसे रोकने की जरूरत नहीं समझी गई। इससे वन माफियाओं ने लाखों की कीमत के इन पेड़ों को बेचकर ठिकाने लगा दिया गया। इस संबंध में वन दरोगा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि फारेस्ट गार्ड ने उन्हें पेड़ कटने की सूचना दी थी। इस संबंध में कोई अनुमति भी नहीं ली गई थी। एफआईआर के लिए थाने में तहरीर दी गई है। ग्रामीणों की माने तो पेड़ों के कटने में प्रधान के साथ ही वन विभाग की भूमिका भी संदिग्ध है। मिलीभगत से कीमती पेड़ों को ठिकाने लगाया जा रहा है।
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