{"_id":"5c5342eebdec227376727800","slug":"21548960494-azamgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चौकी के सामने प्रतिमा टूटने से भड़की हिंसा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
चौकी के सामने प्रतिमा टूटने से भड़की हिंसा
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अंबारी। नगर पंचायत माहुल में पुलिस चौकी के सामने ही डा. भीम राव अंबेडकर की प्रतिमा तोड़ने से लोग भड़क उठे। घटना के बाद न तो चौकी प्रभारी तत्काल मौके पर पहुंचे, ना ही कोई सिपाही आया। भीड़ जब आरोपी को पकड़ कर पीटने लगी तो बीचबचाव करने के लिए पुलिस पहुंची। इससे आसपास कई गांव के दलित आक्रोशित होकर हमलावर हो गए। घटना की कराई गई वीडियोग्राफी के जरिए पुलिस उपद्रवियों की पहचान में जुट गई है।
नगर पंचायत माहुल से सटे इमामगढ़ गांव निवासी मिठाईलाल की तहरीर के आधार पर अहरौला थाने में दर्ज हुई रिपोर्ट में पूरामया पांडेय गांव निवासी आलोक पांडेय, विमलेश पांडेय, विनय पांडेय, आंशू जायसवाल को नामजद और एक अज्ञात को आरोपित किया गया है। मिठाईलाल का आरोप है कि इन आरोपियों ने उकसाकर आलोक से प्रतिमा तोड़वाई है। मिठाईलाल के मुताबिक आलोक को लोगों ने पकड़ लिया जबकि पुलिस नहीं पहुंची। आस्था पर चोट से नाराज समुदाय के लोग कुछ ही देर में भीड़ के रूप में वहां पहुंच गए। घटना के काफी देर बाद पहुंचे चौकी प्रभारी राजेश मौर्य अपने साथ एक सिपाही लेकर पहुंचे और आरोपी को अपने कब्जे में लेकर चले गए। लोगों के मुताबिक पुलिस चौकी में आरोपी के जाते ही लोगों ने आपा खो दिया और पथराव, आगजनी, चक्काजाम कर दिया। सड़क जाम के दौरान उपद्रव करने वाले कई राहगीरों के साथ भी अभद्रता की गई। एसओ अहरौला अयोध्या तिवारी ने बताया कि मुखबिर की सूचना को पुष्ट करने के लिए चौकी प्रभारी क्षेत्र में गए थे, जिसकी वजह से उन्हें पहुंचने में देरी हुई है। एसओ ने बताया कि मिठाईलाल की तहरीर के आधार पर प्रतिमा तोड़ने के मामले में चार नामजद और एक अज्ञात के विरुद्ध केस दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही।
अहरौला/अंबारी। दिमागी रूप से बीमार आलोक के अंबेडकर प्रतिमा तोड़ने से नाराज दलित समुदाय के लोग महज कुछ ही देर में जुट गए। सभी लाठी, बांस, ईंट-पत्थर से लैस थे। इन लोगों ने दुकान में पथराव करते हुए वाहनों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। शराब की दुकानों को तोड़ने का प्रयास किया गया और दुकान के सेल्समैन सहित अन्य को मारपीटकर घायल कर दिया। घायलों का अलग-अलग इलाज चल रहा। इस घटना से बाजार के लोग करीब आठ घंटे दहशत में रहे।
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माहुल बाजार के दुकानदारों के मुताबिक प्रतिमा तोड़ने कामुख्य आरोपी आलोक पांडेय अक्सर बाजार में घूमते रहता है। गुरुवार की सुबह करीब सात बजे आलोक ने पुलिस चौकी के सामने स्थित आंबेडकर प्रतिमा को तोड़ दी। इससे नाराज दलित समुदाय के लोगों ने क्लिनिक संचालक डा. बृजेश राजभर की बाहर खड़ी कार का शीशा, श्याम सिंह की बाइक तोड़ दी और दुकानों में पथराव किया। इससे सहमे दुकानदारों ने शटर गिरा दिया। शराब की दुकान में भी तोड़फोड़ कर शराब लेने का प्रयास किया गया। विरोध करने पर मनबढ़ों ने अंग्रेजी शराब की दुकान के सेल्समैन को पीटक र घायल कर दिया। इतना ही नहीं पुलिस चौकी के ठीक सामने अन्य स्थानों पर टायर आदि जलाए गए । बाजार का हर कोई इस माहौल से भयभीत दिखा।
