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फर्जी कागजात पर एक ही गांव के 74 लोगों को पौने दो करोड़ लोन
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Sat, 08 Aug 2015 11:51 PM IST
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काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक की सिसवारा बाजार शाखा से फर्जी कागजात के आधार पर एक ही गांव के 74 लोगों ने 1.72 करोड़ रुपये लोन ले लिया। बैंक के आडिट में इस गोलमाल का खुलासा होने व जांच में तत्कालीन शाखा प्रबंधक बलराज की भूमिका संदिग्ध मिलने पर उसे निलंबित कर दिया गया। शुक्रवार को वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक ने दीदारगंज थाने में धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
किसान क्रेडिट के जरिए फर्जी खतौनी बनवाकर सिसवारा गांव के 74 लोगों ने काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक से 2011-12 में एक करोड़ 72 लाख रुपये का लोन ले लिया। जमीन के हिसाब से बैंक ने 50 हजार से लेकर दो लाख तक का लोन दिया। मार्च 2015 में बैंक के आडिट में लोन लेने वाले के कागजात फर्जी होने के बारे में पता चला। इन्हें एक ही व्यक्ति ने प्रमाणित किया था।
बैंक की जांच में लाभार्थियों द्वारा लगाई गई खतौनी की नकल और फूलपुर तहसील के अभिलेखागार में मौजूद रिकार्ड में भिन्नता मिली। इनमें से कई लोग भूमिहीन पाए गए। बावजूद इनके नाम की भी खतौनी लगाई गई थी। एसओ दीदारगंज परमानंद मिश्र के अनुसार, वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक परवेज अख्तर ने शुक्रवार को सिसवारा गांव के 74 लोगों के खिलाफ अभिलेखों में हेराफेरी, कूट रचना कर धोखाधड़ी करने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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लोन लेने वाले सभी लोगों की खतौनी एक ही तरीके की बनी है और सरकारी कंप्यूटर से निकलने वाली खतौनी से भिन्न हैं। लोन के समय बैंक के अधिकृत अधिवक्ता कागजों की जांच कर प्रमाणित करते हैं लेकिन इनके कागजात वकील से प्रमाणित नहीं हैं। इसके अलावा, सभी लाभार्थी एक ही गांव के रहने वाले हैं। ऐसे में बैंक के अधिकारी और बिचौलिए की मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता। पुलिस इन बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है। - मोहम्मद इमरान, एएसपी।
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किसान क्रेडिट के जरिए फर्जी खतौनी बनवाकर सिसवारा गांव के 74 लोगों ने काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक से 2011-12 में एक करोड़ 72 लाख रुपये का लोन ले लिया। जमीन के हिसाब से बैंक ने 50 हजार से लेकर दो लाख तक का लोन दिया। मार्च 2015 में बैंक के आडिट में लोन लेने वाले के कागजात फर्जी होने के बारे में पता चला। इन्हें एक ही व्यक्ति ने प्रमाणित किया था।
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बैंक की जांच में लाभार्थियों द्वारा लगाई गई खतौनी की नकल और फूलपुर तहसील के अभिलेखागार में मौजूद रिकार्ड में भिन्नता मिली। इनमें से कई लोग भूमिहीन पाए गए। बावजूद इनके नाम की भी खतौनी लगाई गई थी। एसओ दीदारगंज परमानंद मिश्र के अनुसार, वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक परवेज अख्तर ने शुक्रवार को सिसवारा गांव के 74 लोगों के खिलाफ अभिलेखों में हेराफेरी, कूट रचना कर धोखाधड़ी करने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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लोन लेने वाले सभी लोगों की खतौनी एक ही तरीके की बनी है और सरकारी कंप्यूटर से निकलने वाली खतौनी से भिन्न हैं। लोन के समय बैंक के अधिकृत अधिवक्ता कागजों की जांच कर प्रमाणित करते हैं लेकिन इनके कागजात वकील से प्रमाणित नहीं हैं। इसके अलावा, सभी लाभार्थी एक ही गांव के रहने वाले हैं। ऐसे में बैंक के अधिकारी और बिचौलिए की मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता। पुलिस इन बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है। - मोहम्मद इमरान, एएसपी।