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बंदोबस्त से गायब हुआ गुरुद्वारे का नाम
Updated Thu, 29 Nov 2018 12:04 AM IST
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आजमगढ़। श्री गुरुनानक दरबार संगत गुरुद्वारा विठ्ठलघाट के पदाधिकारियों ने मंगलवार को जिलाधिकारी से गुरुद्वारे की भूमि का नाम बंदोबस्त से गायब होने की शिकायत की। उनकी इस शिकायत पर जिलाधिकारी ने मुख्य राजस्व अधिकारी को अभिलेखों की जांच करने का निर्देश दिया है।
संगत के वरिष्ठ अधिवक्ता माया सिंह ने जिलाधिकारी को बताया कि 1872 बंदोबस्त में विठ्ठल घाट में गाटा संख्या 438 अहाता स्थान संगत जी महाराज कब्जेेदार भरत स्वरूप गोसाई चेला बाबा राम प्रसाद जी फकीर नानक शाही के नाम से दर्ज थी। जिसका क्षेत्रफल लगभग एक एकड़ था। इसी के बगल में गाटा संख्या 437 नंबर नवीन परती कदीम मैं शिवाला और मस्जिद के नाम दर्ज था। वर्ष 1901 के बंदोबस्त में गुरुनानक शाही विठ्ठलघाट हनुमान गढ़ी है। इसके बाद नंबर बदलते रहे और वर्ष 1942 में यह गाटा रामा देवी पत्नी गोविंद चरण के नाम दर्ज हो गया। जिसका नया गाटा नंबर 248, 249, 2500 251 और 252 हो गया। इसके बाद उक्त जमीन की बिक्री होनी शुरू हो गई। अब तक कुल 33 लोग इसमें जमीन की खरीद कर चुके हैं। वर्तमान में गुरुद्वारा गाटा नंबर 250 में स्थित लेकिन उसमें गुरुद्वारे का नाम नहीं बल्कि आबादी दर्ज है। उन्होंने जिलाधिकारी से उक्त गुरुद्वारे का नाम दर्ज करने की मांग की। साथ ही यह भी कहा गया कि जो जमीन गुरुद्वारे के नाम दर्ज थी उस पर किसी व्यक्ति का नाम कैसे दर्ज हुआ इस बात की भी जांच होनी चाहिए। उनकी बातों को सुनने के बाद जिलाधिकारी ने मुख्य राजस्व अधिकारी आलोक कुमार वर्मा को अभिलेखों की जांच का निर्देश दिया।
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संगत के वरिष्ठ अधिवक्ता माया सिंह ने जिलाधिकारी को बताया कि 1872 बंदोबस्त में विठ्ठल घाट में गाटा संख्या 438 अहाता स्थान संगत जी महाराज कब्जेेदार भरत स्वरूप गोसाई चेला बाबा राम प्रसाद जी फकीर नानक शाही के नाम से दर्ज थी। जिसका क्षेत्रफल लगभग एक एकड़ था। इसी के बगल में गाटा संख्या 437 नंबर नवीन परती कदीम मैं शिवाला और मस्जिद के नाम दर्ज था। वर्ष 1901 के बंदोबस्त में गुरुनानक शाही विठ्ठलघाट हनुमान गढ़ी है। इसके बाद नंबर बदलते रहे और वर्ष 1942 में यह गाटा रामा देवी पत्नी गोविंद चरण के नाम दर्ज हो गया। जिसका नया गाटा नंबर 248, 249, 2500 251 और 252 हो गया। इसके बाद उक्त जमीन की बिक्री होनी शुरू हो गई। अब तक कुल 33 लोग इसमें जमीन की खरीद कर चुके हैं। वर्तमान में गुरुद्वारा गाटा नंबर 250 में स्थित लेकिन उसमें गुरुद्वारे का नाम नहीं बल्कि आबादी दर्ज है। उन्होंने जिलाधिकारी से उक्त गुरुद्वारे का नाम दर्ज करने की मांग की। साथ ही यह भी कहा गया कि जो जमीन गुरुद्वारे के नाम दर्ज थी उस पर किसी व्यक्ति का नाम कैसे दर्ज हुआ इस बात की भी जांच होनी चाहिए। उनकी बातों को सुनने के बाद जिलाधिकारी ने मुख्य राजस्व अधिकारी आलोक कुमार वर्मा को अभिलेखों की जांच का निर्देश दिया।
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