अंबारी/अहरौला। अंबेडकर प्रतिमा तोड़े जाने से नाराज दलित मुख्य चौक पर जाम करते हुए हिंसक हो गए। हिंसा प्रदर्शन में शामिल नेताओं के सामने ही उपद्रवियों ने उनकी होर्डिंग, पोस्टर फाड़ दी। सरकार द्वारा जनकल्याणकारी योजनाओं के संबंधित पोस्टर, होर्डिंग को भी नहीं छोड़ा। घटना के करीब पांच घंटे बाद दोपहर बारह बजे बसपा के पूर्व सांसद डा. बलिराम मौके पर पहुंचे और सड़क जाम करने वालों से मिले। पूर्व सांसद के पहुंचने के कुछ ही देर बाद सपा के पूर्व क्षेत्रीय विधायक श्यामबहादुर यादव भी समर्थकों संग पहुंचे। पूर्व विधायक पहुंचते ही उपद्रव करने वाले और उग्र हो गए और उनके सामने ही उनकी होर्डिंग पर पथराव करते हुए फाड़ दिया।
नगर पंचायत माहुल में गुरुवार की सुबह अंबेडकर प्रतिमा तोड़े जाने के बाद माहुल पुलिस चौकी में हुए पथराव और तोडफ़ोड़ से नुकसान, डायल 100 की गाड़ी के नुकसान, दुकानदारों के दुकानों में हुई तोडफ़ोड़ से नुकसान आदि का माहौल शांत होने के बाद अनुमान लगाया जा रहा। ताकि लोग अपने-अपने नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध केस दर्ज करा सकें।
ज्यादातर लोग घर छोड़कर फरार
नगर पंचायत माहुल में गुरुवार को अंबेडकर प्रतिमा तोड़े जाने के बाद कस्बे में सड़क जाम, आगजनी, मारपीट, तोडफ़ोड़ की घटना में शामिल लोगों की तलाश में पुलिस छापेमारी शुरू कर दी है। गिरफ्तारी के भय से ज्यादातर लोग फरार हो गए हैं। घर पर केवल महिलाएं ही नजर आई। कार्रवाई के भय से यहां सियापा छाया हुआ है।
आजमगढ़। अंबेडकर प्रतिमा टूटने के कुछ ही देर में यहां हालात बेकाबू हो गए। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए डीएम, एसपी को 14 थानों की फोर्स और पीएसी तक बुलानी पड़ गई। यहां की घटना से एक अप्रैल को सगड़ी तहसील के सामने हुई हिंसक घटना की याद ताजी हो गई। हालांकि इस मामले में शामिल दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई का मामला फाइलों में दबकर रह गया। उसी लापरवाही का परिणाम पुन: देखने को मिला।
घटनाओं पर गौर करें तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसटीएससी एक्ट में किए गए संशोधन के विरोध में तमाम दलित संगठनों द्वारा दो अप्रैल को भारत बंद का एलान किया गया था। इस दिन प्रदर्शनकारी अचानक हमलावर होकर सगड़ी तहसील मेें हमला बोलते हुए तोडफ़ोड़ करते हुए अधिकारी और कर्मचारियों को पीट दिया। जीयनपुर कोतवाल की जीप पर जानलेवा हमलाकर कोतवाल सहित कई पुलिसवालों को घायल कर दिया। उपद्रवियों ने भारत-नेपाल मैत्री बस सहित रोडवेज की आधा दर्जन से अधिक बसों में आग लगा दिया। यात्रियों के साथ अभद्रता भी किया। उपद्रव करने वालों की अब तक ना ही पुलिस पहचान कर सकी, ना ही उनके विरुद्ध कोई ठोस एक्शन लिया गया। करीब एक वर्ष के भीतर अंबेडकर प्रतिमा मेंहनगर, कप्तानगंज, जहानागंज, पवई, देवगांव, अतरौलिया आदि थाना क्षेत्रों में टूटी, मरम्मत भी हो गया। पर इस कदर तांडव नहीं हुआ था। अंबेडकर प्रतिमाओं के टूटने पर होने वाले बवाल को देखते हुए डीजीपी ओपी सिंह द्वारा सभी प्रतिमाओं की सुरक्षा के लिए लोहे का घेरा और स्थानीय स्तर पर कमेटी गठित करने का आदेश दिया है। बावजूद इसके ज्यादातर स्थानों पर लगी प्रतिमा ऐसे ही खुले में पड़ी हुई हैं। डीजीपी के आदेश का पालन होते हुए चौकी के सामने की प्रतिमा का सुरक्षा घेरा बना दिया गया होता तो शायद यह दिन देखने को नहीें मिला। यदि समय रहते प्रशासन इस मामले में सावधानी नहीं बरता तो आने वाले दिनों में इसके और भी गंभीर परिणाम देखने को मिल सकता है।
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नगर पंचायत माहुल से सटे इमामगढ़ गांव निवासी मिठाईलाल की तहरीर के आधार पर अहरौला थाने में दर्ज हुई रिपोर्ट में पूरामया पांडेय गांव निवासी आलोक पांडेय, विमलेश पांडेय, विनय पांडेय, आंशू जायसवाल को नामजद और एक अज्ञात को आरोपित किया गया है। मिठाईलाल का आरोप है कि इन आरोपियों ने उकसाकर आलोक से प्रतिमा तोड़वाई है। मिठाईलाल के मुताबिक आलोक को लोगों ने पकड़ लिया जबकि पुलिस नहीं पहुंची। आस्था पर चोट से नाराज समुदाय के लोग कुछ ही देर में भीड़ के रूप में वहां पहुंच गए। घटना के काफी देर बाद पहुंचे चौकी प्रभारी राजेश मौर्य अपने साथ एक सिपाही लेकर पहुंचे और आरोपी को अपने कब्जे में लेकर चले गए। लोगों के मुताबिक पुलिस चौकी में आरोपी के जाते ही लोगों ने आपा खो दिया और पथराव, आगजनी, चक्काजाम कर दिया। सड़क जाम के दौरान उपद्रव करने वाले कई राहगीरों के साथ भी अभद्रता की गई। एसओ अहरौला अयोध्या तिवारी ने बताया कि मुखबिर की सूचना को पुष्ट करने के लिए चौकी प्रभारी क्षेत्र में गए थे, जिसकी वजह से उन्हें पहुंचने में देरी हुई है। एसओ ने बताया कि मिठाईलाल की तहरीर के आधार पर प्रतिमा तोड़ने के मामले में चार नामजद और एक अज्ञात के विरुद्ध केस दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही।
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अहरौला/अंबारी। दिमागी रूप से बीमार आलोक के अंबेडकर प्रतिमा तोड़ने से नाराज दलित समुदाय के लोग महज कुछ ही देर में जुट गए। सभी लाठी, बांस, ईंट-पत्थर से लैस थे। इन लोगों ने दुकान में पथराव करते हुए वाहनों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। शराब की दुकानों को तोड़ने का प्रयास किया गया और दुकान के सेल्समैन सहित अन्य को मारपीटकर घायल कर दिया। घायलों का अलग-अलग इलाज चल रहा। इस घटना से बाजार के लोग करीब आठ घंटे दहशत में रहे।
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माहुल बाजार के दुकानदारों के मुताबिक प्रतिमा तोड़ने कामुख्य आरोपी आलोक पांडेय अक्सर बाजार में घूमते रहता है। गुरुवार की सुबह करीब सात बजे आलोक ने पुलिस चौकी के सामने स्थित आंबेडकर प्रतिमा को तोड़ दी। इससे नाराज दलित समुदाय के लोगों ने क्लिनिक संचालक डा. बृजेश राजभर की बाहर खड़ी कार का शीशा, श्याम सिंह की बाइक तोड़ दी और दुकानों में पथराव किया। इससे सहमे दुकानदारों ने शटर गिरा दिया। शराब की दुकान में भी तोड़फोड़ कर शराब लेने का प्रयास किया गया। विरोध करने पर मनबढ़ों ने अंग्रेजी शराब की दुकान के सेल्समैन को पीटक र घायल कर दिया। इतना ही नहीं पुलिस चौकी के ठीक सामने अन्य स्थानों पर टायर आदि जलाए गए । बाजार का हर कोई इस माहौल से भयभीत दिखा।
अंबारी/अहरौला। अंबेडकर प्रतिमा तोड़े जाने से नाराज दलित मुख्य चौक पर जाम करते हुए हिंसक हो गए। हिंसा प्रदर्शन में शामिल नेताओं के सामने ही उपद्रवियों ने उनकी होर्डिंग, पोस्टर फाड़ दी। सरकार द्वारा जनकल्याणकारी योजनाओं के संबंधित पोस्टर, होर्डिंग को भी नहीं छोड़ा। घटना के करीब पांच घंटे बाद दोपहर बारह बजे बसपा के पूर्व सांसद डा. बलिराम मौके पर पहुंचे और सड़क जाम करने वालों से मिले। पूर्व सांसद के पहुंचने के कुछ ही देर बाद सपा के पूर्व क्षेत्रीय विधायक श्यामबहादुर यादव भी समर्थकों संग पहुंचे। पूर्व विधायक पहुंचते ही उपद्रव करने वाले और उग्र हो गए और उनके सामने ही उनकी होर्डिंग पर पथराव करते हुए फाड़ दिया।
नगर पंचायत माहुल में गुरुवार की सुबह अंबेडकर प्रतिमा तोड़े जाने के बाद माहुल पुलिस चौकी में हुए पथराव और तोडफ़ोड़ से नुकसान, डायल 100 की गाड़ी के नुकसान, दुकानदारों के दुकानों में हुई तोडफ़ोड़ से नुकसान आदि का माहौल शांत होने के बाद अनुमान लगाया जा रहा। ताकि लोग अपने-अपने नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध केस दर्ज करा सकें।
ज्यादातर लोग घर छोड़कर फरार
नगर पंचायत माहुल में गुरुवार को अंबेडकर प्रतिमा तोड़े जाने के बाद कस्बे में सड़क जाम, आगजनी, मारपीट, तोडफ़ोड़ की घटना में शामिल लोगों की तलाश में पुलिस छापेमारी शुरू कर दी है। गिरफ्तारी के भय से ज्यादातर लोग फरार हो गए हैं। घर पर केवल महिलाएं ही नजर आई। कार्रवाई के भय से यहां सियापा छाया हुआ है।
आजमगढ़। अंबेडकर प्रतिमा टूटने के कुछ ही देर में यहां हालात बेकाबू हो गए। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए डीएम, एसपी को 14 थानों की फोर्स और पीएसी तक बुलानी पड़ गई। यहां की घटना से एक अप्रैल को सगड़ी तहसील के सामने हुई हिंसक घटना की याद ताजी हो गई। हालांकि इस मामले में शामिल दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई का मामला फाइलों में दबकर रह गया। उसी लापरवाही का परिणाम पुन: देखने को मिला।
घटनाओं पर गौर करें तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसटीएससी एक्ट में किए गए संशोधन के विरोध में तमाम दलित संगठनों द्वारा दो अप्रैल को भारत बंद का एलान किया गया था। इस दिन प्रदर्शनकारी अचानक हमलावर होकर सगड़ी तहसील मेें हमला बोलते हुए तोडफ़ोड़ करते हुए अधिकारी और कर्मचारियों को पीट दिया। जीयनपुर कोतवाल की जीप पर जानलेवा हमलाकर कोतवाल सहित कई पुलिसवालों को घायल कर दिया। उपद्रवियों ने भारत-नेपाल मैत्री बस सहित रोडवेज की आधा दर्जन से अधिक बसों में आग लगा दिया। यात्रियों के साथ अभद्रता भी किया। उपद्रव करने वालों की अब तक ना ही पुलिस पहचान कर सकी, ना ही उनके विरुद्ध कोई ठोस एक्शन लिया गया। करीब एक वर्ष के भीतर अंबेडकर प्रतिमा मेंहनगर, कप्तानगंज, जहानागंज, पवई, देवगांव, अतरौलिया आदि थाना क्षेत्रों में टूटी, मरम्मत भी हो गया। पर इस कदर तांडव नहीं हुआ था। अंबेडकर प्रतिमाओं के टूटने पर होने वाले बवाल को देखते हुए डीजीपी ओपी सिंह द्वारा सभी प्रतिमाओं की सुरक्षा के लिए लोहे का घेरा और स्थानीय स्तर पर कमेटी गठित करने का आदेश दिया है। बावजूद इसके ज्यादातर स्थानों पर लगी प्रतिमा ऐसे ही खुले में पड़ी हुई हैं। डीजीपी के आदेश का पालन होते हुए चौकी के सामने की प्रतिमा का सुरक्षा घेरा बना दिया गया होता तो शायद यह दिन देखने को नहीें मिला। यदि समय रहते प्रशासन इस मामले में सावधानी नहीं बरता तो आने वाले दिनों में इसके और भी गंभीर परिणाम देखने को मिल सकता है